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1984 के बाद सदर सीट में ब्राह्मण नहीं बन सके विधायक

Tue, 15 Feb 2022 11:43 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 11:43 PM IST
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For 38 years, Brahmin did not feel Vijay Tilak
भरुआसुमेरपुर। जिस हमीरपुर विधानसभा सीट पर कभी ब्राह्मण नेताओं का एकछत्र राज था वहां पिछले 38 वर्षों में जनता ने किसी ब्राह्मण नेता के माथे पर विजय का तिलक नहीं लगाया। पिछले 10 चुनावों मेें ठाकुर और पिछड़े वर्ग के नेता ही विधायक बनते आ रहे हैं। इस बार भी प्रमुख दलों ने पिछड़े वर्ग और ठाकुर बिरादरी से ही प्रत्याशी उतारे हैं।
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1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में हमीरपुर सीट पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुरेंद्र दत्त बाजपेयी विधायक चुने गए थे। वह लगातार तीन बार चुनाव जीते। इसके बाद ब्राह्मण समाज के बजरंग बली ब्रह्मचारी, प्रताप नारायण, ओमकार नाथ और जगदीश नारायण को जनता ने विधायक बनाया।
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1989 से हमीरपुर सीट पर राजनीतिक लड़ाई ठाकुरों और पिछडे़ वर्ग के नेताओं के बीच सिमट गई और ब्राह्मण नेता हाशिये पर चले गए। 1989, 1993, 2007 और 2017 में अशोक चंदेल विधायक चुने गए। 1991, 1996, 2002, 2014 (उपचुनाव) में शिव चरण प्रजापति और 2012 में साध्वी निरंजन ज्योति विधायक चुनी र्गईं। 2019 के उपचुनाव में जनता ठाकुर युवराज सिंह को विधायक बनाया। इस बार भी भाजपा, सपा और बसपा ने पिछड़े वर्ग के नेताओं पर दांव लगाया है जबकि कांग्रेेस ने अशोक चंदेल की पत्नी राजकुमारी सिंह को टिकट दिया है। जन अधिकार पार्टी से विजय द्विवेदी एडवोकेट मैदान में हैं।
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1984 के बाद कई बार ब्राह्मण समाज के नेता चुनाव मैदान में उतरे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। कांग्रेस से जगदीश नारायण शर्मा, भाजपा से जगदीश प्रसाद व्यास, वर्ष 2017 में बसपा से संजय दीक्षित चुनाव लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली।
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