{"_id":"6929f0a320f59826b2068a45","slug":"the-doctor-who-was-negligent-in-the-operation-will-have-to-pay-compensation-of-rs-3-lakh-hamirpur-news-c-223-1-hmp1002-133039-2025-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur News: ऑपरेशन में लापरवाही करने वाले डॉक्टर को देनी होगी तीन लाख क्षतिपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur News: ऑपरेशन में लापरवाही करने वाले डॉक्टर को देनी होगी तीन लाख क्षतिपूर्ति
Sat, 29 Nov 2025 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sat, 29 Nov 2025 12:27 AM IST
विज्ञापन
हमीरपुर। किडनी में स्टोन का गलत तरीके से ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर पर लगाए गए आरोप साबित होने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने फैसला सुनाया है। इसमें वादी को तीन लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मिलेगी। दो हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी मिलेंगे। इसके लिए 45 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है।
शहर के पुलिस लाइन मंदिर कॉलोनी निवासी बृजेश कुमार ने दो मार्च 2021 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में केस दायर किया था। बताया था कि उसके पेट में पथरी का इलाज चल रहा था। विमल नर्सिंग होम में डॉक्टर पीएन पारया ने ऑपरेशन बताया था। मरीज ने ऑपरेशन के लिए कहा तो बताया गया कि दूरबीन विधि से ऑपरेशन किया जाएगा। जो खर्च बताया उसे जमा किया गया। बृजेश का आरोप था किडनी में स्टोन निकालने के लिए बताए गए तरीके से ऑपरेशन नहीं किया गया। जांच कराई गई, नर्सिंग होम में भर्ती रखा गया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन उसे हायर सेंटर ले गए। जहां से लखनऊ के लिए रेफर किया गया। वहां बैड की उपलब्धता न होने की वजह से प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया। वहां पता चला स्टोन निकाली ही नहीं गई। इस मामले में डॉक्टर समेत पांच आरोपी बनाए गए थे। 11 माह बाद मामले को पंजीकृत किया गया। इसके बाद सुनवाई हुई। वादी ने 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी थी। पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आयोग के अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर को चिकित्सा सेवा में कमी का दोषी पाया और फैसला सुनाया। चार अन्य पर आरोप साबित नहीं हुए। वादी को तीन लाख रुपये क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय लापरवाही करने वाले डॉक्टर को देना पड़ेगा। इसके लिए 45 दिन का समय निर्धारित किया है।
विज्ञापन
शहर के पुलिस लाइन मंदिर कॉलोनी निवासी बृजेश कुमार ने दो मार्च 2021 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में केस दायर किया था। बताया था कि उसके पेट में पथरी का इलाज चल रहा था। विमल नर्सिंग होम में डॉक्टर पीएन पारया ने ऑपरेशन बताया था। मरीज ने ऑपरेशन के लिए कहा तो बताया गया कि दूरबीन विधि से ऑपरेशन किया जाएगा। जो खर्च बताया उसे जमा किया गया। बृजेश का आरोप था किडनी में स्टोन निकालने के लिए बताए गए तरीके से ऑपरेशन नहीं किया गया। जांच कराई गई, नर्सिंग होम में भर्ती रखा गया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन उसे हायर सेंटर ले गए। जहां से लखनऊ के लिए रेफर किया गया। वहां बैड की उपलब्धता न होने की वजह से प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया। वहां पता चला स्टोन निकाली ही नहीं गई। इस मामले में डॉक्टर समेत पांच आरोपी बनाए गए थे। 11 माह बाद मामले को पंजीकृत किया गया। इसके बाद सुनवाई हुई। वादी ने 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी थी। पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आयोग के अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर को चिकित्सा सेवा में कमी का दोषी पाया और फैसला सुनाया। चार अन्य पर आरोप साबित नहीं हुए। वादी को तीन लाख रुपये क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय लापरवाही करने वाले डॉक्टर को देना पड़ेगा। इसके लिए 45 दिन का समय निर्धारित किया है।
विज्ञापन