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आर्थिक तंगी झेल रहे किसानों ने भरी हुंकार
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Fri, 19 Aug 2016 07:17 PM IST
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sugar cane
- फोटो : amar ujala
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आर्थिक तंगी झेल रहे किसानों ने पेमेंट न मिलने पर मिल को गन्ना न देने का एलान किया है। चेतावनी दी है कि अगर जल्द बकाया भुगतान नहीं किया गया तो किसान सिंभावली मिल का बहिष्कार कर मेरठ और बुलंदशहर मिलों को गन्ना बेचेंगे।
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बता दें कि हाईकोर्ट की कड़ी हिदायत के बाद भी किसानों को गन्ने का पेमेंट नहीं मिल पा रहा है। इससे आर्थिक तंगी में घिरे किसानों को हर छोटी बड़ी जरूरतों के लिए ब्याज पर कर्ज लेना पड़ रहा है।
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केंद्र और प्रदेश शासन से कर्ज व अनुदान मिलने के बाद भी शुगर लॉबी किसानों के दुख दर्द को समझने की बजाए खुली मनमानी कर रही हैं। इससे चौतरफा दिक्कत झेल रहे किसानों ने सिंभावली शुगर मिल के खिलाफ मोर्चाबंदी की तैयार कर ली है।
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गुस्साए किसानों ने बकाया भुगतान न होने पर आगामी पेराई सीजन में सिंभावली शुगर मिल की बजाए पड़ोसी जनपद मेरठ और बुलंदशहर की मिलों को गन्ना बेचने की बात कही है। किसान नेता दिनेश खेड़ा, पूर्व प्रधान चुन्ने खां, पूर्व प्रिंसिपल रामनाथ सिंह,
मुखिया मदहत अली का कहना है कि सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन खुलेआम मनमानी कर रहा है। अगर बहुत जल्द पेमेंट नहीं मिला तो क्षेत्र से सिंभावली शुगर मिल को एक भी गन्ने की सप्लाई नहीं होने दी जाएगी। किसान अपना गन्ना मेरठ और बुलंदशहर की शुगर मिलों को बेचेंगे।
सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव राजीव सेठ ने बताया कि पिछले पेराई सत्र में सिंभावली शुगर मिल ने 1.04 करोड़ क्विंटल गन्ने की खरीद की थी। इसका कुल मूल्य 294 करोड़ होता है। अब तक किसानों को महज 129 करोड़ का भुगतान किया गया है। इससे शुगर मिल पर किसानों का 165 करोड़ का पेमेंट बकाया है।
सिंभावली सहकारी गन्ना विकास समिति के चेयरमैन सरदार सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि पेराई सत्र बंद होने के 6 माह बाद भी बकाया गन्ना मूल्य का पेमेंट न मिलना किसानों का खुला शोषण है। इसे किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अगर किसान डिमांड करेंगे तो फिर समिति बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास कर शासन को भिजवाया जाएगा, ताकि क्षेत्रीय किसान अपना गन्ना सिंभावली की बजाए बुलंदशहर और मेरठ की शुगर मिलों को देने के लिए स्वतंत्र हो सकें।