फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hamirpur News ›   Ayurveda and Unani hospital is sick, how to get treatment

जड़ी बूटी को बढ़ावा देने वाले आयुर्वेद व यूनानी अस्पतालों की अनदेखी

Wed, 02 Mar 2022 11:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 11:50 PM IST
विज्ञापन
Ayurveda and Unani hospital is sick, how to get treatment
मौदहा (हमीरपुर)। यूनानी और आयुर्वेद के अस्पतालों की अनदेखी से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
विज्ञापन

कोरोना काल में इन अस्पतालों के जरिए लोगों ने काढ़े के साथ अन्य दवाओं का सहारा लिया। देसी दवाएं कोरोना से बचाव में कारगर साबित हुईं। कस्बे में 30 वर्ष पूर्व किराए के भवन पर 15 बेड का यूनानी अस्पताल स्थापित हुआ। यही अस्पताल अब दो कमरों में रह गया है। इसमें दो चिकित्सक, दो स्टाफ नर्स के साथ कुल 13 कर्मियों के पद सृजित हैं। वहीं कम्हरिया गांव में संचालित एक यूनानी चिकित्सालय का नया भवन बन चुका है। मगर अभी तक हैंडओवर नहीं किया गया है। यहां पर एक मात्र चिकित्सक की तैनाती है। अस्पताल में अन्य स्टाफ न होने पर चौकीदार गोपाल सभी व्यवस्थाएं संभाले हैं। कम्हरिया के डॉक्टर को मौदहा का कार्यभार भी सौंपा गया है। मौदहा में 13 कर्मियों में मात्र धोबी के पद पर तैनात कर्मी मदन ही दवा वितरण करते हैं। इसके पीछे चार दिन डॉक्टर की दूसरे अस्पताल में ड्यूटी रहती है।
मौजूदा समय में एक भी बेड नहीं
-कस्बे के स्टेशन रोड पर सिर्फ नाम के लिए ही 15 बेड यूनानी अस्पताल है। यहां एक बेड भी नहीं है। अस्पताल के अधीन भारी भरकम जमीन है, लेकिन सिर्फ एक छोटा कमरा ही बन सका है वह अभी हैंडओवर नहीं हो सका है। अस्पताल पुराने स्थान पर किराए के कमरे में ही चलाया जा रहा है। अस्पताल में दवाएं पर्याप्त हैं। फार्मासिस्ट तथा अन्य स्टाफ के अभाव से मरीजों की संख्या घटती जा रही है।
विज्ञापन

--------------------
जड़ी बूटियां ज्यादा प्रभावी
ाद
कस्बा निवासी व्यापारी भागवत प्रसाद का कहना है कि देसी पद्धति से इलाज कराना लोग ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन सरकार इस पर तवज्जो नहीं दे रही है। ऐसा लगता है कि सिर्फ नारा ही स्वदेसी का है।
विज्ञापन
विज्ञापन

---------------------
एलोपैथिक दवाएं बेहद महंगी
कस्बे के मलीकुआं निवासी खालिक कुरैशी ने कहा सीएचसी में कुछ नि:शुल्क दवाएं मिल जाती हैं। इसके बाद बाहर से महंगी दवा खरीदना क्षमता से बाहर होता है। देसी पद्धति के यूनानी दवाएं सस्ती होने के साथ नुकसान नहीं करतीं। ऐसी स्थिति में इनके अस्पताल या तो बंद होने के कगार पर हैं या फिर डाक्टर ने होने से इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

--------------------
कम्हरिया गांव स्थित यूनानी अस्पताल में तैनात हैं। मौदहा का अतिरिक्त प्रभार है। यहां कर्मियों का भारी अभाव है। सरकार की मंशा के अनुरूप किसी तरह काम चलाया जा रहा है। कम्हरिया का भवन तो बना लेकिन हैंडओवर नहीं हुआ है।
डा .तमकीन खां, चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed