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Hapur News: रवि योग में 30 अक्तूबर को मनेगी गोपाष्टमी
Tue, 28 Oct 2025 11:02 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 28 Oct 2025 11:02 PM IST
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हापुड़। गोपाष्टमी पर्व रवि योग और श्रवण शुभ नक्षत्र में 30 अक्तूबर को मनाया जाएगा। मान्यता के अनुसार गोपाष्टमी के दिन सर्वप्रथम भगवान कृष्ण ने गौ चारण लीला आरंभ की थी, इसलिए इस दिन गो माता के साथ बछड़े की भी पूजा की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर गौ माता की पूजा और सेवा करने का विधान है। यदि गोपाष्टमी के दिन विधि-विधान से गाय का पूजन व सेवा की जाए तो सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।
गाय की पूजा करने से श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है घर में सुख-समृद्धि शांति का वास होता है। 29 अक्तूबर को गोपाष्टमी रात्रि 9:23 बजे से आरंभ होकर 30 अक्तूबर को रात्रि 10:06 बजे तक रहेगी। रवि योग और श्रवण जैसे शुभ नक्षत्र के संयोग मे सुबह सूर्योदय 6:32 बजे से लेकर शाम 6:34 बजे तक समय पूजन के लिए शुभ रहेगा।
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गो माता की पूजा विधि
अष्टमी तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके गोशाला पर अथवा भारतीय देसी गोबर, गोविंद के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद गाय, बछड़े सहित उनके चरणों को धोने के भाव से जल डालें। आचमन के लिए बाल्टी में जल रखें, स्नान के रूप में जल के छीटे लगाए। गले में घंटी बांधे, चंदन का तिलक अक्षत, तिल, फूलों की माला पहनाकर शृंगार करें। गोमाता के सींग पर सुवर्ण या चांदी का तार भी लपेटा जा सकता है। कम से कम 5,7,9 11 अथवा अधिक दीपक प्रज्ज्वलित करके उनसे आरती करें। हरा चारा ,जौ का आटा और सतनजा का आटा मन से खिलाएं। इसके बाद गाय की परिक्रमा करें।
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ज्योतिषाचार्य पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर गौ माता की पूजा और सेवा करने का विधान है। यदि गोपाष्टमी के दिन विधि-विधान से गाय का पूजन व सेवा की जाए तो सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।
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गाय की पूजा करने से श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है घर में सुख-समृद्धि शांति का वास होता है। 29 अक्तूबर को गोपाष्टमी रात्रि 9:23 बजे से आरंभ होकर 30 अक्तूबर को रात्रि 10:06 बजे तक रहेगी। रवि योग और श्रवण जैसे शुभ नक्षत्र के संयोग मे सुबह सूर्योदय 6:32 बजे से लेकर शाम 6:34 बजे तक समय पूजन के लिए शुभ रहेगा।
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गो माता की पूजा विधि
अष्टमी तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके गोशाला पर अथवा भारतीय देसी गोबर, गोविंद के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद गाय, बछड़े सहित उनके चरणों को धोने के भाव से जल डालें। आचमन के लिए बाल्टी में जल रखें, स्नान के रूप में जल के छीटे लगाए। गले में घंटी बांधे, चंदन का तिलक अक्षत, तिल, फूलों की माला पहनाकर शृंगार करें। गोमाता के सींग पर सुवर्ण या चांदी का तार भी लपेटा जा सकता है। कम से कम 5,7,9 11 अथवा अधिक दीपक प्रज्ज्वलित करके उनसे आरती करें। हरा चारा ,जौ का आटा और सतनजा का आटा मन से खिलाएं। इसके बाद गाय की परिक्रमा करें।