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करवाचौथ पर आया पति का पार्थिव शरीर
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Wed, 19 Oct 2016 10:32 PM IST
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गहरौलीखुर्द में शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल होने आए ग्रामीण।
- फोटो : amarujala
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बुधवार को जहां पूरे देश में सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखकर पूजन अर्चन की तैयारी में लगी थीं। वहीं शहीद की विधवा के सामने उसके शव को मुखाग्नि दी गई। जिससे देखकर मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गईं।
मौदहा विकासखंड के गहरौली खुर्द गांव निवासी नरेश कुमार पाल का बीते दस वर्ष पूर्व सुमेरपुर विकासखंड के चंदपुरवा गांव निवासी शशिप्रभा के साथ शादी हुई थी। उसके एक सात वर्षीय पुत्री शिवांगी व चार वर्ष का पुत्र उत्कर्ष है। सेना में नौकरी के कारण नरेश घर का मुंह कम ही देख पाया। नरेश की नौकरी 2002 में लगी थी। पिछली बार वह अगस्त में घर आया था और नवंबर में घर आने को कहकर गया था। मगर शशिप्रभा को क्या पता कि अबकी करवाचौथ पर पति नहीं बल्कि उनका पार्थिव शरीर लौटेगा।
सरकार चाहे तो देश की सेवा भतीजों को ले ले
मौहदा। शहीद नरेश कुमार पाल के अधिवक्ता भाई बचनेश ने कहा कि वह गर्व महसूस कर रहे हैं। उनके दो भतीजे हैं। सरकार चाहे तो हम देश की सेवा के लिए उन्हें भेज देंगे। बड़े भाई मुन्नीलाल इस बात से बेहद दु:खी रहे। उन्होंने अपने भाई की अंत्येष्टि तब तक नहीं करने का एलान किया, जब तक मुख्यमंत्री या अन्य कोई सरकार का बड़ा मंत्री गांव नहीं आ जाता।
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कहा कि उन्हें धन नहीं चाहिए, उन्हें गांव व क्षेत्र का विकास चाहिए। शहीद सैनिक के भतीजे अशोक कुमार पाल ने कहा कि उन्हें चाचा पर गर्व है। हम ऐसे सैकड़ों नौजवान देश पर कुर्बान होने के लिए तैयार हैं। बाद में डीएम उदयवीर सिंह यादव व एसपी ने उनसे मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री का पैगाम सुनाया, तब कहीं वह अंत्येष्टि के लिए राजी हुए।
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मौदहा विकासखंड के गहरौली खुर्द गांव निवासी नरेश कुमार पाल का बीते दस वर्ष पूर्व सुमेरपुर विकासखंड के चंदपुरवा गांव निवासी शशिप्रभा के साथ शादी हुई थी। उसके एक सात वर्षीय पुत्री शिवांगी व चार वर्ष का पुत्र उत्कर्ष है। सेना में नौकरी के कारण नरेश घर का मुंह कम ही देख पाया। नरेश की नौकरी 2002 में लगी थी। पिछली बार वह अगस्त में घर आया था और नवंबर में घर आने को कहकर गया था। मगर शशिप्रभा को क्या पता कि अबकी करवाचौथ पर पति नहीं बल्कि उनका पार्थिव शरीर लौटेगा।
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सरकार चाहे तो देश की सेवा भतीजों को ले ले
मौहदा। शहीद नरेश कुमार पाल के अधिवक्ता भाई बचनेश ने कहा कि वह गर्व महसूस कर रहे हैं। उनके दो भतीजे हैं। सरकार चाहे तो हम देश की सेवा के लिए उन्हें भेज देंगे। बड़े भाई मुन्नीलाल इस बात से बेहद दु:खी रहे। उन्होंने अपने भाई की अंत्येष्टि तब तक नहीं करने का एलान किया, जब तक मुख्यमंत्री या अन्य कोई सरकार का बड़ा मंत्री गांव नहीं आ जाता।
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कहा कि उन्हें धन नहीं चाहिए, उन्हें गांव व क्षेत्र का विकास चाहिए। शहीद सैनिक के भतीजे अशोक कुमार पाल ने कहा कि उन्हें चाचा पर गर्व है। हम ऐसे सैकड़ों नौजवान देश पर कुर्बान होने के लिए तैयार हैं। बाद में डीएम उदयवीर सिंह यादव व एसपी ने उनसे मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री का पैगाम सुनाया, तब कहीं वह अंत्येष्टि के लिए राजी हुए।