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प्लाईवुड फैक्टरियों पर कृषि विभाग की टीम ने मारे छापे
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प्लाईवुड फैक्टरियों पर कृषि विभाग की टीम ने मारे छापे
हापुड़। किसानों को दिए जाने वाले अनुदानित यूरिया के प्रयोग की सूचना पर शुक्रवार को कृषि विभाग की टीम ने प्लाईवुड फैक्टरियों में शासन के आदेश पर छापे मारे। स्टॉक का निरीक्षण कर खाद की स्थिति को परखा। हालांकि हापुड़ की किसी फैक्टरी में इस तरह के यूरिया का प्रयोग होता नहीं पाया गया। जिसकी सूचना शासन को प्रेषित कर दी गई है।
किसानों को शासन की ओर से यूरिया पर अनुदान दिया जाता है, लेकिन इस यूरिया का फायदा कुछ औद्योगिक इकाईयां उठाती हैं। शासन से जिले के अधिकारियों को निर्देश मिले की हापुड़ की कुछ फैक्टरियों में अनुदानित यूरिया के प्रयोग की सूचना मिल रही है।
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह अपनी टीम के साथ शहर की विभिन्न प्लाईवुड फैक्टरी में पहुंचे। वहां खाद के स्टॉक की गहनता से जांच की गई। फैक्टरियों में टेक्नीकल यूरिया ही मिला जो औद्योगिक इकाईयों को दिया जाता है। सब कुछ सामान्य मिलने पर जिला कृषि अधिकारी ने रिपोर्ट तैयार कर डीएम के माध्यम से शासन को प्रेषित करा दी है।
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जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान फैक्टरियों में अनुदानित यूरिया का प्रयोग होता नहीं मिला है। आगे भी यह निरीक्षण जारी रहेगा।
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हापुड़। किसानों को दिए जाने वाले अनुदानित यूरिया के प्रयोग की सूचना पर शुक्रवार को कृषि विभाग की टीम ने प्लाईवुड फैक्टरियों में शासन के आदेश पर छापे मारे। स्टॉक का निरीक्षण कर खाद की स्थिति को परखा। हालांकि हापुड़ की किसी फैक्टरी में इस तरह के यूरिया का प्रयोग होता नहीं पाया गया। जिसकी सूचना शासन को प्रेषित कर दी गई है।
किसानों को शासन की ओर से यूरिया पर अनुदान दिया जाता है, लेकिन इस यूरिया का फायदा कुछ औद्योगिक इकाईयां उठाती हैं। शासन से जिले के अधिकारियों को निर्देश मिले की हापुड़ की कुछ फैक्टरियों में अनुदानित यूरिया के प्रयोग की सूचना मिल रही है।
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जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह अपनी टीम के साथ शहर की विभिन्न प्लाईवुड फैक्टरी में पहुंचे। वहां खाद के स्टॉक की गहनता से जांच की गई। फैक्टरियों में टेक्नीकल यूरिया ही मिला जो औद्योगिक इकाईयों को दिया जाता है। सब कुछ सामान्य मिलने पर जिला कृषि अधिकारी ने रिपोर्ट तैयार कर डीएम के माध्यम से शासन को प्रेषित करा दी है।
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जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान फैक्टरियों में अनुदानित यूरिया का प्रयोग होता नहीं मिला है। आगे भी यह निरीक्षण जारी रहेगा।