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तिलहनी व दलहनी फसलों में हो सकता है नुकसान
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हमीरपुर। दो दिन से हो रही बारिश ने ठंड बढ़ा दी है। जीव जंतु भी परेशान हैं। मौसम विभाग ने इन दो दिनों में 25 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की है। इससे तिलहनी और दलहनी फसलों में नुकसान की संभावना बढ़ गई है। सरसों की फसल खेत में बिछ गई है और अरहर व मटर आदि के फूल खराब हो गए। इधर, मौसम के चलते अधिकतम तापमान 17 डिग्री तो न्यूनतम 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
इधर दो दिनों से खराब मौसम के चलते सूर्य देव के दर्शन लोगों को दुर्लभ रहे। कानपुर सागर टू लेन हाईवे में तमाम वाहन लाइट जलाकर धीमी गति से जाते दिखे। कोहरे व धुंध के चलते लोग घरों में दुबकने को मजबूर हुए। सुमेरपुर प्रतिनिधि के अनुसार किसान राधेश्याम तिवारी, सुरेश यादव, दुलीचंद विश्वकर्मा, राजाराम अनुरागी, गोपी श्याम द्विवेदी आदि ने बताया कि अभी तक हुई बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं है। यदि और बारिश होती है तो गेहूं के अलावा अन्य फसलों में नुकसान होगा। उधर, बारिश के साथ ठंड बढ़ने से गरीबों के सामने मुसीबतें खड़ी हो गई हैं, उन्हें जलाने के लिए सूखी लकड़ी नहीं मिल रही है।
मौदहा प्रतिनिधि के अनुसार नगर के किसान हाजी गुलाम का कहना है कि उन्होंने छह एकड़ में सरसों की फसल कानपुर से बीज लाकर बड़ी मेहनत से तैयार की है। वह बारिश के चलते बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। अरतरा के किसान लक्ष्मी वर्मा व नारायण बाबू ने भी इस वर्षा व तेज हवाएं चलने से अपनी सरसों की फसल खराब होने की संभावना जताई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सरस कुमार तिवारी का कहना है कि मौसम खुलते ही सरसों की फसल खेतों में खड़ी हो जाएगी, फिलहाल इतने पानी से फसलों के नुकसान की संभावनाएं नहीं है।
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इधर दो दिनों से खराब मौसम के चलते सूर्य देव के दर्शन लोगों को दुर्लभ रहे। कानपुर सागर टू लेन हाईवे में तमाम वाहन लाइट जलाकर धीमी गति से जाते दिखे। कोहरे व धुंध के चलते लोग घरों में दुबकने को मजबूर हुए। सुमेरपुर प्रतिनिधि के अनुसार किसान राधेश्याम तिवारी, सुरेश यादव, दुलीचंद विश्वकर्मा, राजाराम अनुरागी, गोपी श्याम द्विवेदी आदि ने बताया कि अभी तक हुई बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं है। यदि और बारिश होती है तो गेहूं के अलावा अन्य फसलों में नुकसान होगा। उधर, बारिश के साथ ठंड बढ़ने से गरीबों के सामने मुसीबतें खड़ी हो गई हैं, उन्हें जलाने के लिए सूखी लकड़ी नहीं मिल रही है।
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मौदहा प्रतिनिधि के अनुसार नगर के किसान हाजी गुलाम का कहना है कि उन्होंने छह एकड़ में सरसों की फसल कानपुर से बीज लाकर बड़ी मेहनत से तैयार की है। वह बारिश के चलते बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। अरतरा के किसान लक्ष्मी वर्मा व नारायण बाबू ने भी इस वर्षा व तेज हवाएं चलने से अपनी सरसों की फसल खराब होने की संभावना जताई है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सरस कुमार तिवारी का कहना है कि मौसम खुलते ही सरसों की फसल खेतों में खड़ी हो जाएगी, फिलहाल इतने पानी से फसलों के नुकसान की संभावनाएं नहीं है।
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