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जल जाएं तो सरकारी अस्पताल में ना आएं

Thu, 03 Nov 2016 10:14 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Thu, 03 Nov 2016 10:14 PM IST
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burn does not go government hospital.
जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

जिले के सरकारी अस्पतालों में जले मरीजों के इलाज की सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक रेफर करके औपचारिकता पूरी करते हैं। इस चक्कर में मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ता है।

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यदि जल जाएं तो सरकारी अस्पतालों में उपचार के बारे में ना सोचे। सरकारी अस्पतालों में बर्न पेसेंट का उपचार करने की बजाय चिकित्सक रेफर करके खानापूर्ति कर रहे हैं। जिले में तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
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हालत यह है कि इन अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवाई तो मौजूद हैं, लेकिन जले घाव पर लगाने के लिए न तो दवा है और न ही बर्न वार्ड। अगर जला हुआ मरीज आता है तो उसे मेरठ गाजियाबाद या दिल्ली रैफर कर यहां के चिकित्सक अपनी जान छुड़ा लेते हैं।
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इस कारण बहुत से मरीज यहां शहर के ही निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एके सिंह का कहना है कि अभी यहां जिला स्तर की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

हालांकि जले हुए मरीज के लिए जो एंटीबायोटिक दवाई मौजूद हैं, प्राथमिक उपचार के समय उनसे मरीज को काफी आराम मिल जाता है।

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