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संक्रामक बीमारियों का कहर, हर घर में बुखार पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Sun, 28 Aug 2016 11:36 PM IST
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सरीला सीएचसी में मरीजोें का इलाज करते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला
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संक्रामक बीमारियों का कहर, हर घर में बुखार पीड़ित
सरीला (हमीरपुर)। बारिश में संक्रामक बीमारियां जोर पकड़े हैं। ग्रामीण अंचलों में लगभग हर में वायरल, चिकनगुनिया, डेंगू बुखार के बीमार हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी इस पर काबू पाने में पसीना छूट रहा है। गांवों में सरकारी डाक्टरों के पहुंचने के बाद भी प्राइवेट डाक्टरों की चांदी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय टीमें गांव में इलाज के नाम पर औपचारिकताएं निभा रही हैं। कुछ गांवों का हाल।
गांव खेड़ाशिलाजीत-इस गांव में हर घर में दो चार मरीज बुखार से पीड़ित हैं। आशारानी (65), विनीता (34), बरदानी (35), दयारानी (28), पलक (12), कपिल (14), भगवती (60), सुरेंद्र (27), मयंक (7), चंदा (60), कृष्णा (10), प्रज्ञा (12), तपस्या (13), नरेश (23) आदि को बुखार है। गांव के मनोज, रामस्वरूप, रमेश चौधरी, रामप्रकाश प्रधान ने बताया कि कई बार इसकी सूचना सीएचसी सरीला को दी गई है। बुखार का प्रकोप एक माह से है। केवल 23 अगस्त को विभाग की टीम यहां आई थी और कुछ लोगों का इलाज कर औपचारिकता निभाकर चली गई।
बंधौली गांव-इस गांव में भी वायरल बुखार का प्रकोप चरम पर है। एक माह से फैले बुखार की चपेट में अभी भी दर्जनों लोग हैं। लक्ष्मी (42), जमुना (45), संगीत (19), मिलन (10), मोहित (18), हरिदास (38) आदि लोग बुखार से चारपाई पकड़े हैं। गांव के रामबाबू, केशव प्रधान, राजकुमार, दिलीप, रामसहाय फौजी आदि ने बताया कि सीएचसी सरीला में कई बार सूचना दी है। लेकिन स्वास्थ्य टीम नहीं आई है। गांव में बुखार के प्रकोप से लोग डरे हुए हैं।
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भेड़ी डांडा-गांव के हालात भी काफी गंभीर हैं। बीते दो दिन पूर्व एक बालिका की मौत हो चुकी है। शालिनी (20), अजय (35), गोमती (30), वंदना (18), रोहित (16), अमन (12), रामकली (55), शिवकली ( 23), चंदारानी (35), कल्लू (40), राजाभैया (15), कृष्ण कुमार (8) सहित एक सैकड़ा से अधिक लोग बुखार की चपेट में है। ग्राम प्रधान अरूण द्विवेदी ने बताया कि गांव में बुखार का भीषण प्रकोप चल रहा है। शनिवार को विभागीय टीम ने यहां आकर बुखार पीड़ितों का इलाज किया। लेकिन हालात अभी भी काबू में नहीं है।
दिन में बरतें सावधानी
डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है। इसलिए दिन में विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है। मकान के इर्द-गिर्द पानी जमा न होने दें, जलभराव वाली जगह में मिट्टी का तेल, डीजल का छिड़काव करने से लार्वा नष्ट हो जाते हैं।
ये हैं लक्षण
बुखार आना, सिर व हाथ पैरों में दर्द, शरीर पर चकत्ते पड़ना, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, चक्कर आना, कमजोरी लगना।
न जमा होने दें पानी
साफ पानी ढककर रखें। छत व घर के आसपास पानी जमा न होने दें। फुल आस्तीन की शर्ट पहनें। बच्चों को फुल आस्तीन के कपडे़ जूते मोजे पहनाएं।
सीएचसी सरीला के एमओआईसी डा.अशोक का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी की वजह से बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है। ग्राम प्रधान व खुद ग्रामीण साफ सफाई पर ध्यान दें। सूचना मिलते ही गांव में डाक्टरो की टीम भेजकर इलाज कराया जा रहा है। शनिवार को भेड़ी व कुपरा में कैंप लगाया जा चुका है। मरीज की हालत खराब होने पर परिजन 108 व 102 एंबुलेंस को फोन करें।
