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अतिक्रमण में घिरा सरकारी तालाब कब्जों से मुक्त नहीं हो पाया
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तालाब को कब्जामुक्त कराने गई पुलिस बैरंग लौटी
गढ़मुक्तेश्वर। पट्टे निरस्त होने के बाद भी अतिक्रमण से घिरा सरकारी तालाब कब्जों से मुक्त नहीं हो पाया। अदालत में केस लंबित होने की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासनकी टीम को जेसीबी मशीन समेत बैरंग लौटना पड़ा।
सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर में कई साल पहले ग्राम सभा स्तर से सरकारी तालाब की भूमि में 50 लोगों को बोंगे बिटोरे और कूड़ी डालने को पटटे आवंटित किए गए थे। जिनकी आड़ में अधिकांश पट्टा धारकों ने तालाब की भूमि में पक्का निर्माण कराकर कब्जा कर लिया था। सरकारी तालाब की भूमि में अतिक्रमण होने से शासन की जल संचयन योजना को तगड़ा झटका लगने की शिकायत होने पर प्रशासन द्वारा पट्टों को अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया गया था। पट्टे निरस्त होने पर तालाब की भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के मकसद से हल्का लेखपाल विपिन त्यागी पुलिस टीम को साथ लेकर बुधवार को गांव में पहुंच गए। तालाब की भूमि पर हो रहे पक्के निर्माण को तोड़ने के लिए जेसीबी मशीन की व्यवस्था भी की हुई थी, लेकिन खबर मिलते ही कई पट्टे धारक आनन फानन में मौके पर पहुंच गए। जिन्होंने पट्टे निरस्त होने के विरोध में की गई अदालती कार्रवाई में 9 जुलाई की तारीख लगी होने से संबंधित दस्तावेजों का हवाला देकर कोई भी तोड़फोड़ न करने की गुहार लगाई। मामला अदालत में लंबित होने का पता लगते ही लेखपाल विपिन त्यागी ने जिला और तहसील स्तरीय अफसरों से वार्ता कर तालाब को अतिक्रमण से मुक्त करने का अभियान फौरी तौर पर स्थगित कर दिया। लेखपाल विपिन त्यागी ने बताया कि पट्टा धारकों को उनके संबंधित दस्तावेजों समेत तहसील में बुलाया गया है, जहां उनके दस्तावेजों की जांच पड़ताल करने के बाद ही आगे की कार्रवाई हो पाएगी।
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गढ़मुक्तेश्वर। पट्टे निरस्त होने के बाद भी अतिक्रमण से घिरा सरकारी तालाब कब्जों से मुक्त नहीं हो पाया। अदालत में केस लंबित होने की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासनकी टीम को जेसीबी मशीन समेत बैरंग लौटना पड़ा।
सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर में कई साल पहले ग्राम सभा स्तर से सरकारी तालाब की भूमि में 50 लोगों को बोंगे बिटोरे और कूड़ी डालने को पटटे आवंटित किए गए थे। जिनकी आड़ में अधिकांश पट्टा धारकों ने तालाब की भूमि में पक्का निर्माण कराकर कब्जा कर लिया था। सरकारी तालाब की भूमि में अतिक्रमण होने से शासन की जल संचयन योजना को तगड़ा झटका लगने की शिकायत होने पर प्रशासन द्वारा पट्टों को अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया गया था। पट्टे निरस्त होने पर तालाब की भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के मकसद से हल्का लेखपाल विपिन त्यागी पुलिस टीम को साथ लेकर बुधवार को गांव में पहुंच गए। तालाब की भूमि पर हो रहे पक्के निर्माण को तोड़ने के लिए जेसीबी मशीन की व्यवस्था भी की हुई थी, लेकिन खबर मिलते ही कई पट्टे धारक आनन फानन में मौके पर पहुंच गए। जिन्होंने पट्टे निरस्त होने के विरोध में की गई अदालती कार्रवाई में 9 जुलाई की तारीख लगी होने से संबंधित दस्तावेजों का हवाला देकर कोई भी तोड़फोड़ न करने की गुहार लगाई। मामला अदालत में लंबित होने का पता लगते ही लेखपाल विपिन त्यागी ने जिला और तहसील स्तरीय अफसरों से वार्ता कर तालाब को अतिक्रमण से मुक्त करने का अभियान फौरी तौर पर स्थगित कर दिया। लेखपाल विपिन त्यागी ने बताया कि पट्टा धारकों को उनके संबंधित दस्तावेजों समेत तहसील में बुलाया गया है, जहां उनके दस्तावेजों की जांच पड़ताल करने के बाद ही आगे की कार्रवाई हो पाएगी।
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