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देश के पहले गंगा ग्राम पूठ में एक भी तालाब नहीं
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अधूरी तैयारी से कैसे निर्मल होगी गंगा
गढ़मुक्तेश्वर। देश के पहले गंगा ग्राम पूठ में तालाब न होने के कारण गंदे पानी को डाले जाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे आबादी का गंदा और दूषित पानी गंगा में गिर रहा है। ग्रामीणों ने गंदे पानी की उचित व्यवस्था के लिए तालाब बनाए जाने की मांग उठाई है।
गढ़ ब्लॉक के अंर्तगत गांव पूठ को पूर्व जल संसाधन केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने 2014 में पूठ को देश का पहला गंगा ग्राम घोषित किया था। जिसके बाद ग्रामीणों में गांव के विकास होने की आस जाग उठी थी। लेकिन आज भी पूठ में आबादी के गंदे पानी की निकासी और प्रबंधन के लिए तालाब की व्यवस्था नहीं हो पाई है। जिसके चलते आबादी का गंदा पानी लगातार गंगा में डाला जा रहा है। गंदा पानी डाले जाने से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि ब्लॉक द्वारा तालाब बनवाने की मांग उठाई जाती है, तो गांव में सोखते गड्ढे बनवा दिए जाते हैं, लेकिन गंदे पानी का उचित प्रबंधन आज तक भी नहीं हो पाया है। गांव में करीब चार सौ परिवार निवास करते हैं। रोजाना हजारों लीटर गंदा पानी निकलता है, जो उचित प्रबंधन न होने के चलते नालियों द्वारा गंगा में पहुंच जाता है। जिसकी रोकथाम के लिए गांव में तालाब बनना जरूरी है। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते तालाब नहीं बनवाया जा रहा है। बारिश के मौसम में रास्तों में भी जलभराव हो जाता है, जिससे आवागमन में भी परेशानी झेलनी पड़ती है। गंगा ग्राम योजना में साफ सफाई, शिक्षा, बिजली, पेयजल व्यवस्था, खेल का मैदान समेत चिकित्सा व्यवस्थाएं मुख्य रूप से शामिल हैं। वहीं मुख्य काम आबादी का गंदा पानी गंगा में डाले जाने से भी रोकना है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तालाब का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक गांव में रह रहे लोगों को इन समस्याओं से जूझना पड़ेगा।
- एडीओ पंचायत भानेश्वर यादव ने बताया कि गांव में तालाब के लिए कोई बजट नही है, फिर भी तालाब बनवाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या कहते है ग्रामीण
महेश केवट का कहा कि गांव में गंदे पानी को गंगा में डाले जाने से रोकने के लिए तालाब होना बेहद जरूरी है। तभीं गांव में आबादी के दूषित पानी से निजात मिल पाएगी।
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रामकुमार का कहा कि बारिश के मौसम में गांव में पानी की निकासी नहीं हो पाती, जिससे ग्रामीणों को जलभराव में होकर निकलने को मजबूर होना पड़ता है।
कलवा का कहा कि गांव में तालाब का निर्माण होने से गंदे पानी की निकासी सही ढंग से हो पाएगी। वहीं गांव में जलभराव और गंदगी की समस्या से भी निजात मिल पाना संभव हो सकेगा।
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गढ़मुक्तेश्वर। देश के पहले गंगा ग्राम पूठ में तालाब न होने के कारण गंदे पानी को डाले जाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे आबादी का गंदा और दूषित पानी गंगा में गिर रहा है। ग्रामीणों ने गंदे पानी की उचित व्यवस्था के लिए तालाब बनाए जाने की मांग उठाई है।
गढ़ ब्लॉक के अंर्तगत गांव पूठ को पूर्व जल संसाधन केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने 2014 में पूठ को देश का पहला गंगा ग्राम घोषित किया था। जिसके बाद ग्रामीणों में गांव के विकास होने की आस जाग उठी थी। लेकिन आज भी पूठ में आबादी के गंदे पानी की निकासी और प्रबंधन के लिए तालाब की व्यवस्था नहीं हो पाई है। जिसके चलते आबादी का गंदा पानी लगातार गंगा में डाला जा रहा है। गंदा पानी डाले जाने से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि ब्लॉक द्वारा तालाब बनवाने की मांग उठाई जाती है, तो गांव में सोखते गड्ढे बनवा दिए जाते हैं, लेकिन गंदे पानी का उचित प्रबंधन आज तक भी नहीं हो पाया है। गांव में करीब चार सौ परिवार निवास करते हैं। रोजाना हजारों लीटर गंदा पानी निकलता है, जो उचित प्रबंधन न होने के चलते नालियों द्वारा गंगा में पहुंच जाता है। जिसकी रोकथाम के लिए गांव में तालाब बनना जरूरी है। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते तालाब नहीं बनवाया जा रहा है। बारिश के मौसम में रास्तों में भी जलभराव हो जाता है, जिससे आवागमन में भी परेशानी झेलनी पड़ती है। गंगा ग्राम योजना में साफ सफाई, शिक्षा, बिजली, पेयजल व्यवस्था, खेल का मैदान समेत चिकित्सा व्यवस्थाएं मुख्य रूप से शामिल हैं। वहीं मुख्य काम आबादी का गंदा पानी गंगा में डाले जाने से भी रोकना है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तालाब का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक गांव में रह रहे लोगों को इन समस्याओं से जूझना पड़ेगा।
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- एडीओ पंचायत भानेश्वर यादव ने बताया कि गांव में तालाब के लिए कोई बजट नही है, फिर भी तालाब बनवाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या कहते है ग्रामीण
महेश केवट का कहा कि गांव में गंदे पानी को गंगा में डाले जाने से रोकने के लिए तालाब होना बेहद जरूरी है। तभीं गांव में आबादी के दूषित पानी से निजात मिल पाएगी।
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रामकुमार का कहा कि बारिश के मौसम में गांव में पानी की निकासी नहीं हो पाती, जिससे ग्रामीणों को जलभराव में होकर निकलने को मजबूर होना पड़ता है।
कलवा का कहा कि गांव में तालाब का निर्माण होने से गंदे पानी की निकासी सही ढंग से हो पाएगी। वहीं गांव में जलभराव और गंदगी की समस्या से भी निजात मिल पाना संभव हो सकेगा।