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रूट डायवर्जन : रोजाना डेढ़ करोड़ रुपये के डीजल की होगी बर्बादी
Tue, 11 Mar 2025 11:46 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 11 Mar 2025 11:46 PM IST
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महोबा/कबरई। प्रदेश सरकार के रूट डायवर्जन के आदेश ने ट्रांसपोर्टरों की नींद उड़ा दी है। पत्थरमंडी कबरई में लखनऊ, कानपुर समेत विभिन्न जनपदों से गिट्टी लेने आने वाले ट्रकों का भाड़ा दोगुना हो गया है। पत्थरमंडी में प्रतिदिन 2,500 से तीन हजार ट्रक गिट्टी लेने आते हैं। रूट डायवर्जन से प्रतिदिन डेढ़ करोड़ रुपये के अतिरिक्त डीजल की बर्बादी हो रही है। साथ ही टोल टैक्स भी ढाई से तीन गुना अदा करना पड़ रहा है।
पत्थरमंडी कबरई में विभिन्न प्रांतों से ट्रक गिट्टी लेने पहुंचते हैं। यहां 150 क्रशर प्लांट और इतने ही पहाड़ संचालित हैं। प्रत्येक क्रशर प्लांट में प्रतिदिन करीब 20 ट्रक गिट्टी लेने आते हैं। औसतन ढाई से तीन हजार ट्रक प्रतिदिन गिट्टी की निकासी होती है।
रूट डायवर्जन लागू होने से लखनऊ और कानपुर की दूरी दोगुनी हो गई है। इससे प्रति ट्रक नौ हजार रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च हो रहा है। ऐसे में प्रतिदिन डेढ़ करोड़ रुपये के अतिरिक्त डीजल की खपत हो रही है। बढ़ी ट्रांसपोर्ट लागत का असर सीधे ग्रिट उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। न सिर्फ निर्माण कार्यों की लागत बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय कारोबार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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यूपी के अलावा कई प्रांतों में जाती है कबरई की गिट्टी
महोबा की पत्थरमंडी कबरई से विभिन्न प्रांतों में गिट्टी जाती है। यूपी के कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, प्रयागराज, फैजाबाद, कौशांबी, जौनपुर, प्रतापगढ़, आंबेडकरनगर के अलावा पूर्वांचल, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश व केरल में भी यहां की गिट्टी की मांग है।
चार दिन में घट गई ट्रकों की 50 फीसदी आमद
रूट डायवर्जन से पत्थरमंडी कबरई में सन्नाटा पसर गया है। पहले प्रतिदिन दो से ढाई हजार ट्रक आते थे। मंगलवार को इनकी संख्या 50 फीसदी से भी कम रह गई। एक हजार के आसपास ही ट्रक पत्थरमंडी आए। क्रशर उद्योग समिति के संरक्षक रामकिशोर सिंह ने बताया कि यदि रूट डायवर्जन का आदेश वापस नहीं हुआ तो पत्थरमंडी बंदी के कगार पर पहुंच जाएगी। चार दिन में ही पत्थरमंडी का कारोबार 50 फीसदी घट गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में और संकट पैदा होने की आशंका है। सैकड़ों श्रमिकों की रोजी-रोटी छिन जाएगी।
सीएम के निजी सचिव से मिले पदाधिकारी
क्रशर यूनियन के बालकिशोर द्विवेदी, सुलभ सक्सेना, रूपेंद्र सिंह आदि पदाधिकारियों ने मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी के निजी सचिव संजय प्रसाद से मुलाकात की। उन्होंने कबरई से कानुपर, लखनऊ के लिए किए गए रूट डायवर्जन से जिले के एकमात्र उद्योग के समाप्त होने की आशंका जताई। रूट डायवर्जन के नए आदेश को निरस्त करने की मांग की।
एक नजर में समझें रूट डायवर्जन से कितना बढ़ेगा खर्च
कबरई से कानपुर 18 चक्का ट्रक के गिट्टी ले जाने व आने का खर्च
हाईवे/एक्सप्रेसवे-कुल दूरी-कुल टोल टैक्स-डीजल खर्च-कुल खर्च-अतिरिक्त खर्च
हाईवे से हमीरपुर होकर-260 किमी-1,750 रुपये-7,712 रुपये-9,462 रुपये-शून्य
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से-500 किमी-4,300 रुपये-14,832 रुपये-19,132 रुपये-9,670 रुपये
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कबरई से लखनऊ 18 चक्का ट्रक के गिट्टी ले जाने व आने का खर्च
हाईवे/एक्सप्रेसवे-कुल दूरी-कुल टोल टैक्स-डीजल खर्च-कुल खर्च-अतिरिक्त खर्च
हाईवे से हमीरपुर होकर-440 किमी-3,200 रुपये-13,053 रुपये-16,253 रुपये-शून्य
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से-800 किमी-8,540 रुपये-23,733 रुपये-32,273 रुपये-16,020 रुपये
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ट्रक चालक व ट्रांसपोर्ट मालिक ने बताई समस्या
कबरई के ट्रांसपोर्टर मुईन खान का कहना है कि गिट्टी परिवहन में पत्थरमंडी से कानपुर, लखनऊ जाने में टोल टैक्स के साथ डीजल की अधिक खपत हो रही है। विभिन्न जनपदों की दूरी डेढ़ से दो गुनी हो जाने से नौ से 10 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।
