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पूर्व प्रोटोकॉल अफसर का तीसरे दिन भी सुराग नहीं
ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़
Updated Sat, 15 Oct 2016 09:03 PM IST
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पूर्व प्रोटोकॉल अफसर का सुराग नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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कार समेत अपहृत हुए विदेश सेवा के पूर्व प्रोटोकॉल अफसर का तीसरे दिन भी कोई सुराग नहीं लग सका। हाई प्रोफाइल मामला होने से गढ़, गजरौला और किठौर में से किसी भी थाने की पुलिस एफआईआर दर्ज करने को तैयार नहीं है।
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बता दें कि बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े 8 बजे गंगा खादर के गांव मुकीमपुर से भगवंतपुर को जाने वाले मोड़ पर तीन युवकों ने मारपीट कर विदेश सेवा के पूर्व प्रोटोकॉल अफसर डीएस वर्मा से मारपीट कर रिवाल्वर छीन ली थी।
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उसके बाद तीनों युवक उनका कार समेत अपहरण कर ले गए थे। डीएस वर्मा को सकुशल बरामद करने की बजाए खाकी एक-दूसरे थाने पर जिम्मेदारी थोप रही है। पूरा प्रकरण हाई प्रोफाइल होने से गढ़, किठौर और गजरौला पुलिस इस मामले में हाथ डालने को तैयार नहीं है।
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जिससे बृहस्पतिवार की रात को कार समेत अपहृत हुए डीएस वर्मा का तीसरे दिन शनिवार की रात तक भी कोई सुराग नहीं लग पाया है। इंस्पेक्टर समरजीत सिंह का कहना है कि डीएस वर्मा का कृषि फार्म अमरोहा के गांव गुलालपुर में है,
जबकि उनके साथ हुई वारदात का घटनास्थल जनपद मेरठ के गांव मिस्रीपुर से जुड़ा होना पाया गया है। इसलिए गढ़ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज किया जाना किसी भी स्तर पर संभव नहीं है।
विदेश सेवा के पूर्व प्रोटोकॉल अफसर डीएस वर्मा के अगवा होने की संगीन घटना के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पा रही है। खाकी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर इस मामले को एक-दूसरे के पाले में धकेलने की कवायद में जुटी है।
वहीं पिता का अपहरण होने के बाद भी एफआईआर दर्ज न होने से लाचार तथा बेबस बेटे ध्रुव तथा विशाल परिजनों को साथ लेकर इधर से उधर धक्के खाते घूम रहे हैं। शनिवार सुबह सबसे पहले गढ़ कोतवाली में पहुंचे,
जहां मेरठ का क्षेत्र बताए जाने पर उनका चेहरा लटक गया और वे मेरठ के लिए रवाना हो गए। आईजी तो नहीं मिले, लेकिन उनके कार्यालय में मौजूद अफसरों ने उन्हें हापुड़ भेज दिया। बैंक में सर्विस करने वाले ध्रुव का आरोप है कि एएसपी हापुड़ ने भी हकीकत को झुठला दिया है।
उन्होंने उसके अगवा पिता की एफआईआर दर्ज कराने की बजाए घटनाक्रम को मेरठ से जुड़ा बताकर किठौर थाने में रिपोर्ट लिखाने की बात कहकर लौटा दिया।
वहीं रियल स्टेट कारोबार से जुड़े छोटे बेटे विशाल का कहना है कि पुलिस के डर से मुकीमपुर के ग्रामीणों समेत घटना के दौरान मौके पर पहुंचे प्रत्यक्षदर्शी भी बुरी तरह सहम उठे हैं, वह अब हकीकत बयां करना तो दूर जुबान तक खोलने से कतराने लगे हैं।
किठौर इंस्पेक्टर एमपी सिंह का कहना है कि इस विषय में थाने पर कोई भी रिपोर्ट लिखा जाना संभव नहीं है, क्योंकि सारा घटनाक्रम गढ़ कोतवाली के गांव मुकीमपुर से जुड़ा है।
गंगा के तटीय क्षेत्र में ग्राम समाज की हजारों बीघा बेशकीमती भूमि है। यहां अवैध कब्जा जमाने वाले सक्रिय हैं। ग्राम सभा से पट्टों का आवंटन कराकर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे जमाकर लाखों-करोड़ों कमाने में जुटे हैं।
ग्राम सभा स्तर पर सेटिंग होने के बाद दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ समेत विभिन्न स्थानों पर रहने वाले प्रभावशाली लोगों को पट्टों का आवंटन कर देते हैं। जिला प्रशासन द्वारा पिछले दस वर्षों में सैकड़ों पट्टों को निरस्त किया जा चुका है।
विदेश सेवा के पूर्व प्रोटोकॉल अफसर डीएस वर्मा गांव गुलालपुर के जिस कृषि फार्म में खेतीबाड़ी कराते हैं, वह भी पट्टों से जुड़ी भूमि है। उस पर कई दबंग लोग अपनी नजर जमाए हुए हैं।
वह कई बार कब्जा करने की कोशिश भी कर चुके हैं। डीएस वर्मा की पहुंच और उनके रसूख के चलते उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई थी। इसलिए उनके अपहरण के तार पट्टेबाजी की तिकड़म के खेल से जुड़े होने की चर्चा भी जोरों पर चल रही है।