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Hamirpur News: चार माह में पनीर के छह सैंपल, अब तक नहीं आई रिपोर्ट

Thu, 06 Aug 2026 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:39 PM IST
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Six samples of paneer collected in four months; reports still awaited.
फोटो 06 एचएएमपी 11- शहर के दीक्षित स्वीट में पनीर तौलता दुकान कर्मी। संवाद
हमीरपुर। महाराष्ट्र सरकार ने सिंथेटिक पनीर के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए आधिकारिक तौर पर रोक लगा दी है। चूंकि मामला लोगों की सेहत के साथ जुड़ा है। इसकी वजह से अन्य राज्य भी गंभीरता बरत रहे हैं। बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज टीम ने भी जिले में पनीर उत्पादन की हकीकत जानी। हमीरपुर, कुरारा, सुमेरपुर, राठ, कुछेछा आदि क्षेत्रों से बीते चार माह में एकत्र किए गए पनीर के छह नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।
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जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से गतवर्ष दूध, पनीर व खोया आदि के लिए गए नमूनों की जांच में पनीर व दूध के कई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। खाद्य विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 में पनीर के 17 नमूने लिए गए थे। इनमें 12 नमूनों की जांच रिपोर्ट आई है। सात नमूने फैट की कमी से फेल पाए गए। विभाग जांच रिपोर्ट के अनुसार नमूनों में दूध वसा (मिल्क फैट) के अतिरिक्त अन्य प्रकार के वसा की मिलावट पाई गई है। सभी नमूनों में निर्धारित मानक से कम फैट पाया गया। इन सभी सात नमूनों को सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में रखा गया है।
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खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी फेल नमूने एडीएम एफआर कोर्ट में लंबित हैं। इसके अलावा गतवर्ष दूध के लिए गए 26 नमूनों में अब तक 20 की रिपोर्ट आई है। इनमें 14 नमूने जांच में मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। इन्हें मिस ब्रांडेड घोषित किया गया है क्योंकि पैकेट बंद उत्पादों पर आवश्यक जानकारी अंकित नहीं थी। वहीं खोया के 16 नमूनों में सात की जांच रिपोर्ट आई है। सभी जांच में सही पाए गए हैं। चालू सत्र में दूध के छह व खोया के तीन नमूनों की अब तक जांच रिपोर्ट नहीं आई हैं।
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क्या है आर्टिफिशियल पनीर
एनालॉग पनीर एक आर्टिफिशियल डेयरी सब्सीट्यूट है जिसे वेजिटेबल ऑयल और दूसरे आर्टिफिशियल टेक्सचर का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। यह देखने और स्वाद में बिल्कुल असली दूध के पनीर जैसा लगता है। हालांकि जिले में इस पनीर की कहीं बिकने की पुष्टि नहीं हुई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी मृत्युंजय कुमार ने बताया कि सिंथेटिक व आर्टिफिशियल पनीर को पाउडर दूध, वसा तेल आदि से बनाया जाता है। फिलहाल जिले में ऐसा कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है। ज्यादातर पनीर के नमूने फैट की कमी के कारण फेल मिले हैं। इनमें कोई भी रसायनों का इस्तेमाल नहीं मिला है।

मिलावटी पनीर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
जनरल फिजीशियन डॉ. परमेंदर प्रजापति के अनुसार नकली या मिलावटी पनीर खाने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसमें यूरिया, डिटर्जेंट, स्टार्च, रिफाइंड ऑयल और अन्य हानिकारक रसायन मिले होते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, अपच, और लंबे समय में लीवर व किडनी को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा इसमें पोषण या असली प्रोटीन नहीं मिलता है।


इन कारोबारियों के नमूने जांच में फेल
1- लवलेश कुमार झलोखर, कुरारा हमीरपुर।
2- प्रमोद कुमार अमन शहीद हमीरपुर।
3- राकेश कुमार सुमेरपुर, हमीरपुर।
4- आयुष राजपूत रामरती रेस्टोरेंट उरई रोड राठ, हमीरपुर।
5- मोहित सिंह भौली कुरारा, हमीरपुर।
6- महेश चंद्र बंगरा, जालौन।
7- नेतराम कुछेछा, हमीरपुर।


उपभोक्ताओं को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नियमित रूप से नमूने लेकर जांच करवाई जाती है। मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। -डॉ. गौरीशंकर, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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