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वोटरों की संख्या ने बिगाड़ा चुनावी समीकरण
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 07 Dec 2016 01:21 AM IST
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नए सिरे से बन रही वोटर लिस्ट ने गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक क्षेत्र का चुनावी समीकरण बिगाड़ दिया है। नई वोटर लिस्ट में मतदाताओं की संख्या घटकर आधे से भी कम हो गई है। पुरानी लिस्ट में जहां सभी 17 जिलों में करीब 3.70 लाख मतदाता थे, वहीं नई लिस्ट में यह संख्या 1.30 लाख हो गई है। मतदाता बनने के लिए दो दिन का और मौका है। माना जा रहा है कि इन दो दिनों में 10 हजार से अधिक मतदाता नहीं बन सकेंगे। यानी पुरानी वोटर लिस्ट की तुलना में इस बार आधे मतदाता ही प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला करेंगे।
गोरखपुर जिले में तो मतदाताओं की संख्या 95 हजार से सिमटकर करीब 20 हजार ही रह जाएगी। कुछ संभावित प्रत्याशियों ने आयोग से वोटर बनने की मोहलत और बढ़ाने की सिफारिश की थी, मगर आयोग ने उसे खारिज कर दिया। आठ दिसंबर को मतदाता बनने और आपत्तियां दर्ज कराने का समय खत्म हो जाएगा और तय कार्यक्रम के मुताबिक 30 दिसंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो जाएगा। उधर विधानसभा चुनाव के ही पहले स्नातक निर्वाचन कराने की सुगबुगाहट है। अगर ऐसा हुआ तो जनवरी के पहले सप्ताह में ही अधिसूचना जारी हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई मतदाता सूची तैयार करने के लिए आयोग इस बार ज्यादा सतर्क है। सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वोटर बनने के लिए बल्क में फॉर्म स्वीकार न किए जाएं। पहले प्रत्याशी अपनी तरफ से ही फॉर्म भरवाकर जमा कर देते थे। ऐसे में सभी संभावित प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ी हुई है।
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गोरखपुर जिले में तो मतदाताओं की संख्या 95 हजार से सिमटकर करीब 20 हजार ही रह जाएगी। कुछ संभावित प्रत्याशियों ने आयोग से वोटर बनने की मोहलत और बढ़ाने की सिफारिश की थी, मगर आयोग ने उसे खारिज कर दिया। आठ दिसंबर को मतदाता बनने और आपत्तियां दर्ज कराने का समय खत्म हो जाएगा और तय कार्यक्रम के मुताबिक 30 दिसंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो जाएगा। उधर विधानसभा चुनाव के ही पहले स्नातक निर्वाचन कराने की सुगबुगाहट है। अगर ऐसा हुआ तो जनवरी के पहले सप्ताह में ही अधिसूचना जारी हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई मतदाता सूची तैयार करने के लिए आयोग इस बार ज्यादा सतर्क है। सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वोटर बनने के लिए बल्क में फॉर्म स्वीकार न किए जाएं। पहले प्रत्याशी अपनी तरफ से ही फॉर्म भरवाकर जमा कर देते थे। ऐसे में सभी संभावित प्रत्याशियों की धुकधुकी बढ़ी हुई है।
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