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Hapur News: अधिकारियों ने नहीं दिए दस्तावेज, बिजनेस प्लान को नहीं मिल रही स्वीकृति
Sun, 14 Jul 2024 10:25 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sun, 14 Jul 2024 10:25 PM IST
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हापुड़। ऊर्जा निगम के अधिकारियों की लापरवाही के कारण करीब 17 करोड़ रुपये के बिजनेस प्लान की स्वीकृति में देरी हो रही है। इस पर एमडी कार्यालय में तैनात मुख्य अभियंता राजीव अग्रवाल ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। यही कारण है कि ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि में देरी हो रही है।
भविष्य में 24 घंटे बिजली देने के उद्देश्य से ऊर्जा निगम द्वारा ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जा रही है। इसके लिए जिलों से प्रस्ताव मांगे गए थे। जनपद के तीनों डिविजन के अधिकारियों ने भी पैकेज बनाकर प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन इन प्रस्तावों को भेजते समय कई गलतियां हुई हैं। यही कारण है कि बिजनेस प्लान 2024-25 के बड़े हिस्से को प्रपत्रों की कमी के कारण एमडी कार्यालय ने स्वीकृति नहीं दी है। जबकि, गर्मी को देखते हुए अब तक स्वीकृति मिलने के साथ ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर काम भी शुरू हो जाना चाहिए था। इस अनावश्यक विलंब का असली कारण जिले के अधिशासी अभियंता, एसडीओ और जेई बने हुए हैं। जो लगातार कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे विभाग की छवि तक धूमिल हो रही है, लेकिन अधिकारी अपनी लापरवाही में समय से सुधार नहीं कर रहे हैं।
दो चरणों में चल रहा कार्य
बिजली घरों व मोहल्लों आदि में लगे ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का कार्य बिजनेस प्लान के तहत हो रहा है। दो चरणों में चल रहा है। निगम का करोड़ों रुपये खर्च कर बेहतर आपूर्ति देने का उद्देश्य है।
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यह दस्तावेज सही प्रकार से नहीं भेजे गए--
-क्षमता वृद्धि वाले ट्रांसफार्मरों की निरीक्षण रिपोर्ट।
- जेई व एसडीओ द्वारा संबंधित कार्य की स्पष्ट तकनीकी रिपोर्ट
-पैकेज में ली गई सामग्री की धनराशि कोस्ट शेड्यूल के अनुसार हो।
- संबंधित कार्य का स्पष्ट लाइन चार्ट।
- ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं की सूची, स्वीकृत भार, वर्तमान बकाया एवं भुगतान की स्थिति।
- जिस ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि होनी है, उसे किसी अन्य योजना में लिया गया है या नहीं।
कोट -
दो भागों में बिजनेस प्लान भेजा गया था। इसमें एक भाग पास भी हो गया है। कुछ समय पहले यह दिक्कतें आई थीं। जिसमें सुधार कर दोबारा से प्रस्ताव भेज दिए थे।
- अवनीश कुमार, अधीक्षण अभियंता
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भविष्य में 24 घंटे बिजली देने के उद्देश्य से ऊर्जा निगम द्वारा ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जा रही है। इसके लिए जिलों से प्रस्ताव मांगे गए थे। जनपद के तीनों डिविजन के अधिकारियों ने भी पैकेज बनाकर प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन इन प्रस्तावों को भेजते समय कई गलतियां हुई हैं। यही कारण है कि बिजनेस प्लान 2024-25 के बड़े हिस्से को प्रपत्रों की कमी के कारण एमडी कार्यालय ने स्वीकृति नहीं दी है। जबकि, गर्मी को देखते हुए अब तक स्वीकृति मिलने के साथ ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर काम भी शुरू हो जाना चाहिए था। इस अनावश्यक विलंब का असली कारण जिले के अधिशासी अभियंता, एसडीओ और जेई बने हुए हैं। जो लगातार कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे विभाग की छवि तक धूमिल हो रही है, लेकिन अधिकारी अपनी लापरवाही में समय से सुधार नहीं कर रहे हैं।
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दो चरणों में चल रहा कार्य
बिजली घरों व मोहल्लों आदि में लगे ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का कार्य बिजनेस प्लान के तहत हो रहा है। दो चरणों में चल रहा है। निगम का करोड़ों रुपये खर्च कर बेहतर आपूर्ति देने का उद्देश्य है।
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यह दस्तावेज सही प्रकार से नहीं भेजे गए
-क्षमता वृद्धि वाले ट्रांसफार्मरों की निरीक्षण रिपोर्ट।
- जेई व एसडीओ द्वारा संबंधित कार्य की स्पष्ट तकनीकी रिपोर्ट
-पैकेज में ली गई सामग्री की धनराशि कोस्ट शेड्यूल के अनुसार हो।
- संबंधित कार्य का स्पष्ट लाइन चार्ट।
- ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं की सूची, स्वीकृत भार, वर्तमान बकाया एवं भुगतान की स्थिति।
- जिस ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि होनी है, उसे किसी अन्य योजना में लिया गया है या नहीं।
कोट -
दो भागों में बिजनेस प्लान भेजा गया था। इसमें एक भाग पास भी हो गया है। कुछ समय पहले यह दिक्कतें आई थीं। जिसमें सुधार कर दोबारा से प्रस्ताव भेज दिए थे।
- अवनीश कुमार, अधीक्षण अभियंता