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Hamirpur News: 14 बीघा में 40 किलो पैदा हुआ तिल, कैसे भरें बैंकों का कर्ज
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फोटो 09 एचएएमपी 15- शिवम सिंह।
हमीरपुर। बीते सितंबर माह तक हुई मूसलाधार बारिश से अन्नदाता पर मुसीबतों की बाढ़ आ गई है। सबसे अधिक तिल की फसलों का नुकसान हुआ है। किसानों के अनुसार, 14 बीघा खेत में मात्र 40 किलो तिल का उत्पादन हुआ है। ऐसे में उनका बैंक कर्ज कैसे चुकता हो पाएगा।
जिले के 1.86 लाख से अधिक किसानों ने अपनी खरीफ फसलों का बीमा कराया है। इनमें एक लाख 58 हजार 627 ऋणी और 27,404 गैर ऋणी किसान शामिल हैं। किसानों ने कुल 3.58 करोड़ रुपये प्रीमियम जमा किया है, वहीं राज्य व केंद्र सरकार का मिलाकर कुल 23.56 करोड़ रुपये प्रीमियम संबंधित बीमा कंपनी ने जमा कराया है।
सितंबर माह में हुई मूसलाधार बारिश के कारण सबसे अधिक 95 हजार हेक्टेयर में लगाई गई तिल की फसल को भारी नुकसान हुआ है। अब तक कुल 40,446 किसानों ने फसल क्षतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी को दावे किए हैं। इनमें करीब 32 हजार किसानों के सर्वे कराए जाने का दावा किया जा रहा है। जबकि अभी भी आठ हजार किसानों का सर्वे कार्य शेष है। किसानोंं का दावा है कि जलभराव व अतिवृष्टि से तिल की 70 से 80 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। शासन-प्रशासन से संतोषजनक सर्वे कार्य न होने के कारण किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।
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1.92 लाख हेक्टेयर में बोई खरीफ फसलें
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1,92,448 हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई गई हैं। इनमें 95,590 हेक्टेयर तिल, 8,010 हेक्टेयर उड़द और 11,487 हेक्टेयर मूंग की फसल बोई गई है। लगातार बारिश और जलभराव से तिल, मूंग, मूंगफली और उड़द की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
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सितंबर माह में 450 एमएम हुई बारिश
वर्ष 2024 में सितंबर माह में कुल 307.66 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। साल 2025 में मात्र 141.53 एमएम बारिश हुई थी, वहीं इस वित्तीय वर्ष सितंबर माह में अब तक करीब 450 एमएम से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इससे किसानों की मेहनत में पानी फेर दिया है।
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पिछले खरीफ सीजन में 41.72 करोड़ मिली थी क्षतिपूर्ति
वर्ष 2025 खरीफ सीजन में 1,88,751 किसानों ने फसल बीमा कराया था। इनमें 1,69,220 ऋणी और 19,531 गैर ऋणी किसान शामिल थे। बारिश व अतिवृष्टि के चलते 11,808 किसानों ने व्यक्तिगत दावे किए थे। इनमें 11,518 किसानों को 4.91 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति बीमा कंपनी ने दी थी। इसके अलावा क्रॉप कटिंग के अनुसार 29,400 किसानों को बाद में 36.81 करोड़ रुपये का और भुगतान किया गया था। इससे कुल 41.72 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई थी।
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प्रति बीघा एक क्विंटल तिल का उत्पादन
जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर के अनुसार जिले में प्रति बीघा तिल का उत्पादन एक क्विंटल है। प्रति हेक्टेयर 5-6 क्विंटल तिल की औसत उपज होनी चाहिए। इसी प्रकार प्रति बीघा मूंग और उड़द की औसत उपज एक से डेढ़ क्विंटल है। क्रॉप कटिंग के आधार पर आंकलन कर किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाई जाएगी।
