{"_id":"57cede744f1c1b25563180db","slug":"farmers-and-entrepreneurs-will-camp-at-hpda","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ सितंबर से एचपीडीए में डेरा डालेंगे किसान और उद्यमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आठ सितंबर से एचपीडीए में डेरा डालेंगे किसान और उद्यमी
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Tue, 06 Sep 2016 08:49 PM IST
विज्ञापन
एचपीडीए में डेरा डालेंगे किसान और उद्यमी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एचपीडीए द्वारा दिल्ली रोड के सैकड़ों उद्योग, भवनों के अधिग्रहण नीति के विरोध में मंगलवार को भवन बचाओ संघर्ष समिति व आईआईए के पदाधिकारियों ने प्रकाश रिजेंसी में बैठक कर आठ सितंबर से एचपीडीए में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का निर्णय लिया।
विज्ञापन
राहत न मिलने पर आत्मदाह और आनंद विहार योजना का कार्य बंद कराने की भी चेतावनी दी। बैठक में समिति के अध्यक्ष ललित कुमार छावनी वालों ने कहा कि दिल्ली रोड पर बने भवन व उद्योगों से एचपीडीए की कोई आवासीय योजना अधूरी नहीं है।
विज्ञापन
वर्ष 2008 में एचपीडीए के मास्टर प्लान में आनंद विहार को शामिल किया गया था। लेकिन इसमें आज तक भवन नहीं बन सके हैं। वर्ष 2002 में प्रीत विहार योजना शुरू की गई, इसमें अभी तक भी 10 फीसदी मकान नहीं बन सके हैं।
विज्ञापन
ऐसे में एचपीडीए आवासीय योजना के तहत दिल्ली रोड के सैकड़ों भवनों- उद्योगों को उजाड़ना चाह रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। आईआईए के चैप्टर चेयरमैन अमन गुप्ता ने कहा कि शासन ने गजट में इस क्षेत्र को नगर पालिका में शामिल किया।
एचपीडीए की महायोजना में घोषणा की गई थी कि दिल्ली रोड के दोनों ओर बने भवन यथास्थिति रहेंगे। ऐसे में एचपीडीए अपनी मनमानी कर करीब हजारों परिवारों को बेरोजगार बनाने पर तुला है, इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
संचालक मुकेश जैन ने कहा कि एचपीडीए की ठेकेदारी प्रथा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, बीते दिनों किसानों से एचपीडीए ने 800 रुपये/वर्गमीटर की दर से जमीन खरीदी थी। इस जमीन को 12340 रुपये/वर्गमीटर की दर से दिल्ली के एक बिल्डर को बेच दिया गया।
इतना ही नहीं प्रीत विहार योजना में आवास के लिए एचपीडीए ने 6 एकड़ जमीन को अधिग्रहीत किया गया था। इसके बाद लैंड यूज चेंज दिखाकर इसे बस अड्डे के लिए प्रस्तावित कर दिया गया। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में इस जमीन को एक निजी कंपनी को दे दिया गया,
जबकि उक्त कंपनी ने स्वयं किसानों से सीधे जमीन खरीदने की बात कही थी। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि एचपीडीए के अधिकारी किस कदर किसान, उद्यमियों का शोषण कर रहे हैं। बैठक में सर्वसम्मति से 8 सितंबर से परिवार समेत एचपीडीए में धरना प्रदर्शन का निर्णय लिया गया।
फिर भी राहत न मिली तो तालाबंदी, आत्मदाह और आनंद विहार योजना का कार्य बंद कराने की चेतावनी दी। बैठक में सुनील गोयल, कुणाल जैन, मुकेश जैन, अनिल गर्ग, हरि प्रसाद त्यागी, रमण गोयल, सोनू त्यागी, अंकित, प्रदीप समेत अनेक उद्यमी, किसान मौजूद रहे।