{"_id":"62683879c3c2c3273570a3fa","slug":"hapur-news-garh-news-gbd2374982197","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्याय शुल्क में बढ़ोतरी के विरोध में हड़ताल पर रहे अधिवक्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न्याय शुल्क में बढ़ोतरी के विरोध में हड़ताल पर रहे अधिवक्ता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्याय शुल्क में बढ़ोतरी के विरोध में हड़ताल पर रहे अधिवक्ता
गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ बार एसोसिएशन गढ़मुक्तेश्वर के अधिवक्ताओं ने बैठक कर न्यायालयों की विभिन्न प्रक्रिया में प्रयोग होने वाले न्याय शुल्क में बढ़ोतरी होने के विरोध में एसडीएम को ज्ञापन दिया। इस दौरान वह हड़ताल पर रहे।
मंगलवार को गढ़ बार एसोसिएशन गढ़मुक्तेश्वर अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में बैठक किया गया। जिसमें उन्होंने बताया कि यूपी सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें उल्लेखनीय है कि न्यायालयों की विभिन्न प्रक्रियाओं में उपयोग होने वाली न्याय शुल्क 10 से 100 गुना वृद्धि कर वादियों पर डाले गए हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक दबाव और रेंन कंट्रोल अधिनियम 13 सन 1972 को निरस्त कर यूपी सरकार ने यूपी नगरीय परिसर किराएदारी विनियम अधिनियम 2021 लागू किया है। जिसका उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच संघर्ष कोर्ट समिति के आह्वान पर विचार किया और सरकार द्वारा किए गए दोनों संसोधनों का विरोध किया। वहीं बार के अधिवक्ता अपनी मांग को लेकर न्यायिक कार्य से विरत रहे। जिसके बाद सभी अधिवक्ताओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर सचिव प्रशांत कुमार, रिजवान अहमद, बिजेंद्र कुमार, शिवम भारद्वाज, कैलाश कुमार, प्रदीप निषाद, दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ बार एसोसिएशन गढ़मुक्तेश्वर के अधिवक्ताओं ने बैठक कर न्यायालयों की विभिन्न प्रक्रिया में प्रयोग होने वाले न्याय शुल्क में बढ़ोतरी होने के विरोध में एसडीएम को ज्ञापन दिया। इस दौरान वह हड़ताल पर रहे।
मंगलवार को गढ़ बार एसोसिएशन गढ़मुक्तेश्वर अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में बैठक किया गया। जिसमें उन्होंने बताया कि यूपी सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें उल्लेखनीय है कि न्यायालयों की विभिन्न प्रक्रियाओं में उपयोग होने वाली न्याय शुल्क 10 से 100 गुना वृद्धि कर वादियों पर डाले गए हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक दबाव और रेंन कंट्रोल अधिनियम 13 सन 1972 को निरस्त कर यूपी सरकार ने यूपी नगरीय परिसर किराएदारी विनियम अधिनियम 2021 लागू किया है। जिसका उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच संघर्ष कोर्ट समिति के आह्वान पर विचार किया और सरकार द्वारा किए गए दोनों संसोधनों का विरोध किया। वहीं बार के अधिवक्ता अपनी मांग को लेकर न्यायिक कार्य से विरत रहे। जिसके बाद सभी अधिवक्ताओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर सचिव प्रशांत कुमार, रिजवान अहमद, बिजेंद्र कुमार, शिवम भारद्वाज, कैलाश कुमार, प्रदीप निषाद, दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन