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अभियोजन पक्ष ने की थी फांसी की मांग
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न्यायालय परिसर में अदालत के फैसले का इंतजार करते मृतक परिवार के तीनों भाई।
- फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। पति, पत्नी और चार बच्चों की हत्या में दोषी सभी 10 लोगों को फांसी की सजा की मांग अदालत से अभियोजन ने की थी। हालांकि अदालत ने दोषियों को उम्र कैद की ही सजा सुनाई। पीड़ित पक्ष ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई है। हत्या में दोषी कुछ लोगों ने फैसले से पहले राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की थी। उनका कहना था कि वह फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता राजेश शुक्ला, अशोक शुक्ला व प्रवीन भदौरिया ने अदालत से इस नरसंहार मामले में अभियुक्तों को फांसी की सजा देने की मांग की, लेकिन अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 12 वर्ष पुराने मामले में 13 गवाहों के बयान कराए गए थे। भाई व उसके परिवार की सामूहिक हत्या के मामले में मृतक के बड़े भाई सभाजीत सिंह, जयकरन सिंह व अमर सिंह सजा सुनने को दिन भर जजी परिसर में डटे रहे। उन्होंने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि हमें न्याय मिला है। किसी से कोई शिकवा शिकायत नहीं है। मालुम हो कि हत्या में दोषी पाए गए सुमित, अमित, आशीष, कामता, ओमप्रकाश, धनंजय ने शासन से सीबीआई, सीबीसीआईडी, नारको टेस्ट कराए जाने की मांग की थी। यह लोग राष्ट्रपति से भी इच्छा मौत की मांग कर चुके थे। इन लोगों का कहना था कि उन्हें राजनीतिक विद्वेश के चलते फंसाया गया है। कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
पीड़ित अमर सिंह ने बताया कि उसके भाई जगदीश को 10 मई 2009 को सत्यप्रकाश, प्रेम प्रकाश व उसके सहयोगी बहलाकर शराब के नशे में घर से ले गए थे। 12 मई को मीरा पत्नी सत्यप्रकाश, जयश्री पत्नी प्रेमप्रकाश के पक्ष में सात बीघा जमीन का बैनामा करवा लिया था। जगदीश की पत्नी बृजलता को जानकारी हुई तो दाखिल खारिज पर आपत्ति लगा दी थी। उसने व उसके भाई सभाजीत ने भी आपत्ति लगाई थी। आरोपियों ने धमकी दी कि आपत्ति वापस नहीं ली तो सभी को जान से मार देंगे।
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सामूहिक हत्याकांड को याद कर आज भी गांव के लोग सिहर उठते हैं। उस समय हर आंख नम हो गई थी। फैसला आने के बाद हर कोई इसी पर चर्चा करता रहा। लोगों का कहना था कि बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उनकी इतनी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
हत्या में दोषी गौरीशंकर माली, उसके पुत्र सत्ते उर्फ सत्यप्रकाश व प्रेम प्रकाश, कामता प्रसाद व उसका भाई ओमप्रकाश और चचेरा भाई धनंजय सिंह शामिल है। इसी तरह अमित कुमार, उसका भाई सुमित कुमार, चचेरे भाई आशीष शामिल हैं।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता जगदीश नारायन शर्मा, राजकरन सिंह भदौरिया, योगेश कुमार, भासीन व शिवशरण मिश्रा ने बताया कि 30 मार्च 2010 को एसटीएफ की ओर से जांच शुरू की गई थी। टीम वादी को थाने ले गई थी। इसकी जांच पूरी नहीं हुई और उसे बीच में ही दबा दिया गया। उधर वादी पक्ष के अधिवक्ता प्राणेश सिंह व शैलेंद्र सचान ने कहा दोषियों की जेल में बिताई गई अवधि सजा की अवधि में समायोजित की जाएगी।
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अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता राजेश शुक्ला, अशोक शुक्ला व प्रवीन भदौरिया ने अदालत से इस नरसंहार मामले में अभियुक्तों को फांसी की सजा देने की मांग की, लेकिन अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 12 वर्ष पुराने मामले में 13 गवाहों के बयान कराए गए थे। भाई व उसके परिवार की सामूहिक हत्या के मामले में मृतक के बड़े भाई सभाजीत सिंह, जयकरन सिंह व अमर सिंह सजा सुनने को दिन भर जजी परिसर में डटे रहे। उन्होंने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि हमें न्याय मिला है। किसी से कोई शिकवा शिकायत नहीं है। मालुम हो कि हत्या में दोषी पाए गए सुमित, अमित, आशीष, कामता, ओमप्रकाश, धनंजय ने शासन से सीबीआई, सीबीसीआईडी, नारको टेस्ट कराए जाने की मांग की थी। यह लोग राष्ट्रपति से भी इच्छा मौत की मांग कर चुके थे। इन लोगों का कहना था कि उन्हें राजनीतिक विद्वेश के चलते फंसाया गया है। कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
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पीड़ित अमर सिंह ने बताया कि उसके भाई जगदीश को 10 मई 2009 को सत्यप्रकाश, प्रेम प्रकाश व उसके सहयोगी बहलाकर शराब के नशे में घर से ले गए थे। 12 मई को मीरा पत्नी सत्यप्रकाश, जयश्री पत्नी प्रेमप्रकाश के पक्ष में सात बीघा जमीन का बैनामा करवा लिया था। जगदीश की पत्नी बृजलता को जानकारी हुई तो दाखिल खारिज पर आपत्ति लगा दी थी। उसने व उसके भाई सभाजीत ने भी आपत्ति लगाई थी। आरोपियों ने धमकी दी कि आपत्ति वापस नहीं ली तो सभी को जान से मार देंगे।
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सामूहिक हत्याकांड को याद कर आज भी गांव के लोग सिहर उठते हैं। उस समय हर आंख नम हो गई थी। फैसला आने के बाद हर कोई इसी पर चर्चा करता रहा। लोगों का कहना था कि बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उनकी इतनी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
हत्या में दोषी गौरीशंकर माली, उसके पुत्र सत्ते उर्फ सत्यप्रकाश व प्रेम प्रकाश, कामता प्रसाद व उसका भाई ओमप्रकाश और चचेरा भाई धनंजय सिंह शामिल है। इसी तरह अमित कुमार, उसका भाई सुमित कुमार, चचेरे भाई आशीष शामिल हैं।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता जगदीश नारायन शर्मा, राजकरन सिंह भदौरिया, योगेश कुमार, भासीन व शिवशरण मिश्रा ने बताया कि 30 मार्च 2010 को एसटीएफ की ओर से जांच शुरू की गई थी। टीम वादी को थाने ले गई थी। इसकी जांच पूरी नहीं हुई और उसे बीच में ही दबा दिया गया। उधर वादी पक्ष के अधिवक्ता प्राणेश सिंह व शैलेंद्र सचान ने कहा दोषियों की जेल में बिताई गई अवधि सजा की अवधि में समायोजित की जाएगी।

मृतक परिवार की फाइल फोटो।- फोटो : HAMIRPUR