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मटर व लाही की फसलों पर कीटों का हमला
अमर उजाला ब्यूरो हमीरपुर।
Updated Fri, 23 Oct 2015 12:09 AM IST
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मौसम की बेरुखी के चलते किसानों की समस्या कम होती नहीं दिख रही है। अक्तूबर माह खत्म होने को है लेकिन तापमान 35 से 36 डिग्री से नीचे नहीं आ रहा है। कीटों के हमले से मटर व लाही की फसलें बर्बाद हो रही हैं। नवंबर माह में मौसम बदलते ही रबी फसल की बुआई होगी, लेकिन अधिकारी व कर्मचारी किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। समितियों में खाद की लिमिट तीन से चार गुना अधिक कर दी गई है। सहकारी समितियों ने अभी तक डीएपी की डिमांड इफ्को को नहीं दी है। जिसकारण इफ्को अधिकारी भी डिमांड के लिए समितियों का मुंह ताक रहे हैं।
मानसून के इंतजार में खरीफ की फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। चिंतित किसानों को रबी की फसलों से उम्मीद है। लेकिन यह उम्मीद धूमिल होती जा रही है। अक्तूबर माह में हर वर्ष तापमान में गिरावट होने लगती थी लेकिन इस बार सूरज के तेवर कम होते नहीं दिख रहे हैँ।
मौजूदा समय में तापमान 35-36 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है। मौसम की इस बेरुखी से किसान ऊहापोह में है। खेतों में पलेवा करने के तीन दिन बाद ही जमीन सूख जाती है। जबकि हर साल इन दिनों में दलहन की फसलों की बुआई का काम तेज हो जाता था।
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इसी को देखते हुए इस बार कुछ किसानों ने निजी नलकूपों से खेतों की सिंचाई कर सब्जी वाला मटर और लाही की बुआई कर दी, लेकिन बीज के अंकुरित होते ही कीड़े लग गए और फसल चौपट हो गई। ऐसे में खाद व बीज की आपूर्ति करने वाले विभागों के अधिकारी कर्मचारी भी सुस्त हैं। अभी तक डीएपी खाद की डिमांड समितियों ने नहीं दी है। अगले माह नवंबर में किसानों को खाद की जरूरत होगी और तब इन्हें इधर उधर भटकना पड़ेगा।
वहीं, खाद की किल्लत दूर करने में इफ्को जुटा है। बीते दिनों यूरिया की एक रैक महोबा आ चुकी है। जिसमें जिले को 1327 एमटी खाद मिल चुकी है। इफ्को के जिला प्रबंधक आरएस कटियार ने बताया कि गोदामों में 1400 एमटी डीएपी उपलब्ध है, लेकिन जैसे ही खाद की मांग बढ़ेगी, उपलब्ध खाद एक दिन में ही बंट जाएगी।
कहा कि डीएपी खाद डिमांड पर मंगवाई जाएगी। जैसे ही उनके पास 500 से 600 एमटी खाद के चेक आ जाते हैं, बिना देरी किए रैक मंगवा लेंगे। बताया कि निबंधक सहकारिता ने बीते 8 अक्तूबर को समितियों की लिमिट जारी की है। जिसमें इन समितियों की लिमिट तीन गुना तक बढ़ा दी गई है। वहीं, बकाया ऋण में अच्छी वसूली करने वाली सहकारी समितियों की लिमिट चार गुना कर दी गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समितियां खाद की डिमांड दे दें तो खाद की आपूर्ति में दिक्कत नहीं आएगी।
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मानसून के इंतजार में खरीफ की फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। चिंतित किसानों को रबी की फसलों से उम्मीद है। लेकिन यह उम्मीद धूमिल होती जा रही है। अक्तूबर माह में हर वर्ष तापमान में गिरावट होने लगती थी लेकिन इस बार सूरज के तेवर कम होते नहीं दिख रहे हैँ।
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मौजूदा समय में तापमान 35-36 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है। मौसम की इस बेरुखी से किसान ऊहापोह में है। खेतों में पलेवा करने के तीन दिन बाद ही जमीन सूख जाती है। जबकि हर साल इन दिनों में दलहन की फसलों की बुआई का काम तेज हो जाता था।
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इसी को देखते हुए इस बार कुछ किसानों ने निजी नलकूपों से खेतों की सिंचाई कर सब्जी वाला मटर और लाही की बुआई कर दी, लेकिन बीज के अंकुरित होते ही कीड़े लग गए और फसल चौपट हो गई। ऐसे में खाद व बीज की आपूर्ति करने वाले विभागों के अधिकारी कर्मचारी भी सुस्त हैं। अभी तक डीएपी खाद की डिमांड समितियों ने नहीं दी है। अगले माह नवंबर में किसानों को खाद की जरूरत होगी और तब इन्हें इधर उधर भटकना पड़ेगा।
वहीं, खाद की किल्लत दूर करने में इफ्को जुटा है। बीते दिनों यूरिया की एक रैक महोबा आ चुकी है। जिसमें जिले को 1327 एमटी खाद मिल चुकी है। इफ्को के जिला प्रबंधक आरएस कटियार ने बताया कि गोदामों में 1400 एमटी डीएपी उपलब्ध है, लेकिन जैसे ही खाद की मांग बढ़ेगी, उपलब्ध खाद एक दिन में ही बंट जाएगी।
कहा कि डीएपी खाद डिमांड पर मंगवाई जाएगी। जैसे ही उनके पास 500 से 600 एमटी खाद के चेक आ जाते हैं, बिना देरी किए रैक मंगवा लेंगे। बताया कि निबंधक सहकारिता ने बीते 8 अक्तूबर को समितियों की लिमिट जारी की है। जिसमें इन समितियों की लिमिट तीन गुना तक बढ़ा दी गई है। वहीं, बकाया ऋण में अच्छी वसूली करने वाली सहकारी समितियों की लिमिट चार गुना कर दी गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समितियां खाद की डिमांड दे दें तो खाद की आपूर्ति में दिक्कत नहीं आएगी।