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जो सबके मन को भाएगा वही दिल्ली जाएगा
Hapur
Updated Fri, 07 Mar 2014 05:32 AM IST
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हापुड़। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने से राजनैतिक दल जातिगत वोटों का गणित बैठाने में जुट गए हैं। मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट जातिगत आंकड़ों में उलझती नजर आने लगी है।
मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट में सर्वाधिक मतदाता मुस्लिम, दलित, वैश्य, त्यागी, ब्राह्मण, जाट और गुर्जर हैं। मेरठ शहर, किठौर-खरखौदा और हापुड़ विधान सभा क्षेत्र में सर्वाधिक मुस्लिम और दलित मतदाता है। इसी को ध्यान में रखकर बसपा ने पूर्व संासद हाजी शाहिद अखलाक को पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर रखा है। लेकिन सपा से प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और किठौर खरखौदा से विधायक शाहिद मंजूर के मैदान में आने से उनकी राह आसान नहीं होगी। क्योंकि शाहिद मंजूर की पकड़ अन्य जातियों भी काफी है। उधर जब से मेरठ लोकसभा सीट से मवाना विधान सभा क्षेत्र को काट दिया गया है। इस सीट से गुर्जर बिरादरी का वर्चस्व काफी कम हो गया है। उधर हापुड़ विधान सभा सीट को मेरठ लोकसभा क्षेत्र में जोड़ दिये जाने से इस सीट पर जाटों का वर्चस्व बढ़ा है।हाल में जाटों को ओबीसी में आरक्षण दिलाकर कांग्रेस ने अपनी ओर आकर्षित करने का गेम खेला है। लेकिन यह निर्भर करेगा कि कांग्रेस से प्रत्याशी कौन आता है। हो सकता है कि कांग्रेस इस सीट को रालोद के लिए गठबंधन में छोड़ दे। भाजपा के प्रत्याशी का मूल आधार वैश्य, त्यागी, ब्राहमण, गुर्जर तथा अन्य जातियां माने जा रहे हैं। हालांकि इस बार भाजपा को तमाम बिरादरियों में मोदी फैक्टर भी चलने की उम्मीद है। लेकिन आप पार्टी के प्रत्याशी के मैदान में आने पर मतदाता जातिगत आंकड़ों में उलझ सकते हैं। यहां उल्लेखनीय है कि मेरठ लोकसभा क्षेत्र की तीन विधान सभा सीटों मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण पर भाजपा का कब्जा है जबकि किठौर खरखौदा सीट पर सपा का और हापुड़ विधान सभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। इस चुनाव में जातिगत आंकड़ों के साथ साथ इन विधायकों की अग्नि परीक्षा भी होनी है।
नेताजी हुए फास्ट
हापुड़ । लोकसभा चुनाव के शंखनाद के साथ ही नेता जी अब चुनाव क्षेत्र में मुख्य मुद्दों पर जागने लगे हैं। अब तक बसपा ने हाजी शाहिद अखलाक और सपा ने शाहिद मंजूर प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। दोनों दलों के हापुड़ में चुनाव कार्यालय भी खुल गये हैं। कांग्रेस और भाजपा का प्रत्याशी घोषित न हो पाने के कारण अभी चुनाव कार्यालय नहीं खुल सके हैं।
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मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट में सर्वाधिक मतदाता मुस्लिम, दलित, वैश्य, त्यागी, ब्राह्मण, जाट और गुर्जर हैं। मेरठ शहर, किठौर-खरखौदा और हापुड़ विधान सभा क्षेत्र में सर्वाधिक मुस्लिम और दलित मतदाता है। इसी को ध्यान में रखकर बसपा ने पूर्व संासद हाजी शाहिद अखलाक को पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर रखा है। लेकिन सपा से प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और किठौर खरखौदा से विधायक शाहिद मंजूर के मैदान में आने से उनकी राह आसान नहीं होगी। क्योंकि शाहिद मंजूर की पकड़ अन्य जातियों भी काफी है। उधर जब से मेरठ लोकसभा सीट से मवाना विधान सभा क्षेत्र को काट दिया गया है। इस सीट से गुर्जर बिरादरी का वर्चस्व काफी कम हो गया है। उधर हापुड़ विधान सभा सीट को मेरठ लोकसभा क्षेत्र में जोड़ दिये जाने से इस सीट पर जाटों का वर्चस्व बढ़ा है।हाल में जाटों को ओबीसी में आरक्षण दिलाकर कांग्रेस ने अपनी ओर आकर्षित करने का गेम खेला है। लेकिन यह निर्भर करेगा कि कांग्रेस से प्रत्याशी कौन आता है। हो सकता है कि कांग्रेस इस सीट को रालोद के लिए गठबंधन में छोड़ दे। भाजपा के प्रत्याशी का मूल आधार वैश्य, त्यागी, ब्राहमण, गुर्जर तथा अन्य जातियां माने जा रहे हैं। हालांकि इस बार भाजपा को तमाम बिरादरियों में मोदी फैक्टर भी चलने की उम्मीद है। लेकिन आप पार्टी के प्रत्याशी के मैदान में आने पर मतदाता जातिगत आंकड़ों में उलझ सकते हैं। यहां उल्लेखनीय है कि मेरठ लोकसभा क्षेत्र की तीन विधान सभा सीटों मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण पर भाजपा का कब्जा है जबकि किठौर खरखौदा सीट पर सपा का और हापुड़ विधान सभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। इस चुनाव में जातिगत आंकड़ों के साथ साथ इन विधायकों की अग्नि परीक्षा भी होनी है।
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नेताजी हुए फास्ट
हापुड़ । लोकसभा चुनाव के शंखनाद के साथ ही नेता जी अब चुनाव क्षेत्र में मुख्य मुद्दों पर जागने लगे हैं। अब तक बसपा ने हाजी शाहिद अखलाक और सपा ने शाहिद मंजूर प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। दोनों दलों के हापुड़ में चुनाव कार्यालय भी खुल गये हैं। कांग्रेस और भाजपा का प्रत्याशी घोषित न हो पाने के कारण अभी चुनाव कार्यालय नहीं खुल सके हैं।
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