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पेंशन के लिए चक्कर काट रहा अंतर्राष्ट्रीय कलाकार
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 14 Jan 2017 12:49 AM IST
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तबलावादक साकेत महाराज।
अंतर्राष्ट्रीय फलक पर तबले से शहर का नाम रौशन कर चुके तबलावादक साकेत महाराज पेंशन की खातिर भटक रहे हैं। अक्टूबर 2015 में यूनिवर्सिटी के ललित कला विभाग से रिटायर हुए इस कलाकार को अपनी पेंशन हासिल करने के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। शुक्रवार को यूनिवर्सिटी में कार्यालयों के चक्कर काटते हुए साकेत महराज का सामना पत्रकारों से हुआ तो उनकी पीड़ा आंसू बनकर बह निकली।
बताया कि पेंशन की रकम के लिए एक साल से उधार लेकर खा रहा हूं। 72 साल की उम्र में केवल एक हस्ताक्षर के लिए सैकड़ों बार यूनिवर्सिटी का चक्कर काट चुका हूं। इस उम्मीद में आ चुका हूं कि शायद यह आखिरी बार होगा और मुझे पेंशन मिलने लगेगी। पर हर बार मायूस लौटना पड़ता है। वित्त अधिकारी कहते हैं आपकी समस्या के समाधान के लिए हमें वार्ता करनी होगी और आज तक उनकी वार्ता नहीं हो पायी है।
साकेत महाराज ने बताया कि पेंशन की आस में यह इलाहाबाद भी जा चुके हैं पर नतीजा सिफर रहा है। बच्चों की तरह फफकते साकेत महराज ने यूनिवर्सिटी में अपनी 30 साल की सेवा को याद करने लगते हैं। विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष राजेश्वराचार्य के निवेदन पर मैने यहां ज्वाइन किया था। तब से देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में भी मैंने अपनी कला का प्रदर्शन किया है। नीदरलैंड गृह मंत्रालय के निवेदन पर एक वर्ष तक वहां रहा और विभिन्न कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी।
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इस बारे में वित्त अधिकारी अतुल श्रीवास्तव का कहना है कि उनके दस्तावेजों में कुछ त्रुटियां हैं जिन्हें दुरुस्त किया जाना है, कार्य प्रक्रिया में है। पर सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी कमियां हैं जो एक साल से भी ज्यादा समय में ठीक नहीं हो पा रही हैं। फिलहाल साकेत महराज याचकी कंपाउंड में अकेले रह रहे हैं। उनका जीवन पूरी तरह से शिष्यों की सेवा पर निर्भर है। उम्र के अंतिम पड़ाव पर साकेत महराज जो परेशानी झेल रहे हैं उसके लिए जिम्मेदार कौन है यह जांच का विषय है।
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बताया कि पेंशन की रकम के लिए एक साल से उधार लेकर खा रहा हूं। 72 साल की उम्र में केवल एक हस्ताक्षर के लिए सैकड़ों बार यूनिवर्सिटी का चक्कर काट चुका हूं। इस उम्मीद में आ चुका हूं कि शायद यह आखिरी बार होगा और मुझे पेंशन मिलने लगेगी। पर हर बार मायूस लौटना पड़ता है। वित्त अधिकारी कहते हैं आपकी समस्या के समाधान के लिए हमें वार्ता करनी होगी और आज तक उनकी वार्ता नहीं हो पायी है।
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साकेत महाराज ने बताया कि पेंशन की आस में यह इलाहाबाद भी जा चुके हैं पर नतीजा सिफर रहा है। बच्चों की तरह फफकते साकेत महराज ने यूनिवर्सिटी में अपनी 30 साल की सेवा को याद करने लगते हैं। विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष राजेश्वराचार्य के निवेदन पर मैने यहां ज्वाइन किया था। तब से देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में भी मैंने अपनी कला का प्रदर्शन किया है। नीदरलैंड गृह मंत्रालय के निवेदन पर एक वर्ष तक वहां रहा और विभिन्न कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी।
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इस बारे में वित्त अधिकारी अतुल श्रीवास्तव का कहना है कि उनके दस्तावेजों में कुछ त्रुटियां हैं जिन्हें दुरुस्त किया जाना है, कार्य प्रक्रिया में है। पर सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी कमियां हैं जो एक साल से भी ज्यादा समय में ठीक नहीं हो पा रही हैं। फिलहाल साकेत महराज याचकी कंपाउंड में अकेले रह रहे हैं। उनका जीवन पूरी तरह से शिष्यों की सेवा पर निर्भर है। उम्र के अंतिम पड़ाव पर साकेत महराज जो परेशानी झेल रहे हैं उसके लिए जिम्मेदार कौन है यह जांच का विषय है।