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पशु प्रेम : पिल्ले के जन्म पर कुआं पूजन और भोज
Sun, 10 Nov 2024 12:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sun, 10 Nov 2024 12:26 AM IST
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राठ (हमीरपुर)। कोतवाली क्षेत्र के बिलरख गांव में ग्रामीणों ने पशु प्रेम का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। गांव में एक कुतिया ने पिल्ले को जन्म दिया।
इसके बाद ग्रामीणों ने धूमधाम से उसका कुआं पूजन कार्यक्रम किया। नाच-गाना व आतिशबाजी के साथ ही गांव में भोज भी कराया गया। इस कार्यक्रम में आसपास के गांवों से भी ग्रामीण पहुंचे।
बिलरख गांव के अरुण, गट्टू आदि ने बताया कि मोहल्ले में एक काले रंग की कुतिया है। मोहल्ले के लोग प्यार से उसे रानी बुलाते हैं। रानी ने 15 दिन पहले एक पिल्ले को जन्म दिया था। मोहल्ले वालों ने पिल्ले का नाम राजा बाबू रखा।
उन्होंने बताया कि कुतिया और उसके बच्चे से ग्रामीण इस कदर भावनात्मक रूप से जुड़ गए कि उसके कुआं पूजन की ठान ली। प्रधान जीतू, रामसहोदर राजपूत, गुड्डू पासवान, अन्नू, अरुण पासवान आदि ने इस कार्यक्रम का बीड़ा उठाया।
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आसपास के गांवों में भी कुआं पूजन का निमंत्रण भेजा गया। शुक्रवार को धूमधाम से कुआं पूजन की रश्में निभाईं गईं। कुतिया और उसके पिल्ले को नए कपड़े पहनाकर फूल मालाओं से सजाया गया। बैंड बाजों की धुनों पर जमकर नाच-गाना हुआ। आतिशबाजी भी की गई। कुआं पूजन के बाद देर रात तक भोज चलता रहा।
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इसके बाद ग्रामीणों ने धूमधाम से उसका कुआं पूजन कार्यक्रम किया। नाच-गाना व आतिशबाजी के साथ ही गांव में भोज भी कराया गया। इस कार्यक्रम में आसपास के गांवों से भी ग्रामीण पहुंचे।
बिलरख गांव के अरुण, गट्टू आदि ने बताया कि मोहल्ले में एक काले रंग की कुतिया है। मोहल्ले के लोग प्यार से उसे रानी बुलाते हैं। रानी ने 15 दिन पहले एक पिल्ले को जन्म दिया था। मोहल्ले वालों ने पिल्ले का नाम राजा बाबू रखा।
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उन्होंने बताया कि कुतिया और उसके बच्चे से ग्रामीण इस कदर भावनात्मक रूप से जुड़ गए कि उसके कुआं पूजन की ठान ली। प्रधान जीतू, रामसहोदर राजपूत, गुड्डू पासवान, अन्नू, अरुण पासवान आदि ने इस कार्यक्रम का बीड़ा उठाया।
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आसपास के गांवों में भी कुआं पूजन का निमंत्रण भेजा गया। शुक्रवार को धूमधाम से कुआं पूजन की रश्में निभाईं गईं। कुतिया और उसके पिल्ले को नए कपड़े पहनाकर फूल मालाओं से सजाया गया। बैंड बाजों की धुनों पर जमकर नाच-गाना हुआ। आतिशबाजी भी की गई। कुआं पूजन के बाद देर रात तक भोज चलता रहा।