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किसानों को 220 करोड़ की फर्जी बकाएदारी से राहत का रास्ता साफ
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किसानों को 220 करोड़ की फर्जी बकाएदारी से राहत का रास्ता साफ
हापुड़। बिजली निगम के चर्चित 220 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले का दंश झेल रहे सैकड़ों किसानों को जल्द ही बिजली बिलों की गड़बड़ी से राहत मिलेगी। वर्ष 2005 के बाद कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गई रसीदों का मिलान निगम कार्यालयों में चालान से किया जा रहा है। हालांकि वर्ष 2005 से पहले कनेक्शन लेने वाले किसानों को इसका लाभ फिलहाल नहीं मिल सकेगा। ।
नलकूप किसानों के लेजर में गड़बड़ी और जमा की गई धनराशि का गबन कर हापुड़ के बिजली निगम में कुछ भ्रष्ट लिपिक व अधिकारियों ने 220 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया था, जो अब बढ़कर तीन अरब से भी ऊपर पहुंच गया है। इस मामले में कई अधिकारियों व लिपिकों को जेल भी जाना पड़ा था। वर्ष 2003-4 में यह घोटाला हुआ था।
इसका नतीजा यह रहा कि बेकसूर किसानों के बिलों में गड़बड़ी आनी शुरू हो गई। बिल जमा करने के बाद भी किसानों पर बकायेदारी के नोटिस आने लगे। इस प्रकरण की जांच तभी से चल रही है, महत्वपूर्ण जांच एजेंसियां यहां तक की ईडी भी इस मामले की फाइलें खंगाल चुकी है।
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लेकिन भ्रष्ट अधिकारी व लिपिकों की पहुंच इतनी ऊपर तक है कि यह एजेंसियां भी आज तक तय नहीं कर पायी कि दोष किसका है। हालांकि इस मामले में हापुड़ डीएम अदिति सिंह ने जांच को लेकर बड़ा निर्णय लिया था और फाइल शासन तक पहुंचा दी थी। जिसके बाद एक स्पेशल टीम का गठन कर, उसे जांच सौंपी गई। इस टीम में निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार हापुड़ के बिजली निगम कार्यालय से घोटाले से संबंधित दस्तावेजों को टीम अपने साथ लेकर जा चुकी है। हालांकि इस घोटाले का फायदा अगले कई साल तक कुछ लिपिक उठाते रहे। जिसके बाद कनेक्शन लेने वाले किसानों के बिलों में भी गड़बड़ी आने लगी। आए दिन किसानों की आ रही शिकायतों को देखते हुए अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने खुद ही कमान संभाली है। घोटाले के समय वाले कनेक्शन को छोड़कर उन्होंने वर्ष 2005 के बाद लिए गए कनेक्शनों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। इन किसानों द्वारा जमा किए बिलों की रसीदों का वह निगम में जमा चालानों से मिलान करा रहे हैं, जिन किसानों के पूरे बिल जमा हैं उन्हें संशोधित किया जा रहा है। ऐसे में सैकड़ों किसानों को बिलों में जुड़कर आ रही लाखों की बकायेदारी से जल्द ही राहत मिलने जा रही है। हालांकि घपले के समय वाले किसानों को फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
हापुड़ में चार्ज लेने से डरते हैं अधिकारी-
नलकूप लेजरों में गड़बड़ी कर करोड़ों के घपले के बाद से यहां बिजली निगम का कोई भी बड़ा अधिकारी चार्ज लेने से डरता है। जिन्हें शासन द्वारा यहां भेजा जाता है वह भी इस मामले में हस्तक्षेप से दूरी बनाकर रखते हैं।
बिल जमा करने के बावजूद किसान होते हैं शर्मसार
नलकूप कनेक्शन का बिल जमा करने के बावजूद किसानों के बिलों में लाखों रुपये जुड़कर आ रहे हैं। जिसके चलते गांव में उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। इसका जवाब जब वह अधिकारियों से मांगते हैं तो उन्हें चलता कर दिया जाता है।
कोट
अधिशासी अभियंता मनोज कुमार का कहना है कि घोटाले के बाद जिन किसानों ने कनेक्शन लिया है। उनके जमा बिलों की रसीदों को मिलान निगम कार्यालय में जमा चालानों से कराया जा रहा है। इससे साफ होगा किसानों का कितना बिल जमा है। यदि सब कुछ सही है तो बिलों को संशोधित कर दिया जाएगा।
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हापुड़। बिजली निगम के चर्चित 220 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले का दंश झेल रहे सैकड़ों किसानों को जल्द ही बिजली बिलों की गड़बड़ी से राहत मिलेगी। वर्ष 2005 के बाद कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गई रसीदों का मिलान निगम कार्यालयों में चालान से किया जा रहा है। हालांकि वर्ष 2005 से पहले कनेक्शन लेने वाले किसानों को इसका लाभ फिलहाल नहीं मिल सकेगा। ।
नलकूप किसानों के लेजर में गड़बड़ी और जमा की गई धनराशि का गबन कर हापुड़ के बिजली निगम में कुछ भ्रष्ट लिपिक व अधिकारियों ने 220 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया था, जो अब बढ़कर तीन अरब से भी ऊपर पहुंच गया है। इस मामले में कई अधिकारियों व लिपिकों को जेल भी जाना पड़ा था। वर्ष 2003-4 में यह घोटाला हुआ था।
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इसका नतीजा यह रहा कि बेकसूर किसानों के बिलों में गड़बड़ी आनी शुरू हो गई। बिल जमा करने के बाद भी किसानों पर बकायेदारी के नोटिस आने लगे। इस प्रकरण की जांच तभी से चल रही है, महत्वपूर्ण जांच एजेंसियां यहां तक की ईडी भी इस मामले की फाइलें खंगाल चुकी है।
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लेकिन भ्रष्ट अधिकारी व लिपिकों की पहुंच इतनी ऊपर तक है कि यह एजेंसियां भी आज तक तय नहीं कर पायी कि दोष किसका है। हालांकि इस मामले में हापुड़ डीएम अदिति सिंह ने जांच को लेकर बड़ा निर्णय लिया था और फाइल शासन तक पहुंचा दी थी। जिसके बाद एक स्पेशल टीम का गठन कर, उसे जांच सौंपी गई। इस टीम में निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार हापुड़ के बिजली निगम कार्यालय से घोटाले से संबंधित दस्तावेजों को टीम अपने साथ लेकर जा चुकी है। हालांकि इस घोटाले का फायदा अगले कई साल तक कुछ लिपिक उठाते रहे। जिसके बाद कनेक्शन लेने वाले किसानों के बिलों में भी गड़बड़ी आने लगी। आए दिन किसानों की आ रही शिकायतों को देखते हुए अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने खुद ही कमान संभाली है। घोटाले के समय वाले कनेक्शन को छोड़कर उन्होंने वर्ष 2005 के बाद लिए गए कनेक्शनों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। इन किसानों द्वारा जमा किए बिलों की रसीदों का वह निगम में जमा चालानों से मिलान करा रहे हैं, जिन किसानों के पूरे बिल जमा हैं उन्हें संशोधित किया जा रहा है। ऐसे में सैकड़ों किसानों को बिलों में जुड़कर आ रही लाखों की बकायेदारी से जल्द ही राहत मिलने जा रही है। हालांकि घपले के समय वाले किसानों को फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
हापुड़ में चार्ज लेने से डरते हैं अधिकारी-
नलकूप लेजरों में गड़बड़ी कर करोड़ों के घपले के बाद से यहां बिजली निगम का कोई भी बड़ा अधिकारी चार्ज लेने से डरता है। जिन्हें शासन द्वारा यहां भेजा जाता है वह भी इस मामले में हस्तक्षेप से दूरी बनाकर रखते हैं।
बिल जमा करने के बावजूद किसान होते हैं शर्मसार
नलकूप कनेक्शन का बिल जमा करने के बावजूद किसानों के बिलों में लाखों रुपये जुड़कर आ रहे हैं। जिसके चलते गांव में उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। इसका जवाब जब वह अधिकारियों से मांगते हैं तो उन्हें चलता कर दिया जाता है।
कोट
अधिशासी अभियंता मनोज कुमार का कहना है कि घोटाले के बाद जिन किसानों ने कनेक्शन लिया है। उनके जमा बिलों की रसीदों को मिलान निगम कार्यालय में जमा चालानों से कराया जा रहा है। इससे साफ होगा किसानों का कितना बिल जमा है। यदि सब कुछ सही है तो बिलों को संशोधित कर दिया जाएगा।