{"_id":"58c041254f1c1b6d43dc6d5e","slug":"clouds-scared-to-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को डरा रहे बादल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को डरा रहे बादल
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Wed, 08 Mar 2017 11:06 PM IST
विज्ञापन
मौसम के बदलाव के बाद थ्रेशिंग कार्य में जुटे किसान।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुबह से घुमड़ रहे बादलाें ने किसानाें के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। एक ओर जहां किसान मटर, मसूर, लाही सरसों की फसलाें की कटाई करने में लगा है। वहीं, अब मौसम के बदलते तेवरों को देख किसान खेतों में पड़ी फसलों को समेटने में लग गया है। मौसम की मार झेल रहे जिले के किसानों
के माथे में एक बार फिर चिंता की लकीरें दिख रही हैं। बुधवार की सुबह से बादलों के साथ हल्की फुहारों ने उन्हें भयभीत कर दिया है। किसानाें का कहना है कि कई वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं से उनकी आर्थिक स्थिति को खासा नुकसान पहुंचा है। वहीं, इस वर्ष बिना किसी बाधा के अब तक फसलों को देखकर
अच्छी पैदावार की उम्मीदें लगा रखी है। लेकिन अचानक मौसम के बदलाव को देखकर मन मे बेचैनी हो रही है। इसके चलते वह खेतों में कटी पड़ी फसल को जल्द से जल्द समेट घर पहुंचाने की जुगत में लगा है। कुरारा विकास खंड के जखेला गांव निवासी मुल्लू सिंह ने बताया कि दस बीघे में मटर बोया था।
विज्ञापन
जिसकी कटाई का काम चल रहा है। अभी आधी कटाई हुई है। मौसम के बदलते मिजाज को देखकर पहले कटे मटर की कतराई का काम शुरू करा दिया है। बाकी खेत की कटाई बाद में होती रहेगी।
बेमौसम बादल देख किसान हैरान
मौसम के बदलते तेवरो ने रबी की फसल की कटाई में लगे किसानाें के दिलों की धड़कने बढ़ा दी है। प्राकृतिक आपदा की आशंका से किसान भयभीत दिखाई दे रहे है।लगभग आठ साल से प्राकृतिक आपदा का दंश झेल रहे किसानों को इस बार रबी की लहलहाती फसले मरहम लगा रही है। बर्षो बाद खेती से
अच्छी पैदावार होने की संभावना दिखाई दे रही है। लेकिन मंगलवार की रात से आसमान में घुमड़ते बादलों ने किसानों की धड़कने तेज कर दी है। किसान जुगुल किशोर, रामप्रसाद, नाथूराम, हरिसिंह, भूपसिंह, रामकृपाल, श्रीपत आदि का कहना है कि इस समय मसूर व मटर की कटाई व थ्रेसिंग चल रही है।
चना, गेहूं, लाही की फसले भी पकना शुरू हो गई है। किसी तरह का प्राकृतिक कहर किसानों को तबाह कर देगा। भगवान से दूआ मांगते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर इस बार रहम करना। बड़े जतन से फसले उगाई है।
विज्ञापन
के माथे में एक बार फिर चिंता की लकीरें दिख रही हैं। बुधवार की सुबह से बादलों के साथ हल्की फुहारों ने उन्हें भयभीत कर दिया है। किसानाें का कहना है कि कई वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं से उनकी आर्थिक स्थिति को खासा नुकसान पहुंचा है। वहीं, इस वर्ष बिना किसी बाधा के अब तक फसलों को देखकर
विज्ञापन
अच्छी पैदावार की उम्मीदें लगा रखी है। लेकिन अचानक मौसम के बदलाव को देखकर मन मे बेचैनी हो रही है। इसके चलते वह खेतों में कटी पड़ी फसल को जल्द से जल्द समेट घर पहुंचाने की जुगत में लगा है। कुरारा विकास खंड के जखेला गांव निवासी मुल्लू सिंह ने बताया कि दस बीघे में मटर बोया था।
विज्ञापन
जिसकी कटाई का काम चल रहा है। अभी आधी कटाई हुई है। मौसम के बदलते मिजाज को देखकर पहले कटे मटर की कतराई का काम शुरू करा दिया है। बाकी खेत की कटाई बाद में होती रहेगी।
बेमौसम बादल देख किसान हैरान
मौसम के बदलते तेवरो ने रबी की फसल की कटाई में लगे किसानाें के दिलों की धड़कने बढ़ा दी है। प्राकृतिक आपदा की आशंका से किसान भयभीत दिखाई दे रहे है।लगभग आठ साल से प्राकृतिक आपदा का दंश झेल रहे किसानों को इस बार रबी की लहलहाती फसले मरहम लगा रही है। बर्षो बाद खेती से
अच्छी पैदावार होने की संभावना दिखाई दे रही है। लेकिन मंगलवार की रात से आसमान में घुमड़ते बादलों ने किसानों की धड़कने तेज कर दी है। किसान जुगुल किशोर, रामप्रसाद, नाथूराम, हरिसिंह, भूपसिंह, रामकृपाल, श्रीपत आदि का कहना है कि इस समय मसूर व मटर की कटाई व थ्रेसिंग चल रही है।
चना, गेहूं, लाही की फसले भी पकना शुरू हो गई है। किसी तरह का प्राकृतिक कहर किसानों को तबाह कर देगा। भगवान से दूआ मांगते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर इस बार रहम करना। बड़े जतन से फसले उगाई है।