जि चिकित्सक हड़ताल कर दिल्ली गए

Ghaziabad Bureau Updated Wed, 07 Jun 2017 12:41 AM IST
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फोटो फाइल संख्या 06एचपीआर पीएच-01, 02
निजी चिकित्सक हड़ताल पर, दर-दर भटके मरीज
सरकार की नीतियों के विरोध में मंगलवार को निजी चिकित्सकों ने हड़ताल रखी और दिल्ली चल गऐ। इससे जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। मरीज भीषण गर्मी में इलाज के लिए इधर उधर भटकते रहे।

इससे पहले आक्रोशित चिकित्सकों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपकर राहत की गुहार लगाई। परेशान मरीजों को इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा।

जिले में करीब 450 निजी अस्पताल संचालित हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार की गलत नीतियों के चलते चिकित्सकों को कार्य करने में दिक्कत हो रही है।

चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर कोई कानून नहीं है। उनकी प्रमुख मांगों में चिकित्सक एवं मेडिकल सेक्टर पर हिंसा व तोड़फोड़ के खिलाफ सख्त केंद्रीय कानून बनाने, इलाज व जांच की प्रक्रिया का अपराधीकरण न हो, इसकी शिकायत सीएमओ या एमसीआई में ही हो, चिकित्सक व चिकित्सीय प्रतिष्ठानों का पंजीकरण एकल खिड़की पर हो, लाइसेंस राज समाप्त हो, एमसीआई में सुधार किया जाए, केवल जेनेरिक दवाओं को लिखने की बाध्यता न हो, आदि शामिल हैं।

इन मांगों के निस्तारण को लेकर व सरकार की नीतियों के विरोध में चिकित्सकों ने हड़ताल रखी। सरकार की नीतियों के विरोध में चिकित्सकों ने पैदल मार्च निकाला।

इसके बाद नगर पालिका में चल रहे तहसील दिवस में पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा, जल्द राहत नहीं मिलने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी गई है।

डीएम को ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. वाईपी अग्रवाल, डॉ. मंजुला शर्मा, डॉ. जेए खान, डॉ. जेपी अग्रवाल, डॉ. श्याम कुमार, डॉ. वीके त्रिपाठी, डॉ. दिनेश गर्ग, डॉ. मनोज जैन आदि मौजूद रहे।

पिलखुवा में मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. उमेश गुप्ता और सचिव डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि निजी चिकित्सक मेहनत से कार्य करते हैं। मेहनत से जनता का इलाज करते हैं, फिर भी चिकित्सक विभिन्न मांगों का समाधान नहीं होने के कारण परेशान होते हैं। सरकार को जल्द चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए ताकि उन्हें परेशानी न हो।

बिना इलाज कराए ही लौटे मरीज
हड़ताल के कारण जिले में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई। मरीजों को भीषण गर्मी में इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। हालांकि गंभीर मरीजों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में आपातकालीन सुविधाएं चालू रहीं लेकिन शेष मरीजों को सरकारी अस्पताल जाना पड़ा।

मरीजों की संख्या बढ़ने पर सरकारी अस्पतालों में भी व्यवस्था बेपटरी हो गई। मरीज अनुज ने बताया कि वह काफी परेशान है। इलाज के लिए शहर आए थे, लेकिन चिकित्सकों की हड़ताल होने के कारण उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है।

बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ रहा है। पवन त्यागी ने बताया कि भीषण गर्मी में वैसे ही चलना मुश्किल हो रहा है। वह शहर के कई अस्पतालों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन इलाज नहीं मिल सका है।

मरीज पिंटू ने कहा कि सरकार की नीतियों के विरोध में चिकित्सकों की हड़ताल का मरीजों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सरकार जनता के हितों को समझे और उन्हें परेशान होने से बचाए।

राकेश शर्मा का कहना है कि सुबह से इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं, सभी अस्पतालों में हड़ताल बताकर उन्हें टरका दिया गया। ऐसे में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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