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रसोई गैस की तर्ज पर खाते में आएगी उर्वरक सब्सिडी

Tue, 04 Apr 2017 08:39 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Tue, 04 Apr 2017 08:39 PM IST
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Fertilizer subsidy will come into account.
उर्वरक - फोटो : अमर उजाला

जून से गैस की तर्ज पर खाद की सब्सिडी भी डीबीटी से सीधे किसानों के खातों में आएगी। इसके लिए जल्द ही जिले के 68 हजार केसीसी धारक किसानों के कार्ड रुपे कार्ड में तब्दील हो जाएंगे। इन्हीं कार्ड को उर्वरकों की दुकानों पर स्वैप कराकर खाद की खरीदारी की जा सकेगी।

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बैंक अफसरों के लिए यह बड़ी चुनौती होगी। उन्हें एक जून तक शेष 42 हजार किसानों के केसीसी बनाने हैं, साथ ही पुराने केसीसी को रुपे कार्ड में तब्दील करना है। उर्वरकों की खरीद के दौरान अक्सर किसानों को शिकायत रहती थी कि उन्हें निर्धारित दाम से अधिक पर उर्वरक दिया जा रहा है।
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सब्सिडी का पैसा न मिलने, घटतौली, खराब गुणवत्ता की भी शिकायत अक्सर की जाती थी। दुकानदार किसानों को उर्वरक खरीद का बिल नहीं देते थे। इस समस्या से उभरने के लिए शासन ने अब ऑनलाइन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।
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एक जून तक जिलेभर में उर्वरकों के 150 प्रतिष्ठानों पर पीओएस मशीन लगाई जायेंगी। इनपर केसीसी को स्वैप कराना होगा। उर्वरकों की निर्धारित रकम किसान के खाते से कट जायेगी। सब्सिडी का पैसा डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान के खाते में पहुंचेगा।

अभी तक जिले के 68 हजार किसानों को जो केसीसी जारी किए गए हैं, वह पीओएस मशीन पर काम नहीं कर सकते हैं। अब इनको रुपे कार्ड में तब्दील किया जायेगा। जिलेभर में जल्द ही डिजिटल कैंप लगाए जायेंगे, इसमें किसानों के केसीसी को रुपे कार्ड में तब्दील किया जायेगा, साथ ही शेष किसानों के भी केसीसी कार्ड बनाए जायेंगे।

एक जून से उर्वरकों की दुकान पर खाद की खरीदारी सिर्फ केसीसी से की जा सकेगी। नकद कैश पर दुकानदार खाद नहीं बेच सकेंगे। यदि नकद खाद बेचा गया तो कृषि विभाग के अधिकारी कार्रवाई करेंगे।

डीओ शिवकुमार का कहना है कि शासन की योजना के तहत जल्द ही केसीसी कार्डों को रुपे कार्ड में तब्दील कराया जायेगा। डीबीटी के माध्यम से खाद पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे किसान के खाते में पहुंचेगी। उर्वरकों के प्रतिष्ठानों पर पीओएस मशीनें लगाई जायेंगी। इस पहल से उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता आयेगी।


जिला अग्रणी बैंक के प्रबंधक एपी चतुर्वेदी का कहना है कि जो नए केसीसी बन रहे हैं, वह रुपे कार्ड की तर्ज पर हैं। पुराने केसीसी को किसान संबंधित बैंक में लाकर रुपये कार्ड में तब्दील करवा सकते हैं। जिन किसानों के कार्ड नहीं बने हुए हैं वह किसी भी कार्य दिवस में केसीसी बनवा सकते हैं।

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