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अतिक्रमण अभियान में टूटी चाय की गुमटी, वृद्धा की सदमे से मौत
Wed, 27 Feb 2019 11:08 PM IST
SHIVPRAKASH SHIVPRAKASH
हमीरपुर, उत्तर प्रदेश
हमीरपुर, उत्तर प्रदेश
Published by: SHIVPRAKASH SHIVPRAKASH
Updated Wed, 27 Feb 2019 11:08 PM IST
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नाराज परिजनों व ग्रामीणों को समझाते कोतवाल व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
छह दिन पूर्व हाईवे से हटाए गए अतिक्रमण में कई लोगों की दुकानें हटीं। जिससे उनकी रोजी रोटी छिन गई। हाईवे किनारे दुकान हटाए जाने से एक वृद्ध महिला की सदमे से मौत हो गई। इस घटना से गुस्साए परिजनों व ग्रामीणों ने शव को चारपाई पर रखकर हाईवे पर यमुना पुल के पास जाम लगा दिया। जिससे करीब आधे घंटे तक हाईवे जाम रहा। मौके पर पहुंचे अतिरिक्त एसडीएम अशोक यादव, सीओ अभिषेक कुमार ने नाराज लोगों को मुआवजा दिए जाने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।
कानपुर सागर राष्ट्रीय मार्ग-34 पर 22 फरवरी को यमुना पुल से लेकर बेतवा पुल तक सड़क के दोनों ओर किए गए अतिक्रमण को ढहाया गया था। जिसमें टिन टप्पर की दुकानों के अलावा पक्की व लोहे की दुकानों को गिरा दिया गया था। जिसमें एक सैकड़ा से अधिक छोटे दुकानदारों की दुकानें बंद होने से वह लोग बेरोजगार हो गए। भिलावां निवासी सुनील ने बताया हाईवे से काफी दूर किनारे पक्की चार दुकानें बनीं थी। दुकानों के किराये से उसका व उसके परिवार का भरण पोषण होता था।
बताया जिस दिन से यह दुकानें हटाई गईं उसी दिन से उसकी मां रामकली (65) की तबियत खराब हो गई। मंगलवार शाम जिला अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया, जहां बुुधवार सुबह उसकी मौत हो गई। बताया वर्ष 1983 में आई बाढ़ के बाद से उसके बाबा ओमप्रकाश ने यहां पर दुकानें बनाई थीं। इसी के पीछे वह टिन टप्पर लगाकर रहते हैं। कहा अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाते समय भेदभाव किया है। जबकि यमुना नदी किनारे स्थित लोनिवि के पुराने पक्के बैरियर को नहीं तोड़ा गया।
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घटना से गुस्साए परिजनों व ग्रामीणों ने मृतका के शव को चारपाई में रखकर हाईवे पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंचे अतिरिक्त एसडीएम, सीओ, कोतवाल केपी सिंह ने लोगों को समझाकर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। जिस पर करीब आधे घंटे बाद जाम खुला। इस दौरान जाम के कारण सड़क के दोनों ओर भारी व हल्के वाहनों की लाइन लग गई। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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कानपुर सागर राष्ट्रीय मार्ग-34 पर 22 फरवरी को यमुना पुल से लेकर बेतवा पुल तक सड़क के दोनों ओर किए गए अतिक्रमण को ढहाया गया था। जिसमें टिन टप्पर की दुकानों के अलावा पक्की व लोहे की दुकानों को गिरा दिया गया था। जिसमें एक सैकड़ा से अधिक छोटे दुकानदारों की दुकानें बंद होने से वह लोग बेरोजगार हो गए। भिलावां निवासी सुनील ने बताया हाईवे से काफी दूर किनारे पक्की चार दुकानें बनीं थी। दुकानों के किराये से उसका व उसके परिवार का भरण पोषण होता था।
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बताया जिस दिन से यह दुकानें हटाई गईं उसी दिन से उसकी मां रामकली (65) की तबियत खराब हो गई। मंगलवार शाम जिला अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया, जहां बुुधवार सुबह उसकी मौत हो गई। बताया वर्ष 1983 में आई बाढ़ के बाद से उसके बाबा ओमप्रकाश ने यहां पर दुकानें बनाई थीं। इसी के पीछे वह टिन टप्पर लगाकर रहते हैं। कहा अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाते समय भेदभाव किया है। जबकि यमुना नदी किनारे स्थित लोनिवि के पुराने पक्के बैरियर को नहीं तोड़ा गया।
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घटना से गुस्साए परिजनों व ग्रामीणों ने मृतका के शव को चारपाई में रखकर हाईवे पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंचे अतिरिक्त एसडीएम, सीओ, कोतवाल केपी सिंह ने लोगों को समझाकर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। जिस पर करीब आधे घंटे बाद जाम खुला। इस दौरान जाम के कारण सड़क के दोनों ओर भारी व हल्के वाहनों की लाइन लग गई। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार कर दिया।