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कुंभ हादसे की न्यायिक जांच के आदेश
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Mon, 18 Feb 2013 11:38 AM IST
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राज्य सरकार ने इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ के दौरान हुई मौतों की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति ओंकारेश्वर भट्ट को जांच सौंपी गई है। राज्य सरकार ने इसके पहले राजस्व परिषद के चेयरमैन जगन मैथ्यूज को जांच सौंपी थी, लेकिन उन्होंने अभी तक जांच शुरू नहीं की थी। प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव ने बताया कि न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दो माह में वे अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।
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मौनी अमावस्या के दिन 10 फरवरी की शाम इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने से कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से राजस्व परिषद के चेयरमैन को जांच सौंपने की घोषणा की थी। उन्हें एक महीने में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। मगर उन्होंने हादसे के एक सप्ताह बाद भी जांच शुरू नहीं की।
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इस बीच सरकार की ओर से कुंभ आयोजन से जुड़े अधिकारियों को क्लीन चिट देने के बाद भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों ने न्यायिक जांच की मांग शुरू कर दी। विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों ने कुंभ हादसे के लिए सरकार पर विफलता का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। विधान मंडल का सत्र सोमवार को फिर शुरू हो रहा है, इससे पहले राज्य सरकार ने न्यायिक जांच कराने का फैसला किया।
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कौन हैं न्यायमूर्ति ओंकारेश्वर भट्ट
न्यायमूर्ति ओंकारेश्वर भट्ट का जन्म 29 मार्च 1942 को हुआ था। भट्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की और 1962 में अधिवक्ता केरूप में अपना कॅरियर शुरू किया। प्रदेश की न्यायिक सेवा में चयन के बाद वह 29 मई 1970 को मुंसिफ नियुक्त हुए।
दिसंबर 1979 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नति मिली और 1992 से में जिला जज नियुक्त हुए। 26 मार्च 1999 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियुक्त किए जाने तक वह इसी पद पर रहे। 28 मार्च 2004 को वह हाईकोर्ट से रिटायर हुए।