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सरीला (हमीरपुर)। बारिश में संक्रामक बीमारियां जोर पकड़े हैं। ग्रामीण अंचलों में लगभग हर में वायरल, चिकनगुनिया, डेंगू बुखार के बीमार हैं। स्वास्थ्य विभाग को भी इस पर काबू पाने में पसीना छूट रहा है। गांवों में सरकारी डाक्टरों के पहुंचने के बाद भी प्राइवेट डाक्टरों की चांदी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय टीमें गांव में इलाज के नाम पर औपचारिकताएं निभा रही हैं। कुछ गांवों का हाल।
गांव खेड़ाशिलाजीत-इस गांव में हर घर में दो चार मरीज बुखार से पीड़ित हैं। आशारानी (65), विनीता (34), बरदानी (35), दयारानी (28), पलक (12), कपिल (14), भगवती (60), सुरेंद्र (27), मयंक (7), चंदा (60), कृष्णा (10), प्रज्ञा (12), तपस्या (13), नरेश (23) आदि को बुखार है। गांव के मनोज, रामस्वरूप, रमेश चौधरी, रामप्रकाश प्रधान ने बताया कि कई बार इसकी सूचना सीएचसी सरीला को दी गई है। बुखार का प्रकोप एक माह से है। केवल 23 अगस्त को विभाग की टीम यहां आई थी और कुछ लोगों का इलाज कर औपचारिकता निभाकर चली गई।
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बंधौली गांव-इस गांव में भी वायरल बुखार का प्रकोप चरम पर है। एक माह से फैले बुखार की चपेट में अभी भी दर्जनों लोग हैं। लक्ष्मी (42), जमुना (45), संगीत (19), मिलन (10), मोहित (18), हरिदास (38) आदि लोग बुखार से चारपाई पकड़े हैं। गांव के रामबाबू, केशव प्रधान, राजकुमार, दिलीप, रामसहाय फौजी आदि ने बताया कि सीएचसी सरीला में कई बार सूचना दी है। लेकिन स्वास्थ्य टीम नहीं आई है। गांव में बुखार के प्रकोप से लोग डरे हुए हैं।
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भेड़ी डांडा-गांव के हालात भी काफी गंभीर हैं। बीते दो दिन पूर्व एक बालिका की मौत हो चुकी है। शालिनी (20), अजय (35), गोमती (30), वंदना (18), रोहित (16), अमन (12), रामकली (55), शिवकली ( 23), चंदारानी (35), कल्लू (40), राजाभैया (15), कृष्ण कुमार (8) सहित एक सैकड़ा से अधिक लोग बुखार की चपेट में है। ग्राम प्रधान अरूण द्विवेदी ने बताया कि गांव में बुखार का भीषण प्रकोप चल रहा है। शनिवार को विभागीय टीम ने यहां आकर बुखार पीड़ितों का इलाज किया। लेकिन हालात अभी भी काबू में नहीं है।
दिन में बरतें सावधानी
डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है। इसलिए दिन में विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है। मकान के इर्द-गिर्द पानी जमा न होने दें, जलभराव वाली जगह में मिट्टी का तेल, डीजल का छिड़काव करने से लार्वा नष्ट हो जाते हैं।
ये हैं लक्षण
बुखार आना, सिर व हाथ पैरों में दर्द, शरीर पर चकत्ते पड़ना, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, चक्कर आना, कमजोरी लगना।
न जमा होने दें पानी
साफ पानी ढककर रखें। छत व घर के आसपास पानी जमा न होने दें। फुल आस्तीन की शर्ट पहनें। बच्चों को फुल आस्तीन के कपडे़ जूते मोजे पहनाएं।
सीएचसी सरीला के एमओआईसी डा.अशोक का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी की वजह से बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है। ग्राम प्रधान व खुद ग्रामीण साफ सफाई पर ध्यान दें। सूचना मिलते ही गांव में डाक्टरो की टीम भेजकर इलाज कराया जा रहा है। शनिवार को भेड़ी व कुपरा में कैंप लगाया जा चुका है। मरीज की हालत खराब होने पर परिजन 108 व 102 एंबुलेंस को फोन करें।