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प्रति बीघा और प्रति हेक्टेयर औसत उपज
फसल - प्रति बीघा - प्रति हेक्टेयर
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तिल - एक क्विंटल - 5-6 क्विंटल
मूंग - एक से सवा क्विंटल - 6-7 क्विंटल
उड़द - एक से डेढ़ क्विंटल - 7-8 क्विंटल
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फोटो 09 एचएएमपी 15- शिवम सिंह।
केसीसी एनपीए, नहीं कराया बीमा
बैंक से 90 हजार रुपये का केसीसी बना है, लेकिन वह भी एनपीए हो गया है। इसके चलते फसल बीमा नहीं करा सका। 14 बीघा में तिल की फसल बोई थी, जिसमें 40 किलो उपज निकली है। जिला प्रशासन द्वारा अभी तक सर्वे नहीं कराया गया है। ऐसे में बैंक का कैसे कर्ज भरें। - शिवम सिंह, जखेला।
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फोटो 09 एचएएमपी 16- मो. अहमद।
पूरी फसल खराब हो गई, नहीं हुआ सर्वे
चार बीघा खेत में तिल की फसल बोई थी। बारिश के कारण पूरी फसल खराब हो गई। कोई भी मजदूर बटाई को काटने को तैयार नहीं था। इससे खेत की जुताई करा दी है। अभी तक कोई सर्वे नहीं हुआ है। 1.80 लाख रुपये का किसान कार्ड बना है। बैंक का कर्ज कैसे चुकता होगा, यही चिंता सता रही है। - मो. अहमद, गुसियारी।
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वर्जन:
अब तक करीब 40 हजार से अधिक दावे प्राप्त हुए हैं। इनमें 32 हजार दावों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। अगले सप्ताह सर्वे कार्य पूरा करा लिया जाएगा। किसानों को जल्द क्षतिपूर्ति दिलाए जाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. प्रमोद कुमार, कृषि उप निदेशक
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वर्जन:
फसल सर्वे कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। करीब 35 हजार किसानों का सर्वे कार्य हो चुका है। फीडिंग का कार्य चल रहा है। आगामी 3-4 दिनों में सर्वे कार्य पूरा करा लिया जाएगा। साथ ही क्रॉप कटिंग भी की जा रही है। - राकेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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जिले के 1.86 लाख से अधिक किसानों ने अपनी खरीफ फसलों का बीमा कराया है। इनमें एक लाख 58 हजार 627 ऋणी और 27,404 गैर ऋणी किसान शामिल हैं। किसानों ने कुल 3.58 करोड़ रुपये प्रीमियम जमा किया है, वहीं राज्य व केंद्र सरकार का मिलाकर कुल 23.56 करोड़ रुपये प्रीमियम संबंधित बीमा कंपनी ने जमा कराया है।
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सितंबर माह में हुई मूसलाधार बारिश के कारण सबसे अधिक 95 हजार हेक्टेयर में लगाई गई तिल की फसल को भारी नुकसान हुआ है। अब तक कुल 40,446 किसानों ने फसल क्षतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी को दावे किए हैं। इनमें करीब 32 हजार किसानों के सर्वे कराए जाने का दावा किया जा रहा है। जबकि अभी भी आठ हजार किसानों का सर्वे कार्य शेष है। किसानोंं का दावा है कि जलभराव व अतिवृष्टि से तिल की 70 से 80 फीसदी फसल प्रभावित हुई है। शासन-प्रशासन से संतोषजनक सर्वे कार्य न होने के कारण किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।
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1.92 लाख हेक्टेयर में बोई खरीफ फसलें
