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गढ़ विधानसभा में दलों ने नए चेहरों पर लगाया दाव
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गढ़ विधानसभा में दलों ने नए चेहरों पर लगाया दाव
गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों ने नए चेहरों पर दाव लगाया है। वहीं मतदान के लिए 20 दिन शेष रह गए हैं, क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिए नए प्रत्याशियों को समय भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विधानसभा चुनाव के लिए गढ़ क्षेत्र से इस बार भाजपा से पूर्व विधायक कमल मलिक का टिकट काटकर हरेंद्र चौधरी को प्रत्याशी बनाया गया। वहीं सपा से मदन चौहान को टिकट का दावेदार माना जा रहा था लेकिन इस बार पार्टी ने महिला प्रत्याशी नैना सिंह को प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया। कांग्रेस ने भी आभा चौधरी को टिकट दिया और बसपा ने मो. आरिफ को प्रत्याशी घोषित किया। इसमें तीन प्रत्याशी तो क्षेत्र में काफी समय से मेहनत कर रहे थे लेकिन एक प्रत्याशी के नाम ने सियासी हलचल तेज कर दी। जिले में 10 फरवरी को मतदान होना है, प्रचार प्रसार करने के लिए प्रत्याशियों पर सिर्फ 20 दिन शेष हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि गढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिए जो प्रत्याशी आए हैं, करीब डेढ़ सौ गांवों में पहुंचकर लोगों तक पहुंचकर कैसे प्रचार करेंगे।
प्रत्याशियों का कहना है कि कोविड के बढ़ते मामलों के चलते चुनाव आयोग ने रैली और सभाओं पर रोक लगाई हुई हैं। ऐसे में प्रचार प्रसार करना मुश्किल बना हुआ है।
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गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों ने नए चेहरों पर दाव लगाया है। वहीं मतदान के लिए 20 दिन शेष रह गए हैं, क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिए नए प्रत्याशियों को समय भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विधानसभा चुनाव के लिए गढ़ क्षेत्र से इस बार भाजपा से पूर्व विधायक कमल मलिक का टिकट काटकर हरेंद्र चौधरी को प्रत्याशी बनाया गया। वहीं सपा से मदन चौहान को टिकट का दावेदार माना जा रहा था लेकिन इस बार पार्टी ने महिला प्रत्याशी नैना सिंह को प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया। कांग्रेस ने भी आभा चौधरी को टिकट दिया और बसपा ने मो. आरिफ को प्रत्याशी घोषित किया। इसमें तीन प्रत्याशी तो क्षेत्र में काफी समय से मेहनत कर रहे थे लेकिन एक प्रत्याशी के नाम ने सियासी हलचल तेज कर दी। जिले में 10 फरवरी को मतदान होना है, प्रचार प्रसार करने के लिए प्रत्याशियों पर सिर्फ 20 दिन शेष हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि गढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिए जो प्रत्याशी आए हैं, करीब डेढ़ सौ गांवों में पहुंचकर लोगों तक पहुंचकर कैसे प्रचार करेंगे।
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प्रत्याशियों का कहना है कि कोविड के बढ़ते मामलों के चलते चुनाव आयोग ने रैली और सभाओं पर रोक लगाई हुई हैं। ऐसे में प्रचार प्रसार करना मुश्किल बना हुआ है।
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