{"_id":"5fb6b0848ebc3e9b9575e80c","slug":"cultural-hamirpur-news-knp595063292","type":"story","status":"publish","title_hn":"खरना के साथ छठ महापर्व का उपवास शुरू, गुरुवार को उगते चांद को दिया दूध व खीर का अर्घ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खरना के साथ छठ महापर्व का उपवास शुरू, गुरुवार को उगते चांद को दिया दूध व खीर का अर्घ्य
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भरुआसुमेरपुर। कस्बे में रह रहे बिहार प्रांत के आधा सैकड़ा परिवारों ने छठ महापर्व पर गुरुवार को खरना करते हुए निर्जला व्रत का शुभारंभ कर शाम को उगते चंद्र को अर्घ्य देकर 36 घंटे के व्रत का शुभारंभ किया।
छठ महापर्व की बिहार प्रांत में धूम रहती है। इसको प्रत्येक बिहारी परिवार श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाते हैं। गुरुवार को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू कर शाम को उगते हुए चांद को अर्घ्य देकर दूध एवं गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण किया। शुक्रवार को सभी परिवार कस्बे के गायत्री तपोभूमि के गायत्री गंगा घाट पर एकत्र होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे।
शनिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे तक चलने वाले व्रत का पारण करेंगे। बिहार प्रांत के निवासी गायत्री विद्या मंदिर इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डा. अरुण कुमार मिश्रा ने बताया यह महापर्व चार दिन तक मनाया जाता है। 36 घंटे का व्रत इस महापर्व का मुख्य अंग है। ज्यादातर महिलाएं सुख-समृद्धि, पुत्रों की दीर्घायु आदि की कामना के साथ अखंड सौभाग्यवती रहने के लिए इस व्रत को करती हैं।
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छठ महापर्व की बिहार प्रांत में धूम रहती है। इसको प्रत्येक बिहारी परिवार श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाते हैं। गुरुवार को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू कर शाम को उगते हुए चांद को अर्घ्य देकर दूध एवं गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण किया। शुक्रवार को सभी परिवार कस्बे के गायत्री तपोभूमि के गायत्री गंगा घाट पर एकत्र होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे।
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शनिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे तक चलने वाले व्रत का पारण करेंगे। बिहार प्रांत के निवासी गायत्री विद्या मंदिर इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डा. अरुण कुमार मिश्रा ने बताया यह महापर्व चार दिन तक मनाया जाता है। 36 घंटे का व्रत इस महापर्व का मुख्य अंग है। ज्यादातर महिलाएं सुख-समृद्धि, पुत्रों की दीर्घायु आदि की कामना के साथ अखंड सौभाग्यवती रहने के लिए इस व्रत को करती हैं।
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