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वर्षों पूर्व बनी बंधियां जल समेटने में नाकाम
ब्यूरो अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:51 PM IST
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बरसात से जलमग्न कम्हरिया गांव की बंधी।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में नलकूपों व बांधों की स्थापना के पूर्व भूगर्भ जलस्तर उठाने के प्रयास अधिक हुए। कृषि उपज बढ़ाने के मकसद से क्षेत्र में 72 बंधियों का निर्माण हुआ। लेकिन सिंचाई विभाग की अनदेखी से दर्जनों बंधियां टूटकर नष्ट हो चुकी हैं। कम्हरिया गांव स्थित 2200 एकड़ भूमि में जल संचयन को बनी बंधी भी कई स्थानों पर कमजोर हो जाने से क्षमता के अनुसार नहीं भर पा रही है।
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जनपद से महोबा को 1995 में अलग कर दिया गया था। लेकिन यहां की बंधियों की देखरेख सिंचाई प्रखंड कार्यालय महोबा कर रहा है। जबकि इस विभाग की जिले में 72 बंधियां हैं। इनमें कम्हरिया, बिगहना, पाटनपुर, लरौंद, मकरांव, भमई, चांदीकला, सिजवाही, भटुरी, इंगोहटा, सुमेरपुर के सात अलग-अलग गांवों में जिनमें पारा, टेढ़ा, पंधरी, सिकहुला आदि हैं।
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मुख्य बंधियों में सबसे बड़ी बंधी कम्हरिया गांव की है। यह बंधी कई गांवों मांचा, हसुई, ढुनगवां, खड़ेही, सायर व करगांव के मौजे के मिलाकर 2200 एकड़ जमीन में जलभराव कर एक बड़े सागर की तरह महसूस की जा सकती है। लेकिन जबसे इस बंधी का काम हुआ। मरम्मत के अभाव में इसका एक भाग बुरी तरह जर्जर हो चुका है।
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दूसरे भाग में कम्हरिया से बिवांर जाने का मार्ग पक्का बना है। लेकिन बंधी में तकरीबन छह फीट तक पानी भरा जा सकता है और इस जल भराव से यहां की भूमि तो जलमग्न होती ही है। साथ ही पूरे क्षेत्र का भूमिगत जल स्तर सामान्य रहता है। बंधी का पानी ठीक खेतों में पलेवा के समय निकाला जाता है। जिससे सैकड़ों बीघे भूमि में सिंचाई हो जाती है।
जिससे पैदावार बढ़ती है। लगातार बंधी की स्थिति जीर्णशीर्ण होने से जल भराव की क्षमता कम हो चुकी है। वहीं बीते कई वर्षों से बारिश कम होने से यह बंधी नहीं भर सकी। इस वर्ष के जुलाई माह में ही अब तक चार से पांच फीट पानी इसमें आ चुका है। बंधी के जलनिकासी के स्थान पर पड़ने वाले 15 पटरों में सिर्फ पांच ही लगाए जा सके हैं। बंधी के लगातार मरम्मत के लिए ग्राम पंचायत में स्थानीय अधिकारियों से गुहार लगाई। मंडलायुक्त के संज्ञान में भी जर्जर बंधियों को सुधारने की मांग की चुकी है। लेकिन किसी ने भी सुनवाई नहीं की।