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‘जानलेवा’ पानी, 20 गांवों की बनी परेशानी
अमर उजाला, हापुड़
Updated Fri, 19 Feb 2016 08:34 PM IST
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काली नदी के किनारे बसे 20 गांवों के प्रदूषित भूगर्भ जल से ग्रामीणों का छुटकारा मिलता नहीं दिख रहा है। इन गांवों में शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए बनी करोड़ों की योजना अधर में लटकी है।
डेढ़ साल से जल निगम की ओर से बनाई गई कार्य योजना की फाइल लखनऊ में धूल फांक रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने पैसा पास नहीं किया है।
जबकि काली नदी से खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुके भूजल के सेवन से लोग पीलिया, हेपेटाइटिस, कैंसर, आंत्रशोध जैसी बीमारियों ग्रसित हो रहे हैं।
मेरठ से कन्नौज तक सैकड़ों किमी का सफर तय करने के बाद गंगा में गिरने वाली काली नदी के आसपास 40 से अधिक गांव बसे हुए हैं। काली नदी के प्रदूषण से इन गांवों का भूजल खतरनाक स्तर तक दूषित हो चुका है।
इन गांवों में जल निगम की ओर से शुद्ध पानी की सप्लाई के लिए टंकी और पाइप लाइन बिछाने की कार्य योजना तैयार की गई थी।
2014-15 में सरकार ने कुछ गांवों के लिए करोड़ों की धनराशि भी पास कर दी थी। जिस पर जल निगम ने कार्य शुरू कराकर कुछ गांवों में शुद्ध पानी की सप्लाई को दे दी थी।
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करीब डेढ़ साल पहले जल निगम के अफसरों ने शासन को कुल 20 गांवों की सूची भेजकर कार्य योजना पास करने का अनुरोध किया था।
जिसमें कहा गया था कि इन गांवों में टंकी और पाइप लाइन बिछने से गांव के लोगों को शुद्ध पानी मिल सकेगा, लेकिन शासन ने करोड़ों की कार्य योजना पर ग्रहण लगा दिया है। तब से एक भी फाइल पास नहीं हो सकी है।
जिस कारण अब दूसरी मदों से गांवों में कार्य योजना बनाई जा रही है। ताकि ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
काली नदी से प्रभावित 20 गांव
हापुड़ ब्लाक के मलकपुर, श्यामपुर, बांगडपुर, ददायरा, भटैल, मीरपुर कलां, अयादनगर दक्षिणी, मुशर्रफपुर झंडा, छपकोली, नवादा, हिमायुंपुर, मुर्शदपुर, ह्दयपुर। सिंभावली विकास खंड के गांव गजालपुर, हबिसपुर बिगास, मुरादपुर निजामसर, कनिया कल्याणपुर, आगापुर, मतनौरा।
डेढ़ साल पूर्व विभाग ने 20 गांवों की कार्य योजना बनाई थी और धन की मांग की गई थी। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। जिस कारण गांवों में कार्य शुरू नहीं हो सका है। - एसके जैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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डेढ़ साल से जल निगम की ओर से बनाई गई कार्य योजना की फाइल लखनऊ में धूल फांक रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने पैसा पास नहीं किया है।
जबकि काली नदी से खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुके भूजल के सेवन से लोग पीलिया, हेपेटाइटिस, कैंसर, आंत्रशोध जैसी बीमारियों ग्रसित हो रहे हैं।
मेरठ से कन्नौज तक सैकड़ों किमी का सफर तय करने के बाद गंगा में गिरने वाली काली नदी के आसपास 40 से अधिक गांव बसे हुए हैं। काली नदी के प्रदूषण से इन गांवों का भूजल खतरनाक स्तर तक दूषित हो चुका है।
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इन गांवों में जल निगम की ओर से शुद्ध पानी की सप्लाई के लिए टंकी और पाइप लाइन बिछाने की कार्य योजना तैयार की गई थी।
2014-15 में सरकार ने कुछ गांवों के लिए करोड़ों की धनराशि भी पास कर दी थी। जिस पर जल निगम ने कार्य शुरू कराकर कुछ गांवों में शुद्ध पानी की सप्लाई को दे दी थी।
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करीब डेढ़ साल पहले जल निगम के अफसरों ने शासन को कुल 20 गांवों की सूची भेजकर कार्य योजना पास करने का अनुरोध किया था।
जिसमें कहा गया था कि इन गांवों में टंकी और पाइप लाइन बिछने से गांव के लोगों को शुद्ध पानी मिल सकेगा, लेकिन शासन ने करोड़ों की कार्य योजना पर ग्रहण लगा दिया है। तब से एक भी फाइल पास नहीं हो सकी है।
जिस कारण अब दूसरी मदों से गांवों में कार्य योजना बनाई जा रही है। ताकि ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
काली नदी से प्रभावित 20 गांव
हापुड़ ब्लाक के मलकपुर, श्यामपुर, बांगडपुर, ददायरा, भटैल, मीरपुर कलां, अयादनगर दक्षिणी, मुशर्रफपुर झंडा, छपकोली, नवादा, हिमायुंपुर, मुर्शदपुर, ह्दयपुर। सिंभावली विकास खंड के गांव गजालपुर, हबिसपुर बिगास, मुरादपुर निजामसर, कनिया कल्याणपुर, आगापुर, मतनौरा।
डेढ़ साल पूर्व विभाग ने 20 गांवों की कार्य योजना बनाई थी और धन की मांग की गई थी। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। जिस कारण गांवों में कार्य शुरू नहीं हो सका है। - एसके जैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम