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आठ परिषदीय स्कूलों में सिर्फ 392 छात्र
ब्यूरो/ अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Sat, 14 Mar 2015 11:34 PM IST
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कारण परिषदीय विद्यालयों से लोगों का मोह भंग हो गया है। आलम यह है कि
कस्बे में स्थित आठ स्कूलों में सिर्फ 392 बच्चे ही पंजीकृत हैं, जबकि 29
प्राइवेट स्कूलों में 5938 बच्चे पढ़ने जाते हैं। यह खुलासा जन सूचना
अधिकार के तहत मांगी जानकारी से हुआ है।
पालिका के नामित सदस्य शिवप्रसाद प्रजापति को दी जानकारी में अफसरों ने स्वीकारा कि कस्बे के आठों प्राथमिक विद्यालय जर्जर हैं। एक को छोड़कर सभी किराए के कच्चे भवनों में चल रहे हैं। इनमें से पांच विद्यालय में एक-एक अध्यापकों के भरोसे चल रहे हैं।
इन स्कूलों में मात्र तीन शिक्षामित्र हैं। हालत यह है कि स्कूलों के भवनों के छप्पर टूटे हैं। बल्लियां और बांध धंस चुके हैं। हुसैनगंज मोहल्ले के प्राथमिक इस्लामियां के बारे में प्रधानाध्यापक सफीकुर्रहमान ने बताया कि स्कूल मात्र 75 रुपये किराए के भवन में चल रहा है।
खंडहर मकान में खुले आसमान के नीचे रसोईघर है। पूर्वी तरौस के प्राथमिक स्कूल का भवन भी जर्जर है। अब विभाग ने इस विद्यालय में पढ़ाई बंद करा दी है। यहां के बच्चों को चौधराना प्राथमिक स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया। चौधराना के प्राथमिक स्कूल को विभाग दानित कह रहा है, पर इसकी मरम्मत की विभाग सुध नहीं ले रहा है।
टूटी टीनशेड, उसी में रसोई और सामान पड़ा है। ऐसा ही कुछ हाल मराठीपुरा के प्राथमिक विद्यालय का है। 10 गुणा 10 के एक कमरे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
पालिका के नामित सदस्य शिवप्रसाद प्रजापति को दी जानकारी में अफसरों ने स्वीकारा कि कस्बे के आठों प्राथमिक विद्यालय जर्जर हैं। एक को छोड़कर सभी किराए के कच्चे भवनों में चल रहे हैं। इनमें से पांच विद्यालय में एक-एक अध्यापकों के भरोसे चल रहे हैं।
इन स्कूलों में मात्र तीन शिक्षामित्र हैं। हालत यह है कि स्कूलों के भवनों के छप्पर टूटे हैं। बल्लियां और बांध धंस चुके हैं। हुसैनगंज मोहल्ले के प्राथमिक इस्लामियां के बारे में प्रधानाध्यापक सफीकुर्रहमान ने बताया कि स्कूल मात्र 75 रुपये किराए के भवन में चल रहा है।
खंडहर मकान में खुले आसमान के नीचे रसोईघर है। पूर्वी तरौस के प्राथमिक स्कूल का भवन भी जर्जर है। अब विभाग ने इस विद्यालय में पढ़ाई बंद करा दी है। यहां के बच्चों को चौधराना प्राथमिक स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया। चौधराना के प्राथमिक स्कूल को विभाग दानित कह रहा है, पर इसकी मरम्मत की विभाग सुध नहीं ले रहा है।
टूटी टीनशेड, उसी में रसोई और सामान पड़ा है। ऐसा ही कुछ हाल मराठीपुरा के प्राथमिक विद्यालय का है। 10 गुणा 10 के एक कमरे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।