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तुलसी की खेती के जरिए कमा कर रहे हैं मुनाफा
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Wed, 26 Aug 2015 12:21 AM IST
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हमीरपुर के उमरिया के किसान कम लागत में अधिक मुनाफा
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कमा रहे हैं। ये परंपरागत खेती पर आश्रित रहने के बजाय तुलसी की औषधीय खेती
कर रहे हैं। उमरिया के करीब 40 किसान इस खेती के जरिए प्रति बीघा करीब 35
हजार की आमदनी कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में हर साल इस इलाके में तुलसी
की खेती का रकबा बढ़ता जा रहा है।
उमरिया गांव के किसान रमाकांत ने 16 एकड़, अशोक कुमार ने 14, विनोद कुमार ने 15, ओमप्रकाश ने 8 एकड़, मनोज कुमार ने 20 एकड़ जमीन पर तुलसी की पौध लगाई है।
गांव के रमाकांत कहते हैं अब परंपरागत खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। बेमौसम बरसात से फसलें चौपट हो रही हैं। जुलाई में रोपित होने वाली तुलसी की फसल अक्तूबर में काट लेते हैं। इसके बाद चाहे जो जिन्स बो लेते हैं।
वह कई साल से इसकी खेती करते आ रहे हैं। अब तो धीरे-धीरे गांव के सभी किसान ही इस फसल की पैदावार ले रहे हैं। बताया कि तुलसी की खेती को बढ़ावा देने के लिए आर्गेनिक इंडिया कंपनी का काफी हद तक सहयोग है।
कंपनी के कर्मचारी किसानों का रजिस्ट्रेशन कराते हैं। बताया कि गांव के 30 किसानों से कंपनी ने अनुबंध किया है। इसके अनुसार वह 9200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तुलसी की सूखी पत्तियां खरीदती है।
साथ ही इस फसल का बीज भी वही लोग खरीदकर ले जाते हैं। मौजूदा समय में क्षेत्र के रिगवारा, तुरना और भैंसाय जैसे गांवों में बहुतायत में की जा रही है।
डीएचओ नन्हेलाल वर्मा ने कहा कि जिला उद्यान विभाग तुलसी की खेती करने पर किसानों की मदद कर रहा है। राष्ट्रीय औषधीय पौध मिशन के जरिए किसानों को औषधीय खेती करने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
चालू वित्तीय वर्ष में 10 हेक्टयर का प्रोग्राम बनाया गया है। प्रोग्राम आते ही किसानों को तुलसी की खेती के लिए करने पर अनुदान दिया जाएगा।
तुलसी के औषधीय उपयोग
औषधीय गुणों से युक्त तुलसी कफ वात शामक, दुर्गंधनाशक, रक्त शोधक हृदयोत्तेजक, ज्वरध्न, शोथहर, दीपक तथा पाचक के रूप में बहुतायत से आम आदमियों द्वारा प्रयोग किया जाता है। इसके बीजों में मूत्रल तथा बल्यता का गुण पाया जाता है। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग शक्ति वृद्धि, कुष्ठ रोग, दांत दर्द दूर करने वमन शांत करने करने, अतिसार एवं दस्त वात व्याधि तथा सभी प्रकार के ज्वरों में भी सफलता पूर्वक किया जाता है।
तुलसी का महत्व
यह औषधीय गुणों के परिपूर्ण होने के साथ सुगंधित तेल का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। यह लिलयेसी कुल का महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। तुलसी को अमृता, सुगंधा, वृंदा, वैष्णवी, सुखवल्लरी, विष्णुवल्लभा, श्रीकृष्ण वल्लभा जैसे पवित्र नामों से जाना जाता है। यह सर्व रोग निवारक तथा जीवनीय शक्तिवर्धक पौधा है। औषधीय गुणों की दृष्टि से रामा व श्यामा तुलसी सर्वश्रेष्ठ है।
उमरिया गांव के किसान रमाकांत ने 16 एकड़, अशोक कुमार ने 14, विनोद कुमार ने 15, ओमप्रकाश ने 8 एकड़, मनोज कुमार ने 20 एकड़ जमीन पर तुलसी की पौध लगाई है।
गांव के रमाकांत कहते हैं अब परंपरागत खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। बेमौसम बरसात से फसलें चौपट हो रही हैं। जुलाई में रोपित होने वाली तुलसी की फसल अक्तूबर में काट लेते हैं। इसके बाद चाहे जो जिन्स बो लेते हैं।
वह कई साल से इसकी खेती करते आ रहे हैं। अब तो धीरे-धीरे गांव के सभी किसान ही इस फसल की पैदावार ले रहे हैं। बताया कि तुलसी की खेती को बढ़ावा देने के लिए आर्गेनिक इंडिया कंपनी का काफी हद तक सहयोग है।
कंपनी के कर्मचारी किसानों का रजिस्ट्रेशन कराते हैं। बताया कि गांव के 30 किसानों से कंपनी ने अनुबंध किया है। इसके अनुसार वह 9200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तुलसी की सूखी पत्तियां खरीदती है।
साथ ही इस फसल का बीज भी वही लोग खरीदकर ले जाते हैं। मौजूदा समय में क्षेत्र के रिगवारा, तुरना और भैंसाय जैसे गांवों में बहुतायत में की जा रही है।
डीएचओ नन्हेलाल वर्मा ने कहा कि जिला उद्यान विभाग तुलसी की खेती करने पर किसानों की मदद कर रहा है। राष्ट्रीय औषधीय पौध मिशन के जरिए किसानों को औषधीय खेती करने को बढ़ावा दिया जा रहा है।
चालू वित्तीय वर्ष में 10 हेक्टयर का प्रोग्राम बनाया गया है। प्रोग्राम आते ही किसानों को तुलसी की खेती के लिए करने पर अनुदान दिया जाएगा।
तुलसी के औषधीय उपयोग
औषधीय गुणों से युक्त तुलसी कफ वात शामक, दुर्गंधनाशक, रक्त शोधक हृदयोत्तेजक, ज्वरध्न, शोथहर, दीपक तथा पाचक के रूप में बहुतायत से आम आदमियों द्वारा प्रयोग किया जाता है। इसके बीजों में मूत्रल तथा बल्यता का गुण पाया जाता है। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग शक्ति वृद्धि, कुष्ठ रोग, दांत दर्द दूर करने वमन शांत करने करने, अतिसार एवं दस्त वात व्याधि तथा सभी प्रकार के ज्वरों में भी सफलता पूर्वक किया जाता है।
तुलसी का महत्व
यह औषधीय गुणों के परिपूर्ण होने के साथ सुगंधित तेल का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। यह लिलयेसी कुल का महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है। तुलसी को अमृता, सुगंधा, वृंदा, वैष्णवी, सुखवल्लरी, विष्णुवल्लभा, श्रीकृष्ण वल्लभा जैसे पवित्र नामों से जाना जाता है। यह सर्व रोग निवारक तथा जीवनीय शक्तिवर्धक पौधा है। औषधीय गुणों की दृष्टि से रामा व श्यामा तुलसी सर्वश्रेष्ठ है।