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लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Fri, 16 Sep 2016 09:06 PM IST
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भाद्रपद पूर्णिमा पर भक्तों ने किया गंगा किनारे श्राद्ध कर्म
- फोटो : अमर उजाला
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भाद्रपद पूर्णिमा पर विभिन्न प्रांतों से आए पांच लाख से अधिक भक्तों ने ब्रजघाट गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने गरीब निराश्रितों को दान भी किया। पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के चलते हाईवे पूरी तरह जाम मुक्त रहा।
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भाद्रपद पूर्णिमा के मद्देनजर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान सहित वेस्ट यूपी के दूरस्थ जनपदों के भक्तों का आगमन बृहस्पतिवार देर शाम से ही शुरू हो गया था। इसके चलते तीर्थनगरी में चौतरफा चहल-पहल और बाजारों में रंगत बढ़ गई थी।
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सैकड़ों धर्मशाला, मंदिर और आश्रम परिसर में जगह न मिलने पर हजारों भक्तों को मुख्य बाजार, शिवचौक, रेलवे रोड, पक्के बांध सहित विभिन्न स्थानों पर रात बिताने को मजबूर होना पड़ा। अर्द्धरात्रि तक अधिकांश भक्तों की भीड़ गंगातट पर एकत्र हो गई।
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तड़के करीब चार बजे से गंगा स्नान का जो क्रम शुरू हुआ, वह शुक्रवार देर शाम तक चलता रहा। अधिकांश भक्तों ने डुबकी लगाने के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी और तीर्थनगरी के प्रसिद्ध मंदिरों में पूजा अर्चना की। साथ ही भक्तों ने गंगा के किनारे दिवंगत पूर्वजों का श्राद्ध कर्म भी किया।
पंडित सुरेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि बिहार के गयाधाम में दिवंगत पितरों का श्राद्ध कर्म करना सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर ऐसा संभव नहीं है तो फिर मोक्ष दायिनी गंगा के किनारे भी श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।
गंगा स्नान के दौरान गाजियाबाद निवासी राम रतन के कपड़ों पर उचक्कों ने हाथ साफ कर दिया। इनमें तीन हजार रुपये और जरूरी दस्तावेज थे। वहीं हरियाणा निवासी महकार, दिनेश और राकेश का बैग चोर ले उडे़। दिल्ली निवासी रजनी का भी पर्स गंगा स्नान के दौरान चोर ने उड़ा दिया। इसमें 2500 रुपए, सोने की अंगूठी और चेन थी।
मां के साथ डुबकी लगा रही किशोरी गंगा के तेज प्रवाह में बह गई। देर शाम तक निजी गोताखोर और मल्लाह किशोरी की तलाश करते रहे। खादर क्षेत्र में कच्चे घाट पर महिला-बच्चों सहित हजारों की भीड़ स्नान के लिए पहुंची।
यहां पुलिस-प्रशासन की ओर से न तो बैरिकेडिंग की गई थी और न ही निजी गोताखोरों की कोई भी व्यवस्था थी। इसके चलते अमरोहा से अपनी मां रजनी और चाचा हरिओम के साथ डुबकी लगाने आई 13 वर्षीय पुष्पा तेज बहाव के साथ गंगा के गहरे पानी में डूबने लगी।
बेटी को डूबते देख मां और चाचा ने शोर मचाया, लेकिन मल्लाह और गोताखोरों की व्यवस्था न होने के कारण तत्काल कोई मदद नहीं मिल सकी। कुछ ही पलों में पुष्पा गहरे पानी में डूबकर ओझल हो गई। देर शाम तक परिवार के लोग गोताखोर और मल्लाहों की मदद से किशोरी की तलाश में लगे रहे।