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Hamirpur News: सुप्रीम कोर्ट तक लगाएंगे न्याय की गहार
Sun, 21 Sep 2025 12:57 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sun, 21 Sep 2025 12:57 AM IST
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हमीरपुर। जेल में पिटाई से मौत के मामले में बंदी के परिजन हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने की तैयारी में है। उनका मानना है कि गिरफ्तारी न होने के चलते आरोपी अपने बचाव के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकते है। इसलिए इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए वह पहले सेे कैविएट दाखिल करेंगे। कहा कि आरोपियों द्वारा राजीनामा के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रलोभन दिया जा रहा। लेकिन वह न्याय चाहते है। वह न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
जिला कारागार में 11 सितंबर को सदर कोतवाली क्षेत्र के सूरजपुर निवासी अनिल द्विवेदी एससीएसटी के मामले में हुए वारंट के चलते भेजा गया। वहां उस पर उद्दंडता का आरोप लगा 13 सितंबर की रात पिटाई की गई। इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई उसे 14 सितंबर को जिला अस्पताल भेजा गया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव पर सात आठ चोटों के निशान पाए गए। इस पर परिजन जेलर समेत अन्य जेल कर्मियों पर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग करने लगे। रिपोर्ट दर्ज न होने पर परिजन बिना शव लिए घर चले गए।
इस दौरान डीआईजी जेल नेे निरीक्षण किया और डिप्टी जेलर व जेल वार्डर पर निलंबन की कार्रवाई हुई। 16 सितंबर को अनिल की पत्नी पूजा की तहरीर पर जेलर केपी चंदीला, डिप्टी जेलर संगेश कुमार, जेल वार्डर अनिल यादव, नंबरदार दिलीप, दीपक, शफी मोहम्मद व रायटर बिनय के अलावा एक अज्ञात पर हत्या व जबरन वसूली की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसी मामले में देर शाम जेलर को भी निलंबित कर दिया गया। उसके बाद से आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर परिजनों में आक्रोश है। उनका मानना है कि आरोपियों को जानबूझकर बचने का समय दिया जा रहा है। वह बचाव के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेने की फिराक में है। लेकिन वह इसके लिए पहले से कैविएट लगाएंगी।
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यह है कैविएट
न्यायालय में कुछ मामले ऐसे होते है। जिनमें बिना दूसरे पक्ष को सुने आदेश जारी कर दिया जाता है। इससे बचने के लिए लोग पहले से न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते है। इसमें अपराध संख्या व वादी या बचाव पक्ष को नाम लिखते है और इस मामले में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगते है। इसे कैविएट बोलते है। इस पर न्यायालय उस मामले पर सुनवाई से पहले दूसरे पक्ष के सूचित करता है। पक्ष जानने के बाद उस पर आदेश करता है।
राजीनामा के आ रहे दबाव
- परिजनों के अनुसार जिस दिन रिपोर्ट दर्ज की गई। उसी दिन कई लोग तरह-तरह के प्रलोभन दे जेलर का नाम हटाने की बात कह रहे थे। लेकिन पूजा ने अडिग रहने पर सब चुप हो गए। बताया कि कुछ लोग उनके यहां आए थे और वह दिल्ली में उनकी बात पहुंचाने की बात कह सादा कागज पर हस्ताक्षर की बात कह रहे थे। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। कहा कि वह जल्द हाईकोर्ट जाएंगे और वहां बात न बनने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंंगे।
- मामले की न्यायिक जांच के साथ पुलिस भी अपनी विवेचना में जुटी है। ऐसे में मामलों में जांच व साक्ष्य के बिना गिरफ्तारी नहीं हो सकती। जैसे-जैसे साक्ष्य मिलेंगे कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। - डॉ. दीक्षा शर्मा, एसपी।
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जिला कारागार में 11 सितंबर को सदर कोतवाली क्षेत्र के सूरजपुर निवासी अनिल द्विवेदी एससीएसटी के मामले में हुए वारंट के चलते भेजा गया। वहां उस पर उद्दंडता का आरोप लगा 13 सितंबर की रात पिटाई की गई। इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई उसे 14 सितंबर को जिला अस्पताल भेजा गया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव पर सात आठ चोटों के निशान पाए गए। इस पर परिजन जेलर समेत अन्य जेल कर्मियों पर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग करने लगे। रिपोर्ट दर्ज न होने पर परिजन बिना शव लिए घर चले गए।
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इस दौरान डीआईजी जेल नेे निरीक्षण किया और डिप्टी जेलर व जेल वार्डर पर निलंबन की कार्रवाई हुई। 16 सितंबर को अनिल की पत्नी पूजा की तहरीर पर जेलर केपी चंदीला, डिप्टी जेलर संगेश कुमार, जेल वार्डर अनिल यादव, नंबरदार दिलीप, दीपक, शफी मोहम्मद व रायटर बिनय के अलावा एक अज्ञात पर हत्या व जबरन वसूली की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसी मामले में देर शाम जेलर को भी निलंबित कर दिया गया। उसके बाद से आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर परिजनों में आक्रोश है। उनका मानना है कि आरोपियों को जानबूझकर बचने का समय दिया जा रहा है। वह बचाव के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेने की फिराक में है। लेकिन वह इसके लिए पहले से कैविएट लगाएंगी।
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यह है कैविएट
न्यायालय में कुछ मामले ऐसे होते है। जिनमें बिना दूसरे पक्ष को सुने आदेश जारी कर दिया जाता है। इससे बचने के लिए लोग पहले से न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते है। इसमें अपराध संख्या व वादी या बचाव पक्ष को नाम लिखते है और इस मामले में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगते है। इसे कैविएट बोलते है। इस पर न्यायालय उस मामले पर सुनवाई से पहले दूसरे पक्ष के सूचित करता है। पक्ष जानने के बाद उस पर आदेश करता है।
राजीनामा के आ रहे दबाव
- परिजनों के अनुसार जिस दिन रिपोर्ट दर्ज की गई। उसी दिन कई लोग तरह-तरह के प्रलोभन दे जेलर का नाम हटाने की बात कह रहे थे। लेकिन पूजा ने अडिग रहने पर सब चुप हो गए। बताया कि कुछ लोग उनके यहां आए थे और वह दिल्ली में उनकी बात पहुंचाने की बात कह सादा कागज पर हस्ताक्षर की बात कह रहे थे। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। कहा कि वह जल्द हाईकोर्ट जाएंगे और वहां बात न बनने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंंगे।
- मामले की न्यायिक जांच के साथ पुलिस भी अपनी विवेचना में जुटी है। ऐसे में मामलों में जांच व साक्ष्य के बिना गिरफ्तारी नहीं हो सकती। जैसे-जैसे साक्ष्य मिलेंगे कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। - डॉ. दीक्षा शर्मा, एसपी।