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Hamirpur News: महर्षि वाल्मीकि जयंती पर निकली शोभायात्रा
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फोटो 26 एमएएचपी 26 परिचय-शहर में निकलती शोभायात्रा में शामिल झांकियां। संवाद
महोबा/कबरई। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सोमवार को वाल्मीकि समाज संगठन के तत्वावधान में शहर और कस्बा कबरई में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में शामिल झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। कबरई संवाद के अनुसार निरंजन बाबा धाम धर्मशाला से शुरू हुई यात्रा सुभाष नगर, कुनेहटा तिराहा, मुख्य बाजार, बांदा तिराहा, आजाद नगर, शास्त्री नगर से होते हुए वापस धर्मशाला पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा में महिलाओं व युवाओं ने नृत्य किया जबकि अश्व नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। बाद में आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ. बाबूराम बादल ने शिक्षा और एकजुटता पर जोर दिया। संरक्षक मुकेश भारती ने अहंकार त्यागकर सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
वाल्मीकि जयंती पर बच्चों को बांटीं पुस्तकें
चरखारी (महोबा)। आंबेडकर पाठशाला शिक्षा सेवा संस्था की ओर से सोमवार को मोहल्ला खंदिया में संचालित निशुल्क पाठशाला व पुस्तकालय में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि जयति सिंह, डायरेक्टर इंद्रकुमार कुशवाहा व पवन गौतम ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्य अतिथि ने शिक्षा, संस्कार और समय का सदुपयोग करने पर जोर दिया। बताया कि हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। उनका बचपन का नाम रत्नाकर था। नारद ने उन्हें राम नाम जपने को कहा। वे इतने वर्षों तक तपस्या में लीन रहे कि उनके शरीर पर दीमक लग गए इसलिए वाल्मीकि नाम पड़ा। इस दौरान रामायण, रामचरितमानस पर आधारित श्लोक, चौपाई, कहानी व कविता में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। साथ ही बच्चों को उपहार में कॉपी, पठन-पाठ्य सामग्री वितरित की गईं। इस मौके पर आशीष कुमार, इच्छा, रागनी, नैतिक, अनुज आदि मौजूद रहे।
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वाल्मीकि जयंती पर बच्चों को बांटीं पुस्तकें
चरखारी (महोबा)। आंबेडकर पाठशाला शिक्षा सेवा संस्था की ओर से सोमवार को मोहल्ला खंदिया में संचालित निशुल्क पाठशाला व पुस्तकालय में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि जयति सिंह, डायरेक्टर इंद्रकुमार कुशवाहा व पवन गौतम ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्य अतिथि ने शिक्षा, संस्कार और समय का सदुपयोग करने पर जोर दिया। बताया कि हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। उनका बचपन का नाम रत्नाकर था। नारद ने उन्हें राम नाम जपने को कहा। वे इतने वर्षों तक तपस्या में लीन रहे कि उनके शरीर पर दीमक लग गए इसलिए वाल्मीकि नाम पड़ा। इस दौरान रामायण, रामचरितमानस पर आधारित श्लोक, चौपाई, कहानी व कविता में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। साथ ही बच्चों को उपहार में कॉपी, पठन-पाठ्य सामग्री वितरित की गईं। इस मौके पर आशीष कुमार, इच्छा, रागनी, नैतिक, अनुज आदि मौजूद रहे।
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