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Hapur News: - गंगा के अस्थाई टापू पर बने घाट बन सकते हैं हादसों का कारण
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ब्रजघाट गंगा के दूसरी तरफ टापू पर बने अस्थाई घाट। संवाद
ब्रजघाट। फाल्गुन माह की कांवड़ यात्रा जल्द प्रारंभ हो जाएगी, ऐसे में गंगानगरी में भी भक्तों का आगमन होगा। इस दौरान ब्रजघाट गंगा में बीच टापू पर बने अस्थाई घाट कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। जिन पर स्थानीय प्रशासन गौर नहीं दे रहा है।
फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए लाखों शिवभक्तों का गंगानगरी में आवागमन होगा। गंगा की दूसरी साइड में बने अस्थाई स्नानघाट कांवड़ियों समेत अन्य श्रद्धालुओं के लिए हादसे का सबब बने हुए हैं। जिसकी तरफ स्थानीय पुलिस प्रशासन की नजर नहीं है। ब्रजघाट में दोनों तरफ बह रही गंगा की जलधारा के बीच स्थित रेतीले टापू वाले मैदान में अस्थाई स्नान घाट बने हुए हैं। जो गंगा में प्रदूषण बढ़ाने के साथ ही अनहोनी की वजह भी साबित हो सकते हैं। क्योंकि गंगा स्नान करने वाले काफी लोग भीड़ और नावों से बचकर इन्हीं घाटों में आ जाते हैं, जो अपने साथियों और परिजनों समेत कई घंटों तक यहां रहकर डुबकी लगाते हैं। लेकिन जनपद अमरोहा की सीमा में होने के चलते पालिका अथवा प्रशासन द्वारा इन अस्थाई स्नान घाटों में बैरीकेडिंग समेत सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया जाता है। जिसके चलते हर समय हादसे होने की आशंका बनी रहती है।
- पहले भी हो चुके हैं हादसे
कुछ साल पहले गंगा की दूसरी साइड में रेतीले टापू पर स्नान करने के दौरान सात व्यक्ति डूब गए थे। जिनकी पुलिस प्रशासन ने तलाश कराई, तो गंगा से सातों के शव बरामद हुए। इसके अलावा भी गंगा के दूसरी तरफ डूबने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। इसके बाद भी पुलिस प्रशासन अंजान बना हुआ है।
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- सीमा विवाद में उलझी रहती है पुलिस
इन अस्थाई घाटों पर डूबने की घटना होने के दौरान गढ़ कोतवाली और ब्रजघाट पुलिस स्थानीय गोताखोरों को साथ लेकर डूबने वालों की तलाश करते हैं। लेकिन जब अस्थाई घाटों को हटाने की मांग उठती है, तो स्थानीय पुलिस इनके जनपद अमरोहा में होने का हवाला देकर कार्रवाई से बचती है। बाढ़ आने के दौरान पानी भरने से इन घाटों की स्थिति और भी विकट हो जाती है।
- क्या बोले अधिकारी
गंगा की जलधारा के बीच रेतीले टापू में चल रहे अस्थाई स्नानघाटो को जल्द हटवाया जाएगा, इसके लिए जरूरत पड़ने पर जनपद अमरोहा के पुलिस-प्रशासन का सहयोग भी लिया जाएगा। अंकित कुमार वर्मा, एसडीएम
(संवाद)
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फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए लाखों शिवभक्तों का गंगानगरी में आवागमन होगा। गंगा की दूसरी साइड में बने अस्थाई स्नानघाट कांवड़ियों समेत अन्य श्रद्धालुओं के लिए हादसे का सबब बने हुए हैं। जिसकी तरफ स्थानीय पुलिस प्रशासन की नजर नहीं है। ब्रजघाट में दोनों तरफ बह रही गंगा की जलधारा के बीच स्थित रेतीले टापू वाले मैदान में अस्थाई स्नान घाट बने हुए हैं। जो गंगा में प्रदूषण बढ़ाने के साथ ही अनहोनी की वजह भी साबित हो सकते हैं। क्योंकि गंगा स्नान करने वाले काफी लोग भीड़ और नावों से बचकर इन्हीं घाटों में आ जाते हैं, जो अपने साथियों और परिजनों समेत कई घंटों तक यहां रहकर डुबकी लगाते हैं। लेकिन जनपद अमरोहा की सीमा में होने के चलते पालिका अथवा प्रशासन द्वारा इन अस्थाई स्नान घाटों में बैरीकेडिंग समेत सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया जाता है। जिसके चलते हर समय हादसे होने की आशंका बनी रहती है।
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- पहले भी हो चुके हैं हादसे
कुछ साल पहले गंगा की दूसरी साइड में रेतीले टापू पर स्नान करने के दौरान सात व्यक्ति डूब गए थे। जिनकी पुलिस प्रशासन ने तलाश कराई, तो गंगा से सातों के शव बरामद हुए। इसके अलावा भी गंगा के दूसरी तरफ डूबने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। इसके बाद भी पुलिस प्रशासन अंजान बना हुआ है।
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- सीमा विवाद में उलझी रहती है पुलिस
इन अस्थाई घाटों पर डूबने की घटना होने के दौरान गढ़ कोतवाली और ब्रजघाट पुलिस स्थानीय गोताखोरों को साथ लेकर डूबने वालों की तलाश करते हैं। लेकिन जब अस्थाई घाटों को हटाने की मांग उठती है, तो स्थानीय पुलिस इनके जनपद अमरोहा में होने का हवाला देकर कार्रवाई से बचती है। बाढ़ आने के दौरान पानी भरने से इन घाटों की स्थिति और भी विकट हो जाती है।
- क्या बोले अधिकारी
गंगा की जलधारा के बीच रेतीले टापू में चल रहे अस्थाई स्नानघाटो को जल्द हटवाया जाएगा, इसके लिए जरूरत पड़ने पर जनपद अमरोहा के पुलिस-प्रशासन का सहयोग भी लिया जाएगा। अंकित कुमार वर्मा, एसडीएम
(संवाद)