{"_id":"5c1fe8d3bdec2256d06c67e3","slug":"101545595091-hapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टे होने के बाद भी विवादित जमीन की खरीद फरोख्त कर ली","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
स्टे होने के बाद भी विवादित जमीन की खरीद फरोख्त कर ली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टे होने के बाद भी कर ली विवादित जमीन की खरीद फरोख्त
गढ़मुक्तेश्वर। सिविल कोर्ट का स्टे होने के बाद भी विवादित जमीन की खरीद फरोख्त होने पर वादी ने विक्रेता और क्रेता के खिलाफ कोर्ट की अवमानना समेत धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने की गुहार लगाई।
गढ़ के मोहल्ला मिर्धापाड़ा निवासी मनोज पुत्र जयप्रकाश ने डीएम और एसपी को शिकायती पत्र भेजे हैं। जिनमें उल्लेख किया है कि गढ़ बांगर के खसरा संख्या 1275 की दक्षिणी दिशा से जुड़े 1/3 भाग पर वह 15 साल से भी अधिक से काबिज चला आ रहा है, जबकि शेष 2/3 भाग प्रदीप निवासी बदरखा और जयपाल निवासी मेरठ का है। मनोज का कहना है कि उक्त लोगों द्वारा जबरन बेदखल करने की कोशिश किए जाने पर उसने गढ़ की सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था, जिसमें अदालत ने 12 अप्रैल 2017 को उसके पक्ष में जो स्टे आर्डर जारी किया था वह वर्तमान में भी पूरी तरह प्रभावी है, लेकिन प्रदीप और जयपाल ने तथ्यों को छिपाने के साथ ही अदालत के स्टे आर्डर का खुला उल्लंघन करते हुए कुछ लोगों के नाम भूमि का बैनामा कर दिया है। वादी ने स्टे होने के बाद भी भूमि की खरीद फरोख्त करने वालों के खिलाफ अदालत की अवमानना के साथ ही धोखाधड़ी का केस दर्ज कराकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।
एसएसआई सुभाष यादव का कहना है कि इस संबंध में कोतवाली पर कोई तहरीर न आने से उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। सिविल कोर्ट का स्टे होने के बाद भी विवादित जमीन की खरीद फरोख्त होने पर वादी ने विक्रेता और क्रेता के खिलाफ कोर्ट की अवमानना समेत धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने की गुहार लगाई।
गढ़ के मोहल्ला मिर्धापाड़ा निवासी मनोज पुत्र जयप्रकाश ने डीएम और एसपी को शिकायती पत्र भेजे हैं। जिनमें उल्लेख किया है कि गढ़ बांगर के खसरा संख्या 1275 की दक्षिणी दिशा से जुड़े 1/3 भाग पर वह 15 साल से भी अधिक से काबिज चला आ रहा है, जबकि शेष 2/3 भाग प्रदीप निवासी बदरखा और जयपाल निवासी मेरठ का है। मनोज का कहना है कि उक्त लोगों द्वारा जबरन बेदखल करने की कोशिश किए जाने पर उसने गढ़ की सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था, जिसमें अदालत ने 12 अप्रैल 2017 को उसके पक्ष में जो स्टे आर्डर जारी किया था वह वर्तमान में भी पूरी तरह प्रभावी है, लेकिन प्रदीप और जयपाल ने तथ्यों को छिपाने के साथ ही अदालत के स्टे आर्डर का खुला उल्लंघन करते हुए कुछ लोगों के नाम भूमि का बैनामा कर दिया है। वादी ने स्टे होने के बाद भी भूमि की खरीद फरोख्त करने वालों के खिलाफ अदालत की अवमानना के साथ ही धोखाधड़ी का केस दर्ज कराकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।
विज्ञापन
एसएसआई सुभाष यादव का कहना है कि इस संबंध में कोतवाली पर कोई तहरीर न आने से उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।