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देवोत्थान एकादशी पर पांच लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी
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देवोत्थान एकादशी पर पांच लाख श्रद्धालु गंगा में लगाएंगे डुबकी
गढ़मुक्तेश्वर। देवोत्थान एकादशी पर आज खादर मेले समेत ब्रजघाट में लगभग पांच लाख श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। शनिवार से ही मेले के रास्तों पर वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। पांच लाख श्रद्धालु मेले में पड़ाव डाल चुके हैं। वहीं वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते हाईवे पर जाम न लगे इसके लिए पुलिस-प्रशासन ने पूरी तैयारी की है।
देवोत्थान एकादशी कार्तिक पूर्णिमा मेले का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। लाखों भक्तों की भीड़ गंगा में डुबकी लगाकर विभिन्न अनुष्ठान करेगी। पंचायती मंदिर के पुजारी पंडित सुरेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि गढ़ खादर के महाभारत कालीन कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में आने वाले भक्त विभिन्न पर्व मनाते हैं। जिनमें छठ महापर्व, गोपाष्टमी और आंवला नवमी के बाद चौथा पर्व देवोत्थान एकादशी होता है।
देवोत्थान एकादशी का विशेष महत्व
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में देवोत्थान एकादशी का महत्व काफी विशेष है। देवोत्थान एकादशी पर जो लोग भगवान शालिग्राम का विवाह तुलसी से कराते हैं, वह पूर्व जन्मों के समस्त पापों से मुक्त होकर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। उन्होंने बताया कि देवोत्थान एकादशी को भीष्म पंचक भी कहा जाता है, क्योंकि भीष्म पितामह ने देवोत्थान एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म, मोक्ष धर्म की शिक्षा दी थी।
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नट समुदाय में देवोत्थान एकादशी के दिन ही शादी की परंपरा
नट समुदाय में वर्ष भर के भीतर केवल देवोत्थान एकादशी के दिन ही शादी होती हैं और फिर समूचे वर्ष उनके घरों में मांगलिक कार्य न होने से बैंडबाजे और शहनाइयों की गूंज नहीं सुनाई पड़ती है। हैदरपुर, सलोनी, धनपुरा समेत गढ़ क्षेत्र के कई गांवों में नट समुदाय के लोग रहते हैं, जिनमें देवोत्थान एकादशी के मद्देनजर ब्याह शादियों को लेकर जोरों पर तैयारी चल रही हैं। महकार, राजमल, किशन, सगुना का कहना है कि नट समाज में यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, जिसका समाज के लोग सदियों से पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ पालन करते आ रहे हैं। संवाद
जाम की स्थिति बनने पर इन रास्तों से निकलें
- नेशनल हाईवे पर जाम की स्थिति उत्पन्न होने पर दिल्ली, गाजियाबाद, हापुड़ की तरफ जाने वाले भक्त ब्रजघाट से पलवाड़ा रोड वाया डेहरा कुटी से वैठ होकर जाम से बचते हुए हाईवे पर पहुंच सकेंगे।
- मेरठ, बागपत, बड़ौत, किठौर क्षेत्र के भक्त गांव अल्लाबख्शपुर के सामने से महमाई रोड होकर गढ़ कस्बे से निकलकर मेरठ रोड पर पहुंच सकेंगे।
- बुलंदशहर, स्याना, औरंगाबाद के भक्त ब्रजघाट वाया पलवाड़ा रोड होकर लौट सकेंगे। संवाद
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गढ़मुक्तेश्वर। देवोत्थान एकादशी पर आज खादर मेले समेत ब्रजघाट में लगभग पांच लाख श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। शनिवार से ही मेले के रास्तों पर वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। पांच लाख श्रद्धालु मेले में पड़ाव डाल चुके हैं। वहीं वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते हाईवे पर जाम न लगे इसके लिए पुलिस-प्रशासन ने पूरी तैयारी की है।
देवोत्थान एकादशी कार्तिक पूर्णिमा मेले का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। लाखों भक्तों की भीड़ गंगा में डुबकी लगाकर विभिन्न अनुष्ठान करेगी। पंचायती मंदिर के पुजारी पंडित सुरेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि गढ़ खादर के महाभारत कालीन कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में आने वाले भक्त विभिन्न पर्व मनाते हैं। जिनमें छठ महापर्व, गोपाष्टमी और आंवला नवमी के बाद चौथा पर्व देवोत्थान एकादशी होता है।
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देवोत्थान एकादशी का विशेष महत्व
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में देवोत्थान एकादशी का महत्व काफी विशेष है। देवोत्थान एकादशी पर जो लोग भगवान शालिग्राम का विवाह तुलसी से कराते हैं, वह पूर्व जन्मों के समस्त पापों से मुक्त होकर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। उन्होंने बताया कि देवोत्थान एकादशी को भीष्म पंचक भी कहा जाता है, क्योंकि भीष्म पितामह ने देवोत्थान एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म, मोक्ष धर्म की शिक्षा दी थी।
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नट समुदाय में देवोत्थान एकादशी के दिन ही शादी की परंपरा
नट समुदाय में वर्ष भर के भीतर केवल देवोत्थान एकादशी के दिन ही शादी होती हैं और फिर समूचे वर्ष उनके घरों में मांगलिक कार्य न होने से बैंडबाजे और शहनाइयों की गूंज नहीं सुनाई पड़ती है। हैदरपुर, सलोनी, धनपुरा समेत गढ़ क्षेत्र के कई गांवों में नट समुदाय के लोग रहते हैं, जिनमें देवोत्थान एकादशी के मद्देनजर ब्याह शादियों को लेकर जोरों पर तैयारी चल रही हैं। महकार, राजमल, किशन, सगुना का कहना है कि नट समाज में यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, जिसका समाज के लोग सदियों से पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ पालन करते आ रहे हैं। संवाद
जाम की स्थिति बनने पर इन रास्तों से निकलें
- नेशनल हाईवे पर जाम की स्थिति उत्पन्न होने पर दिल्ली, गाजियाबाद, हापुड़ की तरफ जाने वाले भक्त ब्रजघाट से पलवाड़ा रोड वाया डेहरा कुटी से वैठ होकर जाम से बचते हुए हाईवे पर पहुंच सकेंगे।
- मेरठ, बागपत, बड़ौत, किठौर क्षेत्र के भक्त गांव अल्लाबख्शपुर के सामने से महमाई रोड होकर गढ़ कस्बे से निकलकर मेरठ रोड पर पहुंच सकेंगे।
- बुलंदशहर, स्याना, औरंगाबाद के भक्त ब्रजघाट वाया पलवाड़ा रोड होकर लौट सकेंगे। संवाद