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52 हजार बच्चों को मयस्सर नहीं किताबें
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Sat, 23 Jul 2016 09:42 PM IST
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- फोटो : demo
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परिषदीय स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर चलाने का सरकार बेशक सपना देख रही हो, लेकिन जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे 52 हजार बच्चे स्कूल खुलने के दो महीने बाद भी बिना किताबों के ही पढ़ने को मजबूर हैं। बच्चों को किताबें कब तक मिलेंगी, यह बीएसए को भी नहीं पता है।
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जिले में संचालित परिषदीय स्कूलों में 52 हजार छात्र/छात्राएं पंजीकृत हैं। इन स्कूलों में शिक्षा का माहौल सुधारने के लिए आए दिन नए नियम लागू किए जाते हैं। सरकार ने परिषदीय स्कूलों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर चलाने का निर्णय लिया था।
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इसी क्रम में शैक्षिक सत्र में भी बदलाव किया गया था लेकिन कान्वेंट स्कूलों के बराबर संसाधन और सुविधाएं तो दूर, सरकार अब तक इन बच्चों को किताबें तक मुहैया नहीं करवा सकी है।
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स्कूल खुले दो माह से अधिक समय बीत चुका है लेकिन बच्चे स्कूल में खेलकूद कर ही समय बीता रहे हैं, जबकि कान्वेंट स्कूलों में आधे से ज्यादा कोर्स पूरा हो चुका है। परिषदीय स्कूलों के कुछ बच्चों के पास फटी पुरानी किताबें हैं,
इन्हीं से स्कूल के अन्य बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार व प्रशासन बच्चों की शिक्षा के प्रति कितना गंभीर है।
इस संबंध में बीएसए देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि अब तक शासन की ओर से कोई गाइडलाइन नहीं मिली है। किताबों का स्टॉक मिलते ही वितरण करा दिया जाएगा।