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नवजात को तालाब किनारे फेंका, मिली ममता की छांव
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:12 AM IST
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सरीला सीएचसी में नवजात को गोद लिए महिला।
- फोटो : Amar ujala
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जलालपुर थानाक्षेत्र के ममना गांव में लोकलाज के भय से एक कलयुगी मां ने नवजात को कपड़े व पॉलीथिन में लपेटकर तालाब के पास छोड़ दिया। लेकिन उस नवजात को मां का आंचल व पिता का साया नसीब हो गया। नवजात को एक मजदूर दंपति ने अपना लिया है। बच्चा पूर्ण स्वस्थ्य है। फिलहाल उसकी देखरेख सीएचसी सरीला में की जा रही है।
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ममना गांव का बहादुर अहिरवार (55) गुरुवार तड़के गांव के डडैंका तालाब किनारे शौच के लिए जा रहा था। तभी अचानक उसे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। उसने पास में पड़े टीवी कवर को खोलकर देखा तो कपड़ों में लिपटा एक नवजात रोता मिला। बच्चे को देखकर उसे अपनी छाती से लगा लिया और ग्रामीणों को सूचना देकर शादी के 30 वर्ष बाद भी सूनी पड़ी पत्नी प्रेमरानी की गोद में दे दिया। आनन-फानन में उसे सीएचसी सरीला लाया गया। जहां चिकित्सकाें ने बच्चे को पूर्ण स्वस्थ्य बताया। सीएचसी सरीला के प्रभारी डा. आरके कटियार ने बताया कि नवजात लड़का कम दिन का है। फिर भी पूर्ण स्वस्थ्य है।
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फिलहाल उसकी देखरेख की जा रही है। बहादुर अहिरवार ने बताया कि वह बेऔलाद था। शायद भगवान को 30 साल बाद उस पर तरस आया है और बुढ़ापे का सहारा दिया है। वह मेहनत मजदूरी करता है। वह बच्चे का पालन पोषण बेहतर ढंग से करेगा और पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाएगा। पत्नी भी खुश है। वह रूंधे गले व आंचल फैलाकर भगवान का धन्यवाद करते थक नहीं रही है। बच्चे को देखने वालों का सीएचसी में जमावड़ा लगा है।
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किसी भी लावारिस शिशु के मिलने की सूचना पहले पुलिस को दें
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रामगोपाल ने नवजात शिशुओं के मिलने व उनकी सुरक्षा के बारे में बताया कि जिस स्थान पर ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं, उसकी सूचना पुलिस को सूचना देनी चाहिए। इसके बाद पुलिस उस मामले को थाने में बतौर सूचना दर्ज करे। क्षेत्र के आशा या दाई का सहयोग लेकर पुलिस उस नवजात शिशु का सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराऐ।
इसके बाद अस्पताल से नवजात के स्वस्थ्य होने का स्वास्थ्य प्रमाण जारी होने के बाद पुलिस बाल कल्याण समिति से संपर्क करेगी। जिस पर समिति के सदस्य कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद नवजात को रनिया कानपुर स्थित बाल शिशु भवन ले जाएगी। नवजात के दावे के लिए यदि कोई व्यक्ति बाल शिशु भवन नहीं आता है तो उस नवजात शिशु को स्वतंत्र घोषित कर दिया जाता है। बच्चे को गोद लेने के लिए जरूरी कार्रवाई को पूरा करना होता है। इसकी जानकारी बाल शिशु भवन के अधिकारियों से ली जा सकती है।