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Hamirpur News: खेल-खेल में मां की बीमारी की दवाएं खाने से बालक की मौत
Thu, 23 May 2024 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Thu, 23 May 2024 12:21 AM IST
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सरीला (हमीरपुर)। जलालपुर थाना क्षेत्र के बरखेड़ा गांव में बुधवार सुबह एक बालक ने खेल-खेल में अपनी मां की बीमारी की दवा खा ली। इससे वह बेहोश हो गया।
जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में बालक ने दम तोड़ दिया। बालक के पास पड़े दवा के पत्ते में तीन गोलियां कम पाए जाने पर परिजनों ने दवा खाने से मौत होने की आशंका जताई है। बालक इकलौता बेटा था।
बरखेड़ा गांव निवासी बाबादीन ने बताया कि वह गांव में मेहनत मजदूरी कर परिवार चलाता है। उसकी पत्नी ऊषा बीमार रहती है। उसका उपचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि वह बुधवार को काम पर गया था। पत्नी घर के बाहर बैठी थीं। तभी भीतर खेल रहे उसके इकलौते बेटे भरत कुमार (9) ने सुबह करीब आठ बजे अलमारी में ऊपर रखीं दवाएं उठाकर खा लीं।
इससे वह बेहोश हो गया। थोड़ी देर बाद भरत के बाबा प्यारेलाल खाना खाने के लिए उसे खोजने गए। तो उसे बेहोशी हालत में पड़ा देखा। पास में टेबलेट का पत्ता पड़ा मिला। उसमें तीन गोलियां गायब थीं। नाती की हालत बिगड़ी देख वह उसे पास के गांव बंगरा स्थित अस्पताल में ले गए। जहां से जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही भरत की मौत हो गई।
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मृतक के परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव को लेकर घर चले गए। भरत अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। वह गांव के प्राथमिक स्कूल में कक्षा चार का छात्र था। ग्रामीणों ने बताया कि भरत की मां मानसिक रूप से बीमार चल रही हैं। उसका इलाज चल रहा है। उसी की दवा खाने से बच्चे की मौत हुई है।
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जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में बालक ने दम तोड़ दिया। बालक के पास पड़े दवा के पत्ते में तीन गोलियां कम पाए जाने पर परिजनों ने दवा खाने से मौत होने की आशंका जताई है। बालक इकलौता बेटा था।
बरखेड़ा गांव निवासी बाबादीन ने बताया कि वह गांव में मेहनत मजदूरी कर परिवार चलाता है। उसकी पत्नी ऊषा बीमार रहती है। उसका उपचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि वह बुधवार को काम पर गया था। पत्नी घर के बाहर बैठी थीं। तभी भीतर खेल रहे उसके इकलौते बेटे भरत कुमार (9) ने सुबह करीब आठ बजे अलमारी में ऊपर रखीं दवाएं उठाकर खा लीं।
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इससे वह बेहोश हो गया। थोड़ी देर बाद भरत के बाबा प्यारेलाल खाना खाने के लिए उसे खोजने गए। तो उसे बेहोशी हालत में पड़ा देखा। पास में टेबलेट का पत्ता पड़ा मिला। उसमें तीन गोलियां गायब थीं। नाती की हालत बिगड़ी देख वह उसे पास के गांव बंगरा स्थित अस्पताल में ले गए। जहां से जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही भरत की मौत हो गई।
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मृतक के परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए शव को लेकर घर चले गए। भरत अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। वह गांव के प्राथमिक स्कूल में कक्षा चार का छात्र था। ग्रामीणों ने बताया कि भरत की मां मानसिक रूप से बीमार चल रही हैं। उसका इलाज चल रहा है। उसी की दवा खाने से बच्चे की मौत हुई है।