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1,92,448 हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई गई हैं। इनमें 95,590 हेक्टेयर तिल, 8,010 हेक्टेयर उड़द और 11,487 हेक्टेयर मूंग की फसल बोई गई है। लगातार बारिश और जलभराव से तिल, मूंग, मूंगफली और उड़द की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
सितंबर माह में 450 एमएम हुई बारिश
वर्ष 2024 में सितंबर माह में कुल 307.66 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। साल 2025 में मात्र 141.53 एमएम बारिश हुई थी, वहीं इस वित्तीय वर्ष सितंबर माह में अब तक करीब 450 एमएम से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इससे किसानों की मेहनत में पानी फेर दिया है।
पिछले खरीफ सीजन में 41.72 करोड़ मिली थी क्षतिपूर्ति
वर्ष 2025 खरीफ सीजन में 1,88,751 किसानों ने फसल बीमा कराया था। इनमें 1,69,220 ऋणी और 19,531 गैर ऋणी किसान शामिल थे। बारिश व अतिवृष्टि के चलते 11,808 किसानों ने व्यक्तिगत दावे किए थे। इनमें 11,518 किसानों को 4.91 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति बीमा कंपनी ने दी थी। इसके अलावा क्रॉप कटिंग के अनुसार 29,400 किसानों को बाद में 36.81 करोड़ रुपये का और भुगतान किया गया था। इससे कुल 41.72 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई थी।
प्रति बीघा एक क्विंटल तिल का उत्पादन
जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर के अनुसार जिले में प्रति बीघा तिल का उत्पादन एक क्विंटल है। प्रति हेक्टेयर 5-6 क्विंटल तिल की औसत उपज होनी चाहिए। इसी प्रकार प्रति बीघा मूंग और उड़द की औसत उपज एक से डेढ़ क्विंटल है। क्रॉप कटिंग के आधार पर आंकलन कर किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाई जाएगी।
प्रति बीघा और प्रति हेक्टेयर औसत उपज
फसल - प्रति बीघा - प्रति हेक्टेयर
तिल - एक क्विंटल - 5-6 क्विंटल
मूंग - एक से सवा क्विंटल - 6-7 क्विंटल
उड़द - एक से डेढ़ क्विंटल - 7-8 क्विंटल
फोटो 09 एचएएमपी 15- शिवम सिंह।
केसीसी एनपीए, नहीं कराया बीमा
बैंक से 90 हजार रुपये का केसीसी बना है, लेकिन वह भी एनपीए हो गया है। इसके चलते फसल बीमा नहीं करा सका। 14 बीघा में तिल की फसल बोई थी, जिसमें 40 किलो उपज निकली है। जिला प्रशासन द्वारा अभी तक सर्वे नहीं कराया गया है। ऐसे में बैंक का कैसे कर्ज भरें। - शिवम सिंह, जखेला।
फोटो 09 एचएएमपी 16- मो. अहमद।
पूरी फसल खराब हो गई, नहीं हुआ सर्वे
चार बीघा खेत में तिल की फसल बोई थी। बारिश के कारण पूरी फसल खराब हो गई। कोई भी मजदूर बटाई को काटने को तैयार नहीं था। इससे खेत की जुताई करा दी है। अभी तक कोई सर्वे नहीं हुआ है। 1.80 लाख रुपये का किसान कार्ड बना है। बैंक का कर्ज कैसे चुकता होगा, यही चिंता सता रही है। - मो. अहमद, गुसियारी।
वर्जन:
अब तक करीब 40 हजार से अधिक दावे प्राप्त हुए हैं। इनमें 32 हजार दावों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। अगले सप्ताह सर्वे कार्य पूरा करा लिया जाएगा। किसानों को जल्द क्षतिपूर्ति दिलाए जाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. प्रमोद कुमार, कृषि उप निदेशक
वर्जन:
फसल सर्वे कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। करीब 35 हजार किसानों का सर्वे कार्य हो चुका है। फीडिंग का कार्य चल रहा है। आगामी 3-4 दिनों में सर्वे कार्य पूरा करा लिया जाएगा। साथ ही क्रॉप कटिंग भी की जा रही है। - राकेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व

फोटो 09 एचएएमपी 15- शिवम सिंह।

फोटो 09 एचएएमपी 15- शिवम सिंह।