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Hapur News: पौधरोपण की रैकिंग में प्रदेश में अंतिम पायदान पर जिला
Thu, 25 Sep 2025 10:31 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 25 Sep 2025 10:31 PM IST
सार
हापुड़ जिले में इस वर्ष बड़े पैमाने पर पौधरोपण के बावजूद 50177 पौधे जीवित नहीं बच सके। पौधों के मरने से जिले की प्रदेश रैंकिंग गिरकर 75वें स्थान पर आ गई है। बाढ़ और विभागीय लापरवाही को इसका कारण बताया गया है।
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विस्तार
हापुड़। जिले में इस बार रोपे गए 1314790 पौधों में से 50177 पौधे जीवित नहीं बच सके। जनपद में 1264613 पौधे जीवित रहने के कारण प्रदेश में जिले की रैंकिंग गिर गई है। अगस्त की सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग में जनपद को प्रदेश में सबसे अंतिम 75 वां स्थान मिला है।
वायु प्रदूषण से मुक्ति दिलाने और लोगों तक शुद्ध हवा पहुंचाने के लिए हर साल वन विभाग सहित करीब 30 विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मिलकर जनपद में अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण करते हैं। इस बार भी जुलाई माह से लेकर अगस्त तक विभागों ने पौधरोपण किया है। इसके बाद उनको जीवित रखना सबसे अधिक जरूरी है। इसलिए अब पौधे लगाने के बाद उनकी जिओ टैंगिंग विभागों को करनी होती है। इसके जरिए उच्च अधिकारी पौधे रोपित हुए हैं या नहीं और पौधे जीवित बचे है या नहीं, इस पर नजर रखते हैं।
तीन माह से प्रदेश में पहले स्थान पर था हापुड़
मई से लेकर जुलाई माह की रैंकिंग में जिले को इस प्रोजेक्ट में प्रदेश में पहला नंबर मिला था। उस समय तक जो पौधे रोपित हुए सभी जीवित थे, लेकिन एक माह बाद ही चार प्रतिशत पौधे मर चुके हैं। अगस्त माह में करीब 96 प्रतिशत पौधे ही जीवित बचे हैं। ऐसे में सितंबर माह की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और खराब नजर आ सकती है। अगस्त में इस मामले में 10 में से शून्य अंक मिले हैं।
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पौधों को जीवित रखना महत्वपूर्ण
हर साल विभाग पौधरोपण तो करते हैं, लेकिन दो माह बाद इसके खराब परिणाम आने लगते हैं। पौधे लगाने में इतनी परेशानी नहीं आती है, पौधों का जीवित रखना सबसे अधिक जरूरी है। एक पौधा कम से कम पांच साल में जाकर बड़े पेड़ का रूप ले पाता है। ऐसे में शुद्ध हवा के लिए पौधे का जीवित रहना जरूरी है। हापुड़ जिला, एनसीआर क्षेत्र में आता है और इस क्षेत्र में हर साल नवंबर से लेकर जनवरी तक लोगों को सबसे अधिक वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। इस कारण लोग बीमार भी पड़ते हैं।
दो विभागों के कारण गिरी रैंक
ऊर्जा निगम और ग्राम विकास विभाग द्वारा लगाए गए पौधे बाढ़ के कारण नष्ट हो गए। इस कारण जनपद की रैंकिंग गिरी है। इसके लिए जिलाधिकारी को भी पत्र लिखकर जानकारी दी जा चुकी है।
- अर्शी मलिक, डीएफओ
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वायु प्रदूषण से मुक्ति दिलाने और लोगों तक शुद्ध हवा पहुंचाने के लिए हर साल वन विभाग सहित करीब 30 विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मिलकर जनपद में अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण करते हैं। इस बार भी जुलाई माह से लेकर अगस्त तक विभागों ने पौधरोपण किया है। इसके बाद उनको जीवित रखना सबसे अधिक जरूरी है। इसलिए अब पौधे लगाने के बाद उनकी जिओ टैंगिंग विभागों को करनी होती है। इसके जरिए उच्च अधिकारी पौधे रोपित हुए हैं या नहीं और पौधे जीवित बचे है या नहीं, इस पर नजर रखते हैं।
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तीन माह से प्रदेश में पहले स्थान पर था हापुड़
मई से लेकर जुलाई माह की रैंकिंग में जिले को इस प्रोजेक्ट में प्रदेश में पहला नंबर मिला था। उस समय तक जो पौधे रोपित हुए सभी जीवित थे, लेकिन एक माह बाद ही चार प्रतिशत पौधे मर चुके हैं। अगस्त माह में करीब 96 प्रतिशत पौधे ही जीवित बचे हैं। ऐसे में सितंबर माह की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और खराब नजर आ सकती है। अगस्त में इस मामले में 10 में से शून्य अंक मिले हैं।
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पौधों को जीवित रखना महत्वपूर्ण
हर साल विभाग पौधरोपण तो करते हैं, लेकिन दो माह बाद इसके खराब परिणाम आने लगते हैं। पौधे लगाने में इतनी परेशानी नहीं आती है, पौधों का जीवित रखना सबसे अधिक जरूरी है। एक पौधा कम से कम पांच साल में जाकर बड़े पेड़ का रूप ले पाता है। ऐसे में शुद्ध हवा के लिए पौधे का जीवित रहना जरूरी है। हापुड़ जिला, एनसीआर क्षेत्र में आता है और इस क्षेत्र में हर साल नवंबर से लेकर जनवरी तक लोगों को सबसे अधिक वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। इस कारण लोग बीमार भी पड़ते हैं।
दो विभागों के कारण गिरी रैंक
ऊर्जा निगम और ग्राम विकास विभाग द्वारा लगाए गए पौधे बाढ़ के कारण नष्ट हो गए। इस कारण जनपद की रैंकिंग गिरी है। इसके लिए जिलाधिकारी को भी पत्र लिखकर जानकारी दी जा चुकी है।
- अर्शी मलिक, डीएफओ