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मीट फैक्ट्री पर सील को लेकर कमिश्नर के समक्ष सुनवाई, आज सुनाएंगे फैसला
Updated Wed, 30 Aug 2017 11:48 PM IST
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मीट फैक्ट्री पर सील पर हुई सुनवाई, फैसला आज
-सूबे में मीट फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के दौरान कर दिया गया था रामपुर रोड स्थित मीट फैक्ट्री को भी सील
-प्रत्येक माह करोड़ों रुपये की कमाई करती थी फैक्ट्री
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। रामपुर रोड स्थित एक मीट फैक्ट्री में अनाधिकृत निर्माण को लेकर एचपीडीए के अफसरों की ओर से जुलाई माह में लगाई गई सील के मामले में बुधवार को कमिश्नर के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की जिरह के बाद कमिश्नर ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया। अब वे बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुना सकते हैं।
एचपीडीए ने 27 जुलाई को रामपुर रोड स्थित एक मीट फैक्ट्री पर अवैध निर्माण को लेकर सील लगा दी थी। अधिकारियों का कहना था कि फैक्ट्री के लगभग 31 हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र का अनाधिकृत रूप से निर्माण किया गया है। उनके अनुसार ये भूमि 2021 मास्टर प्लान के लिए औद्योगिक क्षेत्र में आनी है। इस भूमि पर क्षेत्रीय पार्क अंकित है। ऐसे में इस क्षेत्र पर अनाधिकृत तौर पर निर्माण कर कार्य किया गया जो पूर्ण रूप से अवैध है।
अधिकारियों ने इस प्लांट के दोनों गेटों पर तालाबंदी कर सील लगा दी थी। यह फैक्ट्री प्रति माह करोड़ों की कमाई करती थी। उसके बाद यह मामला मंडलायुक्त के समक्ष लंबित है। बुधवार को मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने दोनों पक्षों की जिरह सुनी। फैक्ट्री की ओर से वकील सुमन गुप्ता व प्राधिकरण की ओर से दिनेश चंद कक्कड़ व तहसीलदार अनिल कुमार ने तर्क प्रस्तुत किए। उसके बाद कमिश्नर ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया। वे बृहस्पतिवार को सील हटने के संबंध में अपना फैसला सुना सकते हैं।
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-सूबे में मीट फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के दौरान कर दिया गया था रामपुर रोड स्थित मीट फैक्ट्री को भी सील
-प्रत्येक माह करोड़ों रुपये की कमाई करती थी फैक्ट्री
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। रामपुर रोड स्थित एक मीट फैक्ट्री में अनाधिकृत निर्माण को लेकर एचपीडीए के अफसरों की ओर से जुलाई माह में लगाई गई सील के मामले में बुधवार को कमिश्नर के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की जिरह के बाद कमिश्नर ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया। अब वे बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुना सकते हैं।
एचपीडीए ने 27 जुलाई को रामपुर रोड स्थित एक मीट फैक्ट्री पर अवैध निर्माण को लेकर सील लगा दी थी। अधिकारियों का कहना था कि फैक्ट्री के लगभग 31 हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र का अनाधिकृत रूप से निर्माण किया गया है। उनके अनुसार ये भूमि 2021 मास्टर प्लान के लिए औद्योगिक क्षेत्र में आनी है। इस भूमि पर क्षेत्रीय पार्क अंकित है। ऐसे में इस क्षेत्र पर अनाधिकृत तौर पर निर्माण कर कार्य किया गया जो पूर्ण रूप से अवैध है।
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अधिकारियों ने इस प्लांट के दोनों गेटों पर तालाबंदी कर सील लगा दी थी। यह फैक्ट्री प्रति माह करोड़ों की कमाई करती थी। उसके बाद यह मामला मंडलायुक्त के समक्ष लंबित है। बुधवार को मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने दोनों पक्षों की जिरह सुनी। फैक्ट्री की ओर से वकील सुमन गुप्ता व प्राधिकरण की ओर से दिनेश चंद कक्कड़ व तहसीलदार अनिल कुमार ने तर्क प्रस्तुत किए। उसके बाद कमिश्नर ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया। वे बृहस्पतिवार को सील हटने के संबंध में अपना फैसला सुना सकते हैं।
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