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वेस्ट यूपी में गन्ना भुगतान के मुद्दे को लगी सियासी ‘ठंड’
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Mon, 06 Feb 2017 09:50 PM IST
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गन्ने
- फोटो : अमर उजाला
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वेस्ट यूपी की राजनीति का अखाड़ा गन्ने की खेती के इर्दगिर्द रहता है। इस बार के विधानसभा चुनाव में गन्ना भुगतान के मुद्दे को सियासी ठंड लग गई है। सियासी दल भी इस बार वोटरों को लुभाने के लिए लुभावने वादे और दावों कर रहे हैं।
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देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की वेस्ट बेल्ट गन्ना उत्पादन में विख्यात है। यहां के अधिकांश किसानों- मजदूरों की जीविका का मुख्य स्रोत गन्ने की खेती है। जमीनी हकीकत देखी जाए तो वेस्ट यूपी की राजनीति के दंगल में गन्ना सबसे प्रमुख मुद्दा रहता आया है।
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इस बार के विधानसभा चुनाव में सियासी दल गन्ने की बजाए लुभावने वादे और दावों के साथ ही बिगड़े बोलों को हवा देकर वोटरों को अपने पक्ष में लामबंद करने की कवायद कर रहे हैं। जिसके चलते गन्ना पेमेंट का मुद्दा सियासी अखाड़े से गायब सा हो गया है।
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दूसरी तरफ सियासी दलों की अनदेखी से शुगर लॉबी को खुली मनमानी करने का भरपूर मौका मिल रहा है, जो इस सीजन में खरीदे जा रहे गन्ने का किसानों को पेमेंट देने को तैयार नहीं है। सिंभावली शुगर मिल ने मौजूदा पेराई सत्र में अब तक खरीदे गए 264.34 करोड़ का गन्ना खरीदा है,
लेकिन 6 फरवरी तक किसानों को महज 32 करोड़ का पेमेंट ही मिल पाया है। इस लिहाज से किसानों का 232.34 करोड़ का पेमेंट अभी बाकी है। जिसकी अदायगी न होने से आर्थिक तंगी में घिरे किसान की जेब खाली है। इसके बाद भी किसान अपने असल मुद्दों की बजाए जाति-धर्म की भावना में बंटा नजर आ रहा है।