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रोजगार की गारंटी, नसीब नहीं ‘रोटी’
अमर उजाला ब्यूरो/हमीरपुर
Updated Sat, 09 Apr 2016 12:03 AM IST
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मौदहा क्षेत्र के सिसोलर गांव के मकानों में पड़े ताले।
- फोटो : अमर उजाला
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सूखे की चपेट में आए किसान मजदूरों को जीविका देने के लिए चलाई गई मनरेगा भी काम न आ सकी। मौजूदा समय में योजना पूरी तरह फ्लाप है। ब्लाक क्षेत्र में करीब 12 हजार मजदूराें का दो करोड़ रुपया फंसा है। इसके चलते मजदूरों के सामने चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि मजदूर परदेश पलायन कर रहे हैं। अमर उजाला टीम सिसोली गांव पहुंची तो इस हकीकत का पता चला।
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विकासखंड क्षेत्र में 66 ग्राम पंचायत हैं। सूखे के मद्देनजर प्रशासन ने चंद्रावल नदी बचाओ के नाम पर मनरेगा से काम शुरू कराया। साथ ही गांवों में संपर्क मार्ग, बंधी निर्माण सहित अन्य कार्य भी युद्ध स्तर पर शुरू कराए। लेकिन जिस गति से कार्य शुरू हुआ, मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ। 21 जनवरी 2016 से मनरेगा का बजट ही खत्म है। खाने के लाले पड़ने पर मनरेगा श्रमिकों ने पलायन करना शुरू कर दिया। हाल ये है कि पूरे विकासखंड के किसी भी पंचायत में मनरेगा कार्य नहीं हो रहा है। रोजगार गारंटी की ये योजना भी भूखे पेट रहने वाले मजदूरों को दो जून की रोटी नहीं मुहैया करा पा रही है। सिसोलर गांव में मजदूरों की बस्ती में सन्नाटा छाया है।
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