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घाटमपुर निवासी ट्रक चालक सोनू कुमार कहते हैं कि हाईवे के बजाय एक्सप्रेसवे से गिट्टी परिवहन करने में अतिरिक्त डीजल व टोल खर्च के साथ समय भी बर्बाद हो रहा है। हाईवे से लखनऊ जाने में जहां छह घंटे लगते हैं, वहीं एक्सप्रेसवे से नौ घंटे का सफर तय करना पड़ रहा है। इससे ट्रकों के फेरों में भी कमी आ रही है।
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पत्थरमंडी कबरई में विभिन्न प्रांतों से ट्रक गिट्टी लेने पहुंचते हैं। यहां 150 क्रशर प्लांट और इतने ही पहाड़ संचालित हैं। प्रत्येक क्रशर प्लांट में प्रतिदिन करीब 20 ट्रक गिट्टी लेने आते हैं। औसतन ढाई से तीन हजार ट्रक प्रतिदिन गिट्टी की निकासी होती है।
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रूट डायवर्जन लागू होने से लखनऊ और कानपुर की दूरी दोगुनी हो गई है। इससे प्रति ट्रक नौ हजार रुपये का अतिरिक्त डीजल खर्च हो रहा है। ऐसे में प्रतिदिन डेढ़ करोड़ रुपये के अतिरिक्त डीजल की खपत हो रही है। बढ़ी ट्रांसपोर्ट लागत का असर सीधे ग्रिट उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। न सिर्फ निर्माण कार्यों की लागत बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय कारोबार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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यूपी के अलावा कई प्रांतों में जाती है कबरई की गिट्टी
महोबा की पत्थरमंडी कबरई से विभिन्न प्रांतों में गिट्टी जाती है। यूपी के कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, प्रयागराज, फैजाबाद, कौशांबी, जौनपुर, प्रतापगढ़, आंबेडकरनगर के अलावा पूर्वांचल, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश व केरल में भी यहां की गिट्टी की मांग है।
चार दिन में घट गई ट्रकों की 50 फीसदी आमद
रूट डायवर्जन से पत्थरमंडी कबरई में सन्नाटा पसर गया है। पहले प्रतिदिन दो से ढाई हजार ट्रक आते थे। मंगलवार को इनकी संख्या 50 फीसदी से भी कम रह गई। एक हजार के आसपास ही ट्रक पत्थरमंडी आए। क्रशर उद्योग समिति के संरक्षक रामकिशोर सिंह ने बताया कि यदि रूट डायवर्जन का आदेश वापस नहीं हुआ तो पत्थरमंडी बंदी के कगार पर पहुंच जाएगी। चार दिन में ही पत्थरमंडी का कारोबार 50 फीसदी घट गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में और संकट पैदा होने की आशंका है। सैकड़ों श्रमिकों की रोजी-रोटी छिन जाएगी।
सीएम के निजी सचिव से मिले पदाधिकारी
क्रशर यूनियन के बालकिशोर द्विवेदी, सुलभ सक्सेना, रूपेंद्र सिंह आदि पदाधिकारियों ने मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी के निजी सचिव संजय प्रसाद से मुलाकात की। उन्होंने कबरई से कानुपर, लखनऊ के लिए किए गए रूट डायवर्जन से जिले के एकमात्र उद्योग के समाप्त होने की आशंका जताई। रूट डायवर्जन के नए आदेश को निरस्त करने की मांग की।
एक नजर में समझें रूट डायवर्जन से कितना बढ़ेगा खर्च
कबरई से कानपुर 18 चक्का ट्रक के गिट्टी ले जाने व आने का खर्च
हाईवे/एक्सप्रेसवे-कुल दूरी-कुल टोल टैक्स-डीजल खर्च-कुल खर्च-अतिरिक्त खर्च
हाईवे से हमीरपुर होकर-260 किमी-1,750 रुपये-7,712 रुपये-9,462 रुपये-शून्य
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से-500 किमी-4,300 रुपये-14,832 रुपये-19,132 रुपये-9,670 रुपये
कबरई से लखनऊ 18 चक्का ट्रक के गिट्टी ले जाने व आने का खर्च
हाईवे/एक्सप्रेसवे-कुल दूरी-कुल टोल टैक्स-डीजल खर्च-कुल खर्च-अतिरिक्त खर्च
हाईवे से हमीरपुर होकर-440 किमी-3,200 रुपये-13,053 रुपये-16,253 रुपये-शून्य
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से-800 किमी-8,540 रुपये-23,733 रुपये-32,273 रुपये-16,020 रुपये
ट्रक चालक व ट्रांसपोर्ट मालिक ने बताई समस्या
कबरई के ट्रांसपोर्टर मुईन खान का कहना है कि गिट्टी परिवहन में पत्थरमंडी से कानपुर, लखनऊ जाने में टोल टैक्स के साथ डीजल की अधिक खपत हो रही है। विभिन्न जनपदों की दूरी डेढ़ से दो गुनी हो जाने से नौ से 10 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है।
घाटमपुर निवासी ट्रक चालक सोनू कुमार कहते हैं कि हाईवे के बजाय एक्सप्रेसवे से गिट्टी परिवहन करने में अतिरिक्त डीजल व टोल खर्च के साथ समय भी बर्बाद हो रहा है। हाईवे से लखनऊ जाने में जहां छह घंटे लगते हैं, वहीं एक्सप्रेसवे से नौ घंटे का सफर तय करना पड़ रहा है। इससे ट्रकों के फेरों में भी कमी आ